दिसम्बर 2015 की लोकप्रिय कहानियाँ

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लंड फोड़, बिस्तर तोड़ छमिया 29

आप तो जानते ही हैं, मुझे अब तक समझ में आ गया था की मेरी मम्मी शायद पूरी तरह से अंकल के साथ सेक्स करने का मज़ा लेने लगी हैं.

इधर, मेरे स्कूल के फाइनल एग्जाम ख़तम हो गये थे.

मार्च का लास्ट चल रहा था और श्लोक, अपनी मम्मी के साथ नानी के यहाँ चला गया था.

अंकल यहीं थे और होली के दिन, मम्मी ने अंकल को खाने पर बुलाया था.

सुबह के समय में तो सब होली में बिज़ी थे.

मेरी मम्मी और मैं, नीचे होली खेलने में बिज़ी थे.

फिर होली खेलने के बाद, मेरी मम्मी घर में आ गईं और उन्होंने उस दिन मटन और पुल्लाव बनाया.

हमने दिन में खाना खाया और मेरी मम्मी के खाने की अंकल तारीफ़ करने लगे.

खाना खा के, अंकल वापस चले गये.

सच कहूँ दोस्तो उन्होंने एक बार भी कुछ ऐसा नहीं किया, जिससे मुझे कुछ अजीब लगे या कुछ शक हो.

हर इंसान के अंदर, कहीं ना कहीं एक अभिनेता रहता है.

मेरी मम्मी खाना खाना खाने के बाद, अंकल चले गये उसके बाद सोने चली गईं.

मैं टीवी देख रहा था.

मेरी मम्मी सो के 5 बजे करीब उठीं और हमने साथ में चाय पी, तभी मेरी मम्मी के मोबाइल पर मेसेज आया.

मैंने देखा मेरी मम्मी ने फाटक से मोबाइल उठा के रिप्लाइ दिया.

उधर से, फिर मेसेज आया.

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फिर मम्मी ने रिप्लाइ दिया.

फिर कॉल आ गया.

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मस्त चूत मदमस्त लण्ड 3

मैं सीधा, चमकती धूप के साथ उठी।

मेरे पति, अभी भी नंगे बिस्तर पर सो रहे थे।

उनका लण्ड थोड़ा सा खड़ा हुआ था और उनके चेहरे पे मीठी सी मुस्कुराहट थी।

उनके लण्ड को देख कर, मेरा मन ललचाया के सीधा उनके लण्ड को पकड़ लूँ पर मैंने अपने आप को रोका और बिस्तर से उतर कर, नंगी ही बाथरूम की और चल पड़ी, फ्रेश होने के लिए।

मैं आप को बताना चाहूँगी की मैंने, अपनी पहले की कहानियों में ज़िक्र किया था की मैंने अपने फार्म में एक गुलाबी लंड वाले लड़के से चुदवाया था।

इसके बारे में ना तो मेरे चाचा जानते थे और ना ही, मेरे पति।

ना जाने आज कल, ये एहसास मुझे क्यूँ खाए जा रहा था की इतना प्यार करने वाले और इतना विश्वास करने वाले पति को मैंने, सिर्फ़ कुछ पल की कमज़ोरी या कहे कुछ पल की वासना के पीछे धोखा दिया था।

मुझे पूरा विश्वास था की अगर मैं अपने पति को सीधे सीधे भी उस घटना के बारे में बताउंगी तो भी वो कुछ नाराज़गी के बाद, मुझे माफ़ कर देंगें।

पर मैं इस दौरान, एक दो दिन या दस दिन के लिए भी उनकी नाराज़गी नहीं चाहती थी।

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छोटे भाई की बड़े शहर की बहन 13

अब तक, मंटू अपना ग्लास पूरा पी चुका था और उसने दूसरा ग्लास भी उठा लिया, और बोला… ..

मंटू – मादर चोद, तू भी अपने जीजा की तरह छक्का ही निकला… .. चल कपड़े उतार और अपनी लुल्ली दिखा, कितनी बड़ी है… .. और एक बात बता, कभी किसी का लौड़ा चूसा है, क्या… .. ??

