शहर की शानी गाँव का गांडू 4

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Sex Stories Hindi Me Aaj Fact – Lagbhag 100 Me Se 75 Purush Ka Veerya Patan 3 Minute Se Kam Samay Me Ho Jaata Hai…

वो दीदी के पैरों के बीच लगातार चाटता जा रहा था, उसकी थूक दीदी की गाण्ड से बहने लगी थी..

दीदी की आँखें बंद थी, उसके हाथ अपने ही घुँगरले बालो को नोच रहे थे और सारा बदन मलेरिया की तरह कांप रहा था, दाँत कीट कीट कर बजने लगे थे, उसकी सिसकारियाँ तेज़ हो गई.. .

फिर दीदी के हाथ और पैर दोनों मलखान के सर को पैरों के बीच खीचने लगे और दीदी का कमर ज़मीन से ऊपर हो के धनुष जैसी हो गई और.. .

दीदी – ऊ ऊऊ ह ह… ऊ.. . सस्श ह… मैं… गाआ यय ईी .. . रे.. .ईई ई ई ई.. . म्म्म्म ह…

अचानक दीदी झड़ गई और उसका बदन ढीला पड गया..

उसके माथे पर से पसीने की बूंदे झरने की तरह बहने लगी..

उसके दोनों हाथ और पैर दो तरफ खुल गये.. .

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पर मलखान चूत चाटता रहा, मानो उससे कोई मीठा रस बह रहा हो..

तभी मुझे खेल के मैदान की और से बबलू के आवाज़ आने की सुनाई दी, वो इसी तरफ आ रहा था, बोल रहा था – अरे मलखान, कहा हो तुम लोग .?.

मेरी धड़कने तेज हो गई, पर ये दोनों तो मानो बहरे ही हो गये है, देखा तो दीदी वैसे ही पड़ी है, और कुत्ता मलखान अपने लण्ड को लेकर दीदी की गीली चूत की और बढ़ रहा है..

मेरी तो गाण्ड ही फट गई.. .

अगर ये डालने मे कामयाब हो गया, फिर रोकना नामुमकिन हो जाएगा.. .

मैं छूपे हए चिल्लाया – अरे मलखान और दीदी कहा हो तुम लोग, हम लोग तुम सब को कब से ढूँढ रहे है .?. .?. .?.

मेरे ज़ोर के आवाज़ ने दीदी के कान खड़े कर दिए..

उसने मलखान को धक्का दे दिया और उठ खड़ी हई..

ये देख कर मलखान बौखला गया, रुक जाओ, बस दो मिनिट.. .

दीदी – नहीं मेरा भाई आ चुका है.. . फिर कल मिलेंगे..

मलखान ने ज़िद पकड़ ली, तो दीदी ने उसे कहा के वो कल ज़रूर आएगी और दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए और फिर मैं सामने आ गया तो वहां बबलू भी आ पहुँचा..

दोनों थोड़े घबराए थे पर मलखान ने कहा .. .

मलखान – वो.. . क्या है.. . ना.. . दीदी गिर गई थी, तो संभालते हए देर हो गई..

बबलू दीदी के बिखरे बाल, कपड़े और नीचे के भीगे धान के पेड़ो को देख कर शक की नज़रो से उन दोनों को देखने लगा, मुझे लगा कही ये जान ना जाए.. .

मैं – हाँ, बबलू, मैं और मलखान दीदी को संभाल के ला रहे थे..

दीदी मेरी बातों को सुनकर मलखान की और देखने लगी, तो मलखान ने उसे एक आँख मार दी..

फिर तो जब हम घर तक आए, तब तक दीदी के मुंह से एक आवाज़ तक नहीं निकली, उसे पता चल चुका था के मैं जानता हूँ, उसे शर्म आ रही थी..

रात को भी हम मे कोई बात नहीं हई..

सुबह जब मैं स्कूल गया तो मलखान वहां मुझसे लड़ने लगा.. .

मलखान – साले, तू थोड़ी देर उस बबलू को रोक लेता तो मेरा काम हो जाता, मेरे लंड ने कल से मुझे परेशान कर रखा है.. तू दोस्ती के नाम पे कलंक है..

मैं – चुप हरामी, तुझे अपनी लंड की पड़ी है, इधर मुझे दीदी की चिंता होरही है.. कही वो शर्म से आत्महत्या ना करले..

मलखान – क्या बक रहा है, ऐसा नहीं होगा.. तू आज स्कूल के बाद ही उससे बात करना.. उसे समझना के तू शुरू से ही उसे मुझ से करवाना चाहता था.. बस फिर वो नॉर्मल हो जाएगी.. उसे आज लेकर ज़रूर आना, लेकिन आधा घंटा पहले..

मैं – आधा घंटा पहले क्यों .?.

मलखान – हा हा हा .. . आज हम खेलेंगे नहीं, मैं तेरी दीदी को झाड़ी के अंदर ले जाकर चोद दूँगा.. . ईीई.. . हे हे.. .

मैं – वो तो ठीक है, पर क्या वो आज आएगी .?.

मलखान – ज़रूर आएगी, वादा किया है उसने.. तू बस उसे ले आना..

हम घर लौट गये उस दिन..

दोपहर को मैं हिम्मत करके दीदी से बात करने गया, तो दीदी पहले सब सुन रही थी..

मैंने कहा के मुझ पे भरोसा रखो मैं मम्मी पापा से कुछ भी नहीं कहूँगा..

दीदी ने फिर अचानक से मुझे गले लगा लिया और रो पड़ी, कहने लगी…

दीदी – भाई, तूने आज सच में राखी की इज़्ज़त रख ली.. तुमने अपनी बहन की रक्षा की है आज.. तो क्या तुम आज फिर मेरी रक्षा करोगे .?. .?.

मैं जजवाती होके – हाँ दीदी, पर किससे .?.

दीदी – जब मैं और मलखान आज झाड़ी मे पेला पेली करे तो तुम बाहर निगरानी रखना.. .

ये बात सुनकर, क