दोस्त की बहन चुदाई– 2

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दोस्त की बहन कंचन से मामला फिट हो जाने के hindi sex stories के इस भाग में जब मैं मौके से कंचन के पास पहुंचा तब वह चूत चुदवाने से इनकार करने लगी..

नमस्कार दोस्तो,
उम्मीद है आपको मेरी पहली कहानी पसद आई होगी आपने पढ़ा की कैसे कंचन ने मेरे साथ सम्बन्ध बनाए।
उस दिन घर जाने के बाद मैं कंचन के बारे मे सोच कर दो बार ओर मुट्ठी का मज़ा लिया

दूसरे दिन मैं रवि के घर गया मेरा मन तो कंचन के पास जाने का कर रहा था लेकिन रवि मुझे घर पर ही मिला ओर वो मुझे शादी के काम के लिए बाज़ार ले गया, बाज़ार जाकर कंचन का रवि के फोन पर फोन आया ओर कहा की पिंकी को ले आना शादी तक वो घर पर ही रहेगी।

रवि ने मुझे बताया की पिंकी को लेकर आना है वो शादी तक घर पर ही रहेगी, मुझे लगा अगर वो रहेगी तो मैं कंचन को कैसे चोदूंगा।
मैं- क्यों.. रवि- तुझे क्या हुआ।

मैं- बस ऐसे ही। रवि- चल उससे भी लाना है एक कम कर तू सामान लेकर घर चला जइयो ओर जो बचेगा वो मैं आते वक़्त ले आऊंगा, अब मैं पिंकी को लाने जा रहा हूँ ‘ठीक है..।’
मैं- ठीक है और रवि पिंकी को लेने चला गया मैने घर आकर कंचन क पास चला गया

मैं- तुमने पिंकी को क्यों बुला लिया अब मैं सेक्स कैसे कर सकता हूँ।
कंचन- वो तो तुम अब भी कर सकते हो। मैं- कैसे..।

कंचन- अभी यहीं। मैं- कोई आ जाएगा।

कंचन- रवि भैया को तो टाइम लगेगा ओर मम्मी अभी है नहींं और ओर कोई आ नहींं सकता अभी, तो मैने कंचन को कस के बाहों मे भर लिया ओर किस करने लगा ओर वो भी करने लगी।

मेरा लंड उसको चुभने लगा तो उससे अपना हाथ मेरी पैंट मे डाला ओर दबाने लगी।

कंचन- कितना गरम है। मैं- तो ठंडा कर दे मेरी जान।

कंचन मेरी पैंट उतार कर लंड को मुँह मे लेकर पीने लगी, मुझे मज़ा आने लगा मैने कंचन को बेड पर ले गया ओर 69 की अवस्था मे हम दोनो एक दूसरे का पानी पीने लगे, करीब 5 मिनट बाद मे झड गया ओर वो भी उसने मेरा सारा पानी पी लिया।

कंचन- कैसा लगा। मैं- मज़ा आ गया लेकिन अगर तुम्हारी चूत मिल जाती तो मज़ा ही कुछ और था।
कंचन- नहींं मुझे चूत में नहींं डलवाना। मैं- क्यों..।

कंचन- क्योंकि अभी 2 दिन पहले ही मेरी पीरियड बंद हुए हैं।
मैं- तो किया हुआ ( अंजान बनते हुए)।
कंचन- अगर तुम्हारा पानी अंदर चला गया तो बच्चा हो जाएगा। मैं- मैं पानी अंदर नहीं डालूँगा पक्का।

कंचन- नहींं जा भी सकता है। मैं- नहीं डालूँगा यार।
कंचन- नहींं तो नहींं। मैं- कब तक हो सकता है बच्चा।

कंचन- ये तो हर लड़की का अलग होता है किसी का तो पीरियड के 5 दिन बाद तक किसी को 10 दिन बाद तक। मैं- तुम्हारा कब तक हो सकता है

