जुलाई 2015 की लोकप्रिय कहानियाँ

5 min read

खून भरी चूत 30

मैंने आपको, पहली स्टोरी में रागिनी के बारे में बताया था…

रागिनी, दो जवान लड़कियों की माँ होने के बाबजूद बहुत ही “सेक्सी लेडी” है.. !!

उसके बूब्स बहुत बड़े बड़े थे और उसकी गाण्ड तो मानो, लण्ड को पुकार रही हो उसमें घुसने के लिए.. !!

इस उम्र में भी, रागिनी का बदन काफ़ी टाइट था.. !! रंग गोरा और ज़्यादा मोटी नहीं थी, वोह.. !!

उसे देख कर, किसी भी बूढ़े का सोया हुआ लण्ड खड़ा होकर वीर्य की पिचकारी मारने लगेगा.. !!

मैंने पहले भी रागिनी की चूत, बूब्स और गाण्ड देखी है.. !! जब, राजेश ने उसे ज़बरदस्ती चोद चोद के फाड़ दिया था.. !!

रागिनी, मेरे पास आकर मेरे साइड में लेट गई और टीवी देखने लगी।

हम दोनों में ढेर सारी बातें होने लगी।

उसने मुझे बताया के कैसे राजेश के पिताजी ने उसे पहली बार फार्महाउस में चोद के, उसकी चूत की सील तोड़ी थी और उसकी गाण्ड फाडी थी.. !!

उसने बताया के उस वक़्त वोह, ऐसी चुदाई से बेहोश हो गई थी क्यूंकि उसकी चूत से बहुत सारा खून निकल गया था.. !! गाण्ड भी, सूज गई थी.. !!

ऐसी सेक्सी बातें करते करते, हम दोनों गरम होने लगे।

मेरा तो लण्ड पैंट के अंदर से ही, हिचकोले खाने लगा.. !!

रागिनी ने मुझसे कहा के राजेश ने मुझे बताया है की तुम बहुत अच्छी तरहा से और देर तक चोदते हो…

मैंने कहा – वोह तो अपने अपने और उस वक़्त के स्टेमना पर निर्भर करता है…

फिर रागिनी और मैं, एक दूसरे के और पास आ गए.. !! .. !!

मैंने जानबूझ कर, उसके हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया।

उसने फट से मेरे हाथ को अपनी जाँघ के ऊपर रख दिया और मेरे पैंट के ऊपर हाथ रख के दबाने लगी।

मैं भी बिना पीछे हटे, उसकी जाँघ को सहलाने लगा।

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…

फोटोग्राफर भैया, बने बहन के सैंया 1

यह बात कुछ साल पहले की है.. !! .. !!

मैं अपने गाँव में अपने परिवार के साथ रहता था.. !! लेकिन, वहां स्कूल के आगे पढाई के लिए कॉलेज नहीं था.. !! इसलिए, पिताजी ने मुझे शहर में पढ़ने के लिए भेज दिया.. !!

शहर में आने के बाद, मुझे यहाँ का असली नज़ारा देखने को मिला।

असल में, अभी तक तो हम यूँ ही केवल घूमने-फिरने आते थे.. !! वह भी, साल दो साल में कोई एक आधी बार.. !! लेकिन, शहर का असली रंग तो मुझे यहाँ आकर ही पता चला.. !!

शहर में रहने के अपने खर्चे भी बहुत हैं.. !! इस कारण, मैं कुछ कमाने के बारे में सोचता रहता था.. !! क्यों की, मैं अपने घर की आर्थिक स्थिति, अच्छी तरह से जानता था.. !! जिस कारण, मैंने सोचा क्यूँ ना मैं भी अपने कुछ दोस्तो की तरह, पार्ट टाइम नौकरी ढूँढ लूँ.. !!

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…

चुदाई का सफर: कुंवारी गाण्ड 1

तारीख – 18 दिसंबर, 2009

ये मेरी जिंदगी का बहुत महत्वपूर्ण दिन था..