मैंने खड़ा हो के अपना पैंट और अंडरवियर, दोनों एक साथ नीचे की और सरका के खड़ा हो गया, और बोला –

मैं – जी नहीं… .. आज तक किसी का नहीं चूसा है पर देखा है, बहुतों का लौड़ा… ..

मंटू ने हँसते हुए मेरे लण्ड की तरफ देखा और बीच में रोकते हुए.. … .

मंटू – कहाँ पर… .. ??

मैं – जी, स्कूल में… .. वो लोग, खुले में ही पेशाब करते हैं तो मैंने कई बार देखा है… .. बहुत बड़े और मोटे भी देखे हैं… ..

मंटू अपना ग्लास ख़तम करते हुए.. … .

मंटू – हाँ, मादर चोद… .. तेरी, इन चिकनी चिकनी बहनों की चूत का भोसड़ा बना के ही तो हमारे लंड मोटे होते हैं… .. चल, तेरे को भी अपना लौड़ा चूसवा दूंगा… .. अगर, तूने मेरी हर बात मानी तो… ..

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एक परिवार मुंबई की चॉल मे 1

एक 15 बाइ 12 की चॉल मे, सब एक ही छत के नीचे रहते थे.

किचन भी उसी में था और किचन की तरफ, एक खिड़की थी.

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दिन में वो लोग दरवाजा खुला ही रखते और रात में खिड़की खुली रखते थे.

कहते हैं की माहौल का असर, लोगों की प्रकृति पर पड़ता है.

इस परिवार के लोगों के साथ भी ऐसा ही कुछ था.

परिवार वैसे इज़्ज़त दार था पर कामतिपुरा जैसे एरिया में रहते थे.

वैसे उनकी गली मे सब अच्छे लोग ही रहते थे.

बेटा, प्रिया को भगा कर लाया था.

घर वालों के पास, कोई चारा नहीं था.

शादी से पहले, प्रिया कॉलेज में 3-4 बॉय फ्रेंड्स बना चुकी थी, इसीलिए राजू ने उसे भगा कर शादी कर ली.

सोचा – वो, किसी और की ना हो जाए.

मुन्ना और उसकी बीवी सुनीता, जवानी के दिनो मे बहुत रंगीन थे, उन्हीं का खून राजू और रोशनी के अंदर था.

मोहल्ले मे परिवार की इज़्ज़त थी, पर घर में कभी कभी बाप बेटे की, बेटी माँ को, पति पत्नी को, भाई बहन को गाली देते थे.

जैसा की बहुत से परिवार में होता है, सब एक दूसरे से चिढ़ते थे, और एक छोटे घर में रहने के कारण, वो बहुत बार हद पार कर जाते थे.

रात को औरतें, बीच मे सोती और बाप और बेटा दीवार की साइड मे.

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पराया मर्द 22

अम्मी का गोरा चिकना जिस्म, दूध जैसे सफेद मम्मे काली ब्रा में क़ैद थे.

ख़ास बात ये की अम्मी मेरा लंड देख रहीं थीं और उनकी कमीज़ उतारते ही मुझे एहसास हो गया था की मैं फारीक हो जाऊंगा.

और जैसे ही उन्होंने, मेरा बुरी तरह फड़फड़ाता हुआ लंड देखा और अपनी क्लीवेज पर उंगलियाँ फेरी, मैं फरीक हो गया.

उनके कमीज़ उतारने के अगले कुछ सेकेंड में ही, मेरा पानी फुल प्रेशर से निकल कर फर्श पर गिर गया था और मैं लंबी लंबी साँसे ले रहा था.

इतना गाड़ा और इतना सारा मूठ, मुझे नहीं लगता मेरा आज तक निकला था.

मुझे अपनी लाइफ में, इतना मज़ा कभी नहीं आया था.

मज़े की बात तो ये थी की फारीक होने के बाद भी मेरा लंड खड़ा था और मैं बस, अम्मी की क्लीवेज को ही घुरे जा रहा था और लंबी लंबी साँसें लिए जा रहा था.

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Written by

मस्त कामिनी

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