कंचन- मुझे क्या पता मैंने बच्चा किए नहींं अभी तक। मैं- तो कब तक नहींं होगा।
कंचन- मेरे दोबारा पीरियड चलने से एक दो दिन पहले कर लेना। मैं- एक महीना बिना सेक्स के।

कंचन- मैंने ये कब कहा की तुम कुछ नहीं कर सकते ह्म रोज़ ऐसे ही किया करेंगे।
मैं- एक काम ओर भी हो सकता है अगर तुम चाहो तो दर्द तो होगा थोडा बहुत लेकिन मज़ा भी आएगा।

कंचन- क्या तुम उसके बारे में तो नहीं सोच रहे। मैं- हाँ..।
कंचन- नहींं मुझे नहीं करवाना। मैं- देख ले यार।
कंचन- नहीं हम ऐसे ही कर लेंगे करना है तो करो वरना ये भी मत करो। मैं- चल ठीक है तू नाराज़ क्यों होती है।

मैं उसकी चूत को सहलाने लगा ओर वो मेरे लंड को, कुछ देर में हम फिर गर्म हो गये वो ‘आहें..’ भरने लगी, मैं धीरे धीरे उसकी चूत में उंगली करने लगा।
वो मुझसे चिपकने लगी मैने उसकी चूत मे एक उंगली पूरी अंदर डाल दी ओर ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा ओर अपनी जीभ से चूत की झिल्ली चाटने लगा।

कभी कभी जीभ को उसकी गाँड पर भी कर देता ओर एक हाथ उसकी चूची को दबा रहा था। मैने उसे इतना पागल कर दिया था की वो कहने लगी की प्लीज़ उंगली को ओर तेज करो कुछ देर बाद उसका पानी निकल गया ओर वो शांत हो गई लेकिन मैं अभी शांत नहीं हुआ।

मैं- अभी मैं शांत नहीं हुआ मुझे भी तो कर। कंचन- लाओ अभी कर देती हूँ। और वो लंड को मुँह मे लेने लगी मैने सोचा की अब पानी मुँह में नहींं निकालना ओर सोचा की चूत नहींं तो आज इसकी गाँड ज़रूर मारूँगा।

मैं उसकी चूत चाटने लगा ओर एक हाथ से उसकी गाँड सहला रहा था उसे भी सेक्स चढ़ रहा था तो मैंने मौका देख कर उसकी गाँड मे अपनी उँगली डाल दी।
उसने कोई विरोध नहीं किया मैंने पूरी उँगली डाल दी तो उसे दर्द हुआ ओर हाथ हटाने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने हटाया नहींं थोड़ी देर बाद मैंने उससे उल्टा लेटने के लिए कहा।

कंचन- नहींं मैं नहीं होउंगी तुम अंदर डालोगे। मैं- मैं प्यार से डालूँगा दर्द होगा तो बता देना मैं निकाल लूँगा, वो मान गई।
तभी मेरा फोन बजा देखा तो रवि का था, मैंने सोचा ये आ तो नहींं गया इतनी मुश्किल से तो इसे मनाया है, अगर ये आ गया और बुला लिया तो जाना पड़ेगा तो मैंने फोन नहीं उठाया।

ओर गाँड पर लंड रखा ओर थोड़ा सा अंदर डालने की कोशिश की लेकिन नहीं गया, मैने उसकी ब्यूटी क्रीम ली ओर थोड़ी सी लंड पर लगाई ओर थोड़ी सी गाँड पर जिससे मेरा लंड थोड़ा सा अंदर चला गया ओर वो दर्द से रो पड़ी।

कंचन- प्लीज़ निकालो बहुत दर्द हो रहा है मेरी जान निकल जाएगी। मैं- ठीक है..।
मैने लंड वहीँ रोक दिया लेकिन वो दर्द से तड़प रही थी।
कंचन- निकालो प्लीज़ बाद में कर लेना मैं कहीं नहींं जा रही प्लीज़..। मैं- रुक कुछ नहीं होगा बस थोड़ी देर मे दर्द कम हो जाएगा।