कोर्ट में हमारी अर्ज़ी देने के बाद, कोर्ट के आदेश के अनुसार मैं, मेरा प्रेमी शुभम, मेरे और शुभम के माता पिता, मेरे चाचा, कुछ नज़दीकी रिश्तेदार और दोस्त कोर्ट में हाज़िर थे।

आज, मेरी “क़ानूनी शादी” होने वाली थी, अपने प्रेमी शुभम के साथ…

मेरे माता पिता और शुभम के माता पिता ने, गवाही के हस्ताक्षर किए और मैंने और शुभम ने एक दूसरे को शादी की अंगूठी पहनाई, माला पहनाई और अब हम क़ानूनी रूप से, पति पत्नी बन गये.. ..

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

अपने सपनों के राजा, शुभम की पत्नी बन कर, मैं कुछ अलग सा महसूस कर रही थी।

मैंने अपने माता पिता और सास ससुर के पैर छू कर, आशीर्वाद लिया।

उन के सम्मान में, मेरी आँखें झुकी हुई थीं और मैं शरमा रही थी..

मैं हमेशा, एक खुले विचार की लड़की रही हूँ और मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था की मुझे भी, इतनी शरम आएगी।

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…

बीवी के सारे छेदों का लण्ड भेदन 1

मेरा नाम आलोक है और मेरी शादी, 3 साल पहले हुई थी।

मेरी बीवी बहुत सुंदर है, जिसका नाम रुचिका है.. उसकी फिगर – 34 28 36 है..

मेरे सभी दोस्त, मुझे बहुत लकी मानते हैं की मुझे इतनी सुंदर बीवी मिल गई।

लेकिन, मेरी एक समस्या है.. असल में, मेरा लण्ड केवल “4 इंच” का है और बहुत पतला है.. इसलिए, मैं शुरुआत में शादी नहीं करना चाहता था..

मेरी माँ ने बहुत सारे रिश्ते दिखाए.. लेकिन, अपनी कमज़ोरी के कारण मैंने सारे रिश्ते ठुकरा दिए.. पर, जब मैंने रुचिका की फोटो देखी तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाया..

मुझे लगा की मैं बेकार मैं डर रहा हूँ, शादी के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा।

लेकिन, सुहागरात वाले दिन ही, मैं उसे संतुष्ट नहीं कर पाया।

मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन मेरी बीवी बहुत समझदार थी और उसने मुझसे कहा की अब आप ही मेरे पति हैं और मुझे कोई समस्या नहीं.. लेकिन, समस्या यहीं ख़तम नहीं हुई..

शादी के 2.5 साल बीतने पर भी जब बच्चा नहीं हुआ तो मेरी मां ने रुचिका को कोसना शुरू कर दिया.. जिससे, वो बहुत अपसेट रहने लगी..

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…

एक था राजा, एक थी दासी 1

यह कहानी है, हिमालय की वादियों में बसे एक राज्य की.. जिसका नाम था, कामपुर.. ..

यह नाम, इस राज्य को इसलिए मिला था क्यूंकी यहाँ कामदेव और रति की विशेष कृपा थी.. जिसके कारण, कोई भी लड़का या लड़की इस राज्य में कुँवारा नहीं रहता था..

इस राज्य के राजा “लिंगवर्मा” थे… !!

उसकी शरण में, राज्य बड़ा सुखी और शांत था और राजा ने अपने राज्य को और अधिक समृद्धशाली बनाने के लिए, अपने पड़ोसी राज्य योनपुर के राजा की बेटी “वक्षकुमारी” से शादी करने का प्रस्ताव लेकर राजा से मिलने गये।

राजकुमारी बहुत ही सुंदर लड़की थी… !!

उसे जब राजा लिंगवर्मा ने देखा तो वो उसके योवन में खो गये..

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…

Written by

मस्त कामिनी

Leave a Reply