भैया की फटी गाण्ड, बहन बन गई रांड 1

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लेखक – अनजान
सम्पादिका – मस्त कामिनी

हाय दोस्तो, कैसे हैं आप सब..

आज मैं जो कहानी लिखने वाला हूँ, वो मेरी बहन की है.. कैसे, मेरी बहन “कोठे की रंडी” बनी..

तो सबसे पहले, मैं आपको मेरी बहन के बारे में बता दूं।

उसका नाम जैस्मिन है और वो 22 साल की है.. उसका फिगर, 36-28-38 है.. रंग गोरा है और चेहरा आकर्षक..

आपको, पता चल ही गया होगा की मेरी बहन कैसे होगी।

आजकल की लड़कियों की तरह, वो भी अपनी गाण्ड को बहुत मटका मटका कर चलती है…

वो हमेशा, जीन्स और स्कर्ट ही पहनती है..

तो, अब मैं कहानी पर आता हूँ… …

ये बात, पिछले साल की है।

दोस्तो, मैं गोआ का रहने वाला हूँ और उन दिनों दोस्ती-यारी में मुझे गैंबलिंग का शौक, लग गया था।

मेरे ग्रूप में, हम 6 दोस्त हैं – 2 लड़कियाँ और 4 लड़के..

उन्ही में से, मेरी एक गर्लफ्रेंड भी थी।

जैसा की मैंने बताया, हम लोग को गैंबलिंग का शौक था.. पर, हाँ हम आपस में ही गैंबलिंग खेलते थे..

एक दिन हम यूँही, गैंबलिंग खेल रहे थे और मैं जीत रहा था।

तभी, एक आदमी वहाँ आया और कहा की मेरे साथ खेलोगे… ??

हमने कहा – हम सिर्फ़, आपस में खेलते हैं…

तो उसने कहा – चलो भी यार, सिर्फ़ एक गेम खेल लेते हैं…

सारे दोस्त भी कहने लगे की खेल ले यार, आज तेरा लक चल रहा है।

सब के कहने पर मैंने भी कहा – चलो, ठीक है… और फिर हम गेम खेलने लगे।

मैं गेम जीत गया और जब हम जाने लगे, तब उस आदमी ने कहा – रूको, बस एक और गेम खेलते हैं…

मैंने कहा – नहीं… मैंने कहा था, बस एक ही गेम…

उसने कहा – एक लाख की बेट… जीत गया, तो सारे पैसे तेरे…

मैंने कहा – एक लाख… इतने पैसे, मेरे पास नहीं है…

तो उसने कहा – पैसे, बाद में दे देना…

सब दोस्त भी लालच में आ गये और कहने लगे – खेल ले, यार…

पहला गेम, मैं जीत भी गया था इसलिए मैंने भी कहा – चलो, ठीक है…

पत्ते बाँटे गये।

मेरे पास दो बादशाह आए और एक सती आई।

मुझे लगा, मैं जीत गया और पैसे उठाने लगा तो उस आदमी ने मुझे रोका और अपने पत्ते दिखाए।

उसके पास, दो इकके और एक दसी थी और वो जीत गया था।

अब वो, मेरे से बाकी के पैसे माँगने लग गया..

मैंने कहा – मैंने तुम्हें बताया था, अभी नहीं हैं… कुछ दिन में, दे दूँगा…

तब तो वो मान गया पर कुछ 3 दिन बाद, वो मेरे घर आया और मुझसे पैसे माँगने लग गया।

मैंने कहा – मुझे पाँच दिन का समय दो… मैं पाँच दिन में, दे दूँगा…

उसने मुझे पाँच थप्पड़ मारे और कहा – चल, तेरे घर पर बताता हूँ…

मैंने कहा – प्लीज़, कुछ दिन और दे दो… मैं आपको, सब पैसे दे दूँगा… पर वो मुझे फिर से, मारने लग गया।

परेशान होकर, मैंने कहा – भाई, आप जो बोलेंगें मैं करूँगा…

अब, वो रुक गया।

उसने थोड़ा सोचा और मुझे कहा – जो कहूँगा, वो करेगा… ??

मैंने कहा – हाँ, करूँगा…

फिर उसने, मुझसे पूछा – तो ये बता… तेरे साथ कल जो लड़की थी, वो कौन है…

मैंने कहा – मेरी दोस्त है…

उसने कहा – ठीक है, तो फिर… कल रात के लिए, उसको मेरे पास भेज दे…

मैंने कहा – क्या… ?? पगला गये हो, क्या… ?? वो, ऐसी लड़की नहीं है… मैं ऐसा नहीं कर सकता…

उसको फिर से गुस्सा आ गया और उसने मुझे पीटते हुए, कहा – सुन बे, उसको तो तुझे भेजना ही पड़ेगा… वरना, तुझे ऐसा बर्बाद कर दूँगा की याद रखेगा… समझा की नहीं…

मैंने कहा – ठीक है, मैं कोशिश करता हूँ…

तो वो बोला – कोशिश नहीं…

मैंने कहा – अगर, मैं उसको ले भी आया तो आप कैसे मानएँगें उसको… वो नहीं मानेगी…

अब उसने मुझे एक दवाई की पूडिया दी और कहा – ये ले… इसे, उसके पानी में मिला देना… बाकी का काम, मैं करूँगा… फिर, उसके साथ क्या होगा उसको पता भी नहीं चलेगा…

मरता क्या ना करता..

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

मैंने, अब अपनी गर्ल फ्रेंड को फोन लगाया पर उसने मेरा फोन नहीं उठाया।

मैं जानता था की वो मेरा फोन नहीं उठाएगी.. क्यूंकी, मैंने उस रात उसको बहुत भला बुरा कहा था..

फिर, दोबारा मैंने फोन लगाया उसने मेरा फोन उठाया और कहा – क्या है… ?? क्यूँ फोन किया… ??

मैंने कहा – मुझे माफ़ कर दो… मुझे तुमसे मिलना है…

मेरे बहुत समझाने पर और सॉरी कहने पर वो आख़िरकार मान गई, मिलने को।

मैंने फिर उस भाई को फोन किया की कल शाम को 4 बजे, वो मुझसे मिलने आ रही है..

अगले दिन, मैं उसका एक केफे में वेट करने लग गया पर वो नहीं आई.. तभी, उस भाई का फोन आया..

उसने कहा – क्या हुआ… ?? कहाँ है, वो… ??

उसने मुझे, फिर से धमकी दी – अगर, वो नहीं आई तो साले देख लेना… पूरा गोआ, तेरी मौत की मिसाल देगा…

मैंने डर कर, अपनी गर्ल फ्रेंड को फोन लगाया पर उसने उठाया नहीं।

मैं कॉल करता रहा, करता रहा… पर उसने नहीं उठाना था, सो उसने नहीं उठाया…

थोड़ी देर बाद, उसका फोन स्विच ऑफ आने लगा..

अब, मेरी गाण्ड फट गई थी..

भाई का, फिर से फोन आया… …

जल्द ही प्रकाशित होगा, कहानी का दूसरा भाग..

Written by

मस्त कामिनी

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