तभी रवि का फोन दोबारा आया तो मैं कंचन से बोला की चुप रहना रवि का फोन है वो अपना मुँह हाथ से बंद कर ली और मैं रवि से बात करने लगा। रवि- कहाँ है..।

मैं- (हफ्ते हुए) घर पर ही हूँ अपने घर कुछ काम कर रहा हूँ। रवि- अरे यार ये गाड़ी चल नहीं रही पता नहीं क्या हो गया तू आ सकता है।
मैं- (सोचते हुए) यार अभी तो टाइम लगेगा काम है। रवि- जेसे ही कम ख़तम होता है फोन करियो। मैं- ठीक है..।

और फोन काट दिया इतने मे कंचन का दर्द भी कुछ कम हो गया था वो चुप सी लेटी रही, मेरा लंड अभी भी उसकी गाँड मे था तो मैने उसके मूह को दोनो हाथो से बंद कर कर एक ज़ोरदार धक्का मारा।
वो इस सब से अंजान थी ओर वो तड़प उठी मेरे नीचे से निकलने लगी ओर मुँह को खोलने की भी कोशिश की लेकिन नाकामयाब रही। उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे मैं झटके पे झटके लगा रहा था।

मेरा आधा लंड उसकी गाँड मे था करीब 5 मिनिट बाद उसका दर्द कम हुआ ओर मैंने फिर एक ज़ोरदार झटका मारा इस बार मेरा पूरा लंड अंदर था वो फिर से तडपी और मैं झटके मारता रहा वो बेहोश सी हो गई थी।

लेकिन मैं नहीं रुका करीब 5 मिनट बाद उसे होश आया ओर वो निकालने की कोशिश करने लगी लेकिन मेरा पानी निकलने वाला था तो ( अब आप तो जानते है जब मज़ा आता है तो लडकी का बाप भी आ जाए तो भी उपर से कहाँ हटा जाता है)।

मैंने जब तक मेरे लंड की एक एक बूँद उसकी गाँड मे नहीं चली गई तब तक मैने लंड नहींं निकाला, थोड़ी देर लेटने के बाद मैं उसके उपर से हटा तो उसका ओर उसकी गॅंड दोनो का बुरा हाल था लेकिन मुझे बहुत मज़ा आया।
वो रोती हुई खड़ी होने की कोशिश करने लगी लेकिन उससे नहींं हो पा रहा था तो मैने उसकी मदद की लेकिन दर्द बहुत था जिससे वो चल भी नहीं पा रही थी।

मैंने उससे सॉरी बोलते हुए उसे कपड़े पहनाए। उसने हँसते हुए कोई बात नहीं जान बस दर्द बहुत हो रहा है फिर मैने उसको किस करने लगा तभी रवि का फोन आया ओर मैं उसके पास जाने को लगा तो कंचन बोली..

कंचन- मुझे लगता है मैं अब कुछ दिन ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी तुम्हारे लिए कोई ओर देखनी पड़ेगी। मैं- कोई बात नहीं मुझे बुला लेना कोई ओर मतलब।

कंचन- तुम अब जाओ बाद मे बात करेंगे। मैं रवि को लेने चला गया।

आगे अगली कहानी मे देखिए कंचन ने दूसरी के साथ मेरा सेक्स करवाया ओर मैने और रवि ने केसे पिंकी की चूत चोदी।

दोस्तों एक दिन दोस्त के साथ बाज़ार गया और मौके से मुझे उसने घर भेज दिया और इस मौके को मैं गंवाना चाहता था और मैं कंचन से चुदने को कहा पर वह चूत चुदाने को राजी नहीं हुई तब मैंने उसकी गांड की चुदाई कर ली जिसे इस hindi sex stories के जरिये आपके बीच लाया.. अपने कमेंट्स जरुर भेजें कैसी लगी कहानी..

Written by

akash

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