शहर की शानी गाँव का गांडू 2

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Sex Stories Hindi Me Aaj Janiye – Male Sperm Ke Ansh Ladki Ki Chut Ke Bahari Hisse Me Zindgi Bhar Jinda Rehte Hai Jabki Chut Ke Bahar Sperm 6 Ghante Me Mar Jaate Hain…

असल में मलखन तो खेल ही नहीं रहा था, या तो दीदी को छूने का बहाना ढूँढता या फिर दीदी को इंप्रेस करने को बार बार खुद को पकड़वा कर पुलिस बन जाता..

फिर सबने टाई किया के अब पकडम पकड़ाय खेलेंगे..

अब मुझे तो डर लगा के पता नहीं ये मलखान अब क्या करेगा..

मैंने कहा – मम्मी ने बुलाया है.. कहके दीदी को घर ले आया..

शाम को जब हम खाने बैठे तो मम्मी ने दीदी की प्संदीदा खीर बनाई थी और उसे प्यार से खिला रही थी..

मुझे फिर जलन के बदल ने घेर लिया, दीदी के ऊपर मुझे फिर गुस्सा आने लगा था..

रात को सोते वक़्त, मैं बस आज के खेल के बारे मे सोच रहा था के मेरा लॉडा खड़ा हो गया..

फिर मैंने सोचा मां की चूत तेरी ये मैं अपनी दीदी और मलखान के बारे मे क्या सोच रहा हूँ !!!

फिर ना जाने मैं कब सो गया..

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अगले दिन स्कूल मे मलखान ने मुझे पकड़ लिया.. .

मलखान – क्यों बे कल तूने ऐसा क्यों किया, तेरी दीदी को मैं छू रहा था तो तू उसे ले गया.. ..

मैं – अरे नहीं यार, मम्मी ने सच मे बुलाया था.. वरना तू दीदी को छू या दबा मुझे क्या.. . हे हे.. . मुझे तो मज़ा ही आ रहा था..

मलखान मेरी बात सुन के शांत हो गया.. .

मलखान – श.. . माफ़ करना, पर सुन आज हम जाते ही पकडम पकड़ाई खेलेंगे, ठीक है..

मैं – क्यों .?. .?.

मलखान – बे भोसड़ी के, तभी ना पकड़ पाउँगा मैं तेरी सेक्सी दीदी को.. . हा हा .. .

मैं ना चाहते हए भी हाँ मे हाँ मिलाया, सोचा थोड़ा छू ही तो रहा है और फिर हर रोज की तरह मज़ाक की बाते करने लगा..

फिर जब मैं स्कूल से लौटा, तो बस यही सोच रहा था के किसी तरह दीदी को आज ना जाने दिया जाए, या वो खुद जाने से मना कर दे.. पर जब शाम हई तो दीदी खुद ही सलवार कमीज़ पह्न कर तैयार हो गई खेलने को..

मुझे अजीब लगा, के क्या दीदी शहर मे पढ़ने के बाबजूद इतनी भोली है, के कोई भी उसके बदन पे हाथ फेर रहा है, और वो नहीं समझ पा रही.. .

पर खेलने तो जाना ही था, तो जाते ही पकडम पकड़ाय खेल शुरू हई, जहा हम मे से एक राक्षस बन के सबको दौड़ के पकड़ता है, और जिसको पकड़े वो राक्षस बन जाता है.. .

गिनती मे बबलू नाम का एक लड़का पहले राक्षस बना, पर उसने आसानी से ही मलखान को पकड़ लिया.. जो मुझे पहले से ही शक था वही हआ.. .

वो राक्षस बनते ही लगा दीदी के पीछे दौड़ने, कोई राक्षस के पास नहीं जाना चाहता तो सब उल्टी तरफ भागे.. .

दीदी अपनी चुनरी को कमर मे बँधे पूरे ज़ोर से भाग रही थी धान के पहाड़ की और.. ..

मैंने देखा, पहले तो मलखान धीरे दौड़ा, पर जैसे ही दीदी उस विशाल धान के पहाड़ के पीछे छूपी, तो वो ज़ोर से दौड़ के गया और दीदी के ऊपर उच्छला.. .

मैं उसके पीछे ही था, दीदी को नज़र मे रखते हए.. .

दीदी हाफ़ते हए दूसरी और देख रही थी के वो आ तो नहीं रहा के तभी मलखान ने दीदी को पीछे से पकड़ लिया और चिपक गया..

दीदी चिल्ला कर नीचे गिर पड़ा उस धान के ढेर पर, जो नरम थे.. .

मलखान कोई आवाज़ किए बिना ही दीदी के पीछे और बगल से लिए हाथो को उसकी चूचियों पे दे कसा..

वो दीदी के ऊपर था, और दीदी पेट के बल पड़ी छूटने की कोशिश कर रही थी..

बहुत ज़ोर लगाई तो दोनों पलट गये, और दीदी ऊपर आ गई.. .

मैंने देखा वो दीदी की चूचियों को आंटे की तरह जल्दी जल्दी गोंद रहा है..

दीदी छत पटाते हए – ऊ ओह… अरे ये क्या कर रहे हो मलखान .. .

मलखान नीचे से बोला – वही जो राक्षस अपने शिकार के साथ करता है.. . खा जाता है.. . आ अम्म … .

साले ने ये कहकर पीछे से दीदी की गर्दन मे मुंह घुसा दिया और चूमने लगा..

मैं क्या करता कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब मैंने देखा के दीदी घबराई नहीं थी बल्कि वो मलखान की इस गुदगुदी से हंसते हए छुड़ाने ने की कोशिश कर रही थी.. .

दीदी की गर्दन के पसीने को वो पागलो की तरह चाट रहा था और दूसरी तरफ उनकी चूचियों को कमीज़ के ऊपर से मसले जा रहा था..

तभी दीदी किसी तरह उसकी चंगुल से चूत के वापिस खेल के मैदान की और भागने लगी..

मैं छूप गया एक मोटे पेड़ के पीछे पर जब मैं अपनी पैंट की और देखा तो पता चला के मेरा तो निकल गया था, ये सब देख के..

कहानी जारी रहेगी…

Sex Stories Hindi Me Ye Series Aapko Kaisi Lagi…

Written by

मस्त कामिनी

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