शहर की शानी गाँव का गांडू 1

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Sex Stories Hindi Me Aaj Ek Nayi Jankaari – Kya Aap Jaante Hain Chudai Ke Dauran Aapke Dard Sehne Ki Shamta 10 Guna Tak Bad Jaati Hai…

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव मे हमारा घर है..

करीबन 10 साल पहले की बात है..

जब मैं सिर्फ़ 14 साल का था..

मेरी दीदी रचना जो तब 19 साल की थी, दिल्ली के मामा के घर मे रह कर अपनी पढ़ाई कर रही थी..

पढ़ाई मे तेज़ थी तो पापा ने उसे मामा के घर भेजा था, पढ़ाई के लिए 5 साल पहले..

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

मुझे भी 10 वी की परीक्षा के बाद दिल्ली भेजने को सोचा था सबने..

दीदी की गर्मी की छुट्टी थी, तो वो गाँव आई थी हमारे पास..

इतने दिन बाद आई थी तो सभी का लाल दुलार उसी को मिल रहा था..

मुझे उस पर जलन और गुस्सा आता.. पर करता भी क्या..

वो अक्सर सारा दिन घर बैठे टीवी देखती और मम्मी का हेल्प करती थी..

वो ज़्यादा किसी को जानती नहीं थी तो गाँव मे तो कोई दोस्त नहीं था उसका..

मेरी स्कूल की छुट्टी अब तक डिक्लेर नहीं हई थी..

मैं तब क्लास 7 मे पढ़ता था.. मैं रोज शाम को अपने दोस्तो के साथ खेलने निकल जाता..

मेरे दोस्तो मे सभी या तो मेरे उम्र के थे या फिर छोटे थे..

पर मेरा एक जिगरी यार हआ करता था तब, नाम मलखान .. .. हाँ गाँव मे ऐसे ही नाम होते है..

वो पढ़ता तो हमारे ही क्लास मे था पर कई बार फैल हो चुका था..

उसकी असली उम्र करीबन 17 साल होगी.. पतला, काला सा, सर पे छोटे बाल, छोटी छोटी आँखे, लंबाई आम ही थी पर मुझसे लंबा था..

उसके पापा का एक दुकान था, हम अक्सर स्कूल ना जा के उसके दुकान जा के खाते और खेलते थे..

हम बहत हरामी दोस्त थे, दूसरे लड़को का मज़ाक बनाना, मारना, पिटाई करना, ये हमारा रोज का काम था..

एक दिन शाम को वो मेरे घर मुझे बुलाने आया तो देखा, दीदी आँगन मे सब्जी काट रही है..

मुझे आवाज़ देने पर मैं आया, तो देखा, साला पीछे से मेरी दीदी की गांद देखे जा रहा है..

दीदी की उम्र 19 साल, रंग दूध सा गोरा, जबकि मैं थोड़ा सावला था..

शायद गाँव की होने के कारण फिगर कातिलाना था.. अब तो वो और भी खूबसूरत हो गई है..

पर तब 34-26-36 की होगी, गुलाबी होंठ, लंबे बाल थे..

उनकी छाती बहत बड़ी थी, उस उम्र मे भी..

खेलने गया तो उसने मुझसे दीदी के बारे में पूछा.. जब मैंने बताया तो बोलने लगा – यार बुरा मत मानना, तेरी दीदी तो मंगला से भी ज़्यादा अच्छी है..

{मंगला, हमारे क्लास की सबसे सेक्सी लड़की थी..}

मैं – अच्छी मतलब !! बोल सेक्सी.. . ई ईए.. . हा हा हा.. .

मलखान – साले तू तो बहत कमीना है रे, अपनी दीदी को सेक्सी बोल के खुद ही हंस रहा है..

मैं – तो क्या करूँ .?. पढ़ाई मे अच्छी है, दिखने मे अच्छी है, मम्मी की मदद करती है, इसलिए सब उसी को प्यार करते है.. पापा हमेशा उसी के लिए कपड़े लाते है.. लड़का हो के भी कोई कीमत नहीं मेरी..

मलखान – हा हा.. . चल अब जब तू अपनी भाड़ास निकाल ही चुका है, तो मैं भी अंदर की बात बता ही दूं, यार तेरी दीदी के वो.. . {अपनी छातियों के सामने हाथ रख के} .. .. ये बहत मस्त है यार.. जी कर रहा था के थोड़ा छू कर देखु.. हे हे हे…

हम दोनों ने फिर दीदी को लेकर बहत मज़ाक किया..

वो बात बात पे मुझे इशारे से दीदी के बारे में बोल के मस्ती मारने लगा..

मुझे भी मज़ा आया..

उस दिन फिर खेल के जब मैं वापिस आया तो दीदी मुझसे पूछने लगी के हम लोग, क्या क्या खेलते है..

दोस्तो के नाम क्या थे मेरे, मैंने बताया..

दीदी बोली.. .

दीदी – अरे पकडम पकड़ाई, लूका छूपी खेलने मे तो मुझे भी बहत मज़ा आता है.. तुम लोग कहा खेलते हो यहा गाँव मे, यहा तो छूपना मुश्किल है, शहर जैसा तो है नहीं यहा..

मैं – अरे यहा जो छूपने की जगह है वो शहर मे भी नहीं.. हम मंदिर के पीछे खेलते है.. वहां पास मे कितने पेड़ के घनी झाड़ियाँ है, जो सर के ऊपर तक जाते है.. पास मे बड़े मोटे पेड़ है और अब तो फसल कटाई के वजह से वहां धन के पौधो के बड़े बड़े गोल और उँचे पहाड़ भी बने है.. जिनके पीछे हम छूप जाते है.. और शाम के अंधेरे मे ढूँढना बहत मुश्किल होता है..

दीदी मेरी बातों को सुन कर खुश हो गई, तो मैंने कहा – दीदी तुम भी चाहो तो खेलने आ सकती हो.. हम बच्चों के अलावा वहां कोई नहीं जाता, सुनसान और अच्छी जगह है.. और वैसे भी तुम शाम को अकेली बोर होती हो..

दीदी – ह्म्म्मन.. . नहीं रे मैं कैसे तुम बच्चों के साथ खेलूँगी .?.

मैं – अरे कुछ नहीं होगा, वो जो मलखान नाम के लड़के के बारे मे मैंने बताया था ना, वो असल मे बड़ा लड़का है.. पर फैल होते होते मेरे ही क्लास मे पढ़ता है, मेरा सबसे अच्छा दोस्त है..

दीदी – अच्छा… कोई लड़की खेलती है तुम लोगो के साथ .?.

मैं इस सवाल से थोड़ा हिचकिचाया.. आज दीदी के साथ खुल के बात करके मुझे अच्छा लग रहा था..

वो दिल की अच्छी लगी मुझे तो मैं चाहता था के वो भी खेलने को आए पर अगर मैंने ना कहा तो शायद वो आने से मना कर देगी तो मैंने तोतलाते हए कहा… ..

मैं – म्ह.. .. हाँ है ना, एक लड़की भी खेलती है, हमारे साथ भूरी..

दीदी – वो कौन है .?. तूने पहले नहीं बताया .?.

मैं – अरे वो .. . वो .. . मलखान की बहन है..

फिर दीदी के मुंह मे मुस्कान आ गई..

एक शरारत सी दिखी, उसकी आँखो मे..

तो मैं आगे बोला.. .

मैं – तो दीदी कल आप भी चलिएगा बहत मज़ा आएगा..

दीदी – ठीक है, देखूँगी.. .

मैंने अगले दिन स्कूल मे मलखान को बताया, दीदी से की गई बात के बारे मे..

तो वो हँसने लगा, कहने लगा.. .

मलखान – अबे तूने मेरी बहन बता के अपनी दीदी को खेलने बुलाया है.. .. !! पर कल जब पूछेगी तो मैं क्या बोलूँगा .?. .?.

मैं – बोल देना के नहीं आ पाई.. . और क्या .?. फिर क्या दीदी वापिस तो नहीं जाएगी, आएगी तो खेलना पड़ेगा.. हा हा.. .

मलखान – ओये, तू तो चालू निकला, अपनी सेक्सी दीदी को खेल खेल मे हाथ लगाएगा.. . हाँ .. . हा हा हा.. . कमीने.. हमे भी थोड़ा मौका देना, अकेले दोनों चूचियों को मत दबा लेना.. . हा हा .. .

इस बात पर मुझे पता नहीं क्यों बुरा लगा पर मैंने उसे कुछ नहीं कहा क्योंकी उसे ये बोलने का हक़ तो मैंने ही अंजाने मे दिया था..

तो मैंने भी बात को हँसी मे उड़ा के ख़त्म कर दिया.. सोचा ये सच में ख़त्म हो जाएगा, पर आगे जो होना था, उससे मैं बिल्कुल अंजान था..

अगले दिन दीदी सच मे आने को राज़ी हो गई..

मम्मी ने कहा – बेटा दीदी और तू शाम होने से पहले आ जाना.. ठीक है..

हम हाँ कह के मंदिर के पीछे आ गए..

मेरे बाकी दोस्त दीदी को पहली बार देख कर हैरान थे..

तब दीदी ने भूरी कहा है पूछा तो मलखान ने चालाकी से बोला – दीदी वो उसकी तबीयत ठीक नहीं है, बुखार है सुबह से.. .

फिर हमने लूका छूपी, यानी चोर पुलिस से खेलना शुरू किया..

कुछ देर खेलने के बाद मैंने देखा, दीदी एंजाय कर रही है, पर दूसरी तरफ मलखान ने अपना चुतियापा लगा रखा था..

जब भी वो दीदी को देखे तो, पीछे से जाकर उसकी चूतड़ पे हाथ लगा के ‘आउट आउट’चिल्लाता,

जब दीदी उसको देख लेती, जान बुझ कर खुद को पकड़ा के दीदी के चूचियों को अचानक से छू लेता..

ये सब देख के मैं थक चुका था.. पर दीदी को कुछ फ़र्क नहीं पड़ रहा था..

और असल में मलखन तो खेल ही नहीं रहा था, या तो दीदी को छूने का बहाना ढूँढता या फिर दीदी को इंप्रेस करने को बार बार खुद को पकड़वा कर पुलिस बन जाता..

फिर सबने टाई किया के अब पकडम पकड़ाय खेलेंगे..

अब मुझे तो डर लगा के पता नहीं ये मलखान अब क्या करेगा..

मैंने कहा – मम्मी ने बुलाया है.. कहके दीदी को घर ले आया..

शाम को जब हम खाने बैठे तो मम्मी ने दीदी की प्संदीदा खीर बनाई थी और उसे प्यार से खिला रही थी..

मुझे फिर जलन के बदल ने घेर लिया, दीदी के ऊपर मुझे फिर गुस्सा आने लगा था..

रात को सोते वक़्त, मैं बस आज के खेल के बारे मे सोच रहा था के मेरा लॉडा खड़ा हो गया..

फिर मैंने सोचा मां की चूत तेरी ये मैं अपनी दीदी और मलखान के बारे मे क्या सोच रहा हूँ !!!

फिर ना जाने मैं कब सो गया..

कहानी जारी रहेगी…

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Written by

मस्त कामिनी

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