शहर की शानी गाँव का गांडू 3

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Sex Stories Hindi Me Aaj Janiye – AIDS Ka Virus Sabse Pehle Africa Me Ubhara Aur 10 Saal Me Puri Duniya Me Fail Gaya…

मैंने देखा वो दीदी की चूचियों को आंटे की तरह जल्दी जल्दी गोंद रहा है..

दीदी छत पटाते हए – ऊ ओह… अरे ये क्या कर रहे हो मलखान .. .

मलखान नीचे से बोला – वही जो राक्षस अपने शिकार के साथ करता है.. . खा जाता है.. . आ अम्म … .

साले ने ये कहकर पीछे से दीदी की गर्दन मे मुंह घुसा दिया और चूमने लगा..

मैं क्या करता कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब मैंने देखा के दीदी घबराई नहीं थी बल्कि वो मलखान की इस गुदगुदी से हंसते हए छुड़ाने ने की कोशिश कर रही थी.. .

दीदी की गर्दन के पसीने को वो पागलो की तरह चाट रहा था और दूसरी तरफ उनकी चूचियों को कमीज़ के ऊपर से मसले जा रहा था..

तभी दीदी किसी तरह उसकी चंगुल से चूत के वापिस खेल के मैदान की और भागने लगी..

मैं छूप गया एक मोटे पेड़ के पीछे पर जब मैं अपनी पैंट की और देखा तो पता चला के मेरा तो निकल गया था, ये सब देख के..

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मैंने उसे छूपाने के लिए धूल लगा लिए अपने पैंट पे..

फिर खेल जारी रहा.. .

दोनों एकदम से नॉर्मल से खेल मे मंजे हए थे.. मुझे हैरानी थी, के दीदी ये क्या कर रही है, मलखान तो है ही रंडी बाज़, पर दीदी तो पढ़ी लिखी, मां बाप की पर्फेक्ट बेटी है.. . ये सब सोचे जा रहा था मैं.. ..

काफ़ी देर हो गई दोनों बाकी सब के साथ मिल के खेले, शाम का अंधेरा छाने लगा था, मुझे लगा अब ये ऐसा नहीं करेंगे के तभी दीदी राक्षस बनी किसी बछड़े को पकड़ने और सबको पकड़ने को भागी, और तभी मलखान दीदी के पास आ के उसे चिढ़ने लगा, तो दीदी उसके पीछे भागी, वो भी यही चाहता था..

वो भाग कर फिर उसी धान के पहाड़ के पीछे छूप गया..

जैसे ही दीदी गई, तो उसने दीदी को पकड़ लिया और उस पहाड़ पे सटा के उसकी गर्दन को चूमने लगा और ऊपर आ कर उसकी मुंह मे चूमने लगा.. .

दीदी बिना आवाज़ किए, चुप चाप उसका साथ देने लगी थी..

मैं समझ गया, दीदी कोई भोली भली लड़की नहीं, ये तो एक नंबर की चुड़क्कड़ लड़की है..

मलखान के हाथ कभी उसकी छातियों पर घूम रहे थे तो कभी कमर, फिर चूतड़ पर,

मुझे मज़ा आ रहा था दीदी को मलखान की बाहों मे देख कर, पर डर था के कोई आ ना जाए..

वरना पूरे गाँव मे बदनामी होगी, और पापा से पिटाई होगी सो अलग.. तो मैं जितना हो सके चारो तरफ नज़र रखे था..

पर उन दोनों को तो मानो होश ही ना था..

दीदी – आ अह ह हा.. . सस्स ह हह… एम्म्म ह ह.. . आ न्ं .. . उ उ उ फफ फ्फ़… . आ.. .. आ .. .. अ या .. .

मलखान ने कुछ देर बाद दीदी को उल्टा दिया और अपने उल्टे हाथ को उसके उल्टे कंधे से लेकर साइड से उसकी कमीज़ के ऊपर से अंदर डाल दिया..

ऐसा करते ही दीदी की नंगी चुचि उसकी हाथ मे आ गई..

फिर तो वो उन्हे आहिस्ते आहिस्ते दबाते हए अपनी हाफ पैंट को नीचे खिसकाया, अब सिर्फ़ एक टी शर्ट मे था वो..

साले गावर ने चड्डी भी नहीं पहनी थी..

मानो पहले से तैयारी कर के आया हो..

उसका लंड बाहर आया तो मैं चौंक पड़ा.. . 7 या 8 इंच लंबा होगा, 3” की मोटाई वाला काला लंड, सूपड़ा उस अंधेरे मे भी लाल बत्ती की तरह मेरी आँखो मे चमक उठा..

मैंने ये किया झाड़ी के आड़ मे छुप के अपना निकाल के देखा तो शर्म आई मुझे 5” से भी कम था मेरा..

फिर मैं उस पे मूठ लगा कर तमाशा देखने लगा.. .

जब तक मैं अपने लण्ड को नापा, वो कुत्ता मेरी दीदी के पाजामे के नाडे को खोले नीचे कर चूका था और दीदी की पैंटी के ऊपर ही पीछे से अपने लंड को आँख बंद कर के घिस्स रहा था और ऊपर से हाथ अब भी दीदी के कमीज़ और ब्रा के अंदर था..

दीदी – म्म्म ह… ह हा… आऐ ईय इ… म्मह हफ फफ फ्फ़ .. . .. .

फिर उसने जल्द ही दीदी को पलटा और नीचे बैठ कर, उसकी टांगों को झटके से खीचा तो दीदी उस गद्दे जैसे ढेर पर धम्म से बैठ गई और फिर मलखान ने उसकी पाजामे को खीच के निकल दिया..

मैंने देखा दीदी पसीने से लतपथ है, और हाफ़ रही है..

इतने मे मलखान ने दीदी की जाँघो के दोनों तरफ से हाथ में लिया और दीदी की पैंटी को सरकाते हए निकाल दिया..

दीदी ने पूरा सहयोग करते हए अपने पैर उठा दिए, और पैंटी के साथ ही दीदी की लो हील की चप्पल भी निकल गई..

दीदी ने अपने पैरों को लगा के रखे थे, पर मलखान के एक झटके से उसके पैर दो फाँक हो गये और वो पीछे की और लेट गई..

मुझे हैरानी थी के कितनी जल्दी मलखान ने दीदी को इस हालत मे ला दिया था..

कुछ 10 मिनट ही हए होंगे, की दीदी और वो कमर से नीचे नंगे पड़े थे..

दूसरी तरफ मैं देख रहा था के बाकी खिलाड़ी आ क्यों नहीं रहे उन्हे ढूँढने .?.

शायद वो अब भी डर के छूपे थे राक्षस से, पर यहा तो मलखान सच का राक्षस बन चुका था मेरी जवान दीदी को पा कर..

फिर जैसे ही मलखान ने दीदी के फैले पैरों के बीच उसकी चूत देखी तो उसके बदन मे काँटे गड़ गये..

सफेद चूत पे डिज़ाइन से कटे हए झाट..

चूत के दोनों छोर एक दूसरे को गले लगाए हए, चूत असल मे इतनी सुंदर होती है ये मलखान को मालूम नहीं थी, उसने कई लड़कियो के दूध दबाए थे पर यू कोई लड़की उसे अपनी चूत इतनी आसानी से दे देगी, ये सोचा भी ना था..

वो कुछ सेकेंड्स सिर्फ़ देखता रहा उसे.. दीदी की आँखें मलखान को चोर नज़रो से देख रही थी..

मलखान दीदी की आँखो मे देख कर… ..

मलखान – दीदी मैंने सुना है, चूत की महक अच्छी होती है.. .

दीदी – चुप.. . पागल.. ये चूत अभी पसीने से बाँस मारेगी, मत सूंघ इसे..

दीदी की इन बातों ने मेरे कान खड़े कर दिए के दीदी कितनी नीच और गिरी हुई है, पर घर मे तो कितनी सीधी और शरीफ बनती है..

मलखान – हाई ई इ… तुम्हारे पसीने की खुसबु तो कमाल की है, देखते है चूत के पसीने मे क्या जादू है.. . आ आ अह ह…

ऐसा कह के उसका चेहरा दीदी के पैरों के बीच कही छूप गया और दीदी ने अपने बाई हाथ को अपने मुंह पे रखा..

और फिर .. .

मलखान – हाइ ईई ई… क्या महक है .. . तुम तो लाजवाब हो.. . दीदी .. .

दीदी – ए म्म्म म्ह… आ अह ह.. . ऊ ऊ.. . म्मा आ… .. सस्श ह… बू.. . मल खान नं.. . ऊह हूँ.. . ए ये ए.. .

मलखान दीदी की जाँघो को दोनों हाथो से पकड़ उसकी चूत को खाए जा रहा था..

उसकी चूत को चाटे जा रहा था, मलखान का थूक किसी कुत्ते से भी ज़्यादा बह रह था..

वो दीदी के पैरों के बीच लगातार चाटता जा रहा था, उसकी थूक दीदी की गाण्ड से बहने लगी थी..

दीदी की आँखें बंद थी, उसके हाथ अपने ही घुँगरले बालो को नोच रहे थे और सारा बदन मलेरिया की तरह कांप रहा था, दाँत कीट कीट कर बजने लगे थे, उसकी सिसकारियाँ तेज़ हो गई.. .

फिर दीदी के हाथ और पैर दोनों मलखान के सर को पैरों के बीच खीचने लगे और दीदी का कमर ज़मीन से ऊपर हो के धनुष जैसी हो गई और.. .

दीदी – ऊ ऊऊ ह ह… ऊ.. . सस्श ह… मैं… गाआ यय ईी .. . रे.. .ईई ई ई ई.. . म्म्म्म ह…

अचानक दीदी झड़ गई और उसका बदन ढीला पड गया..

उसके माथे पर से पसीने की बूंदे झरने की तरह बहने लगी..

उसके दोनों हाथ और पैर दो तरफ खुल गये.. .

कहानी जारी रहेगी…

Sex Stories Hindi Me Jald Hi Prakashit Hoga – Shehar Ki Shanni Gaanv Ka Gandu Ka Next Part…

Written by

मस्त कामिनी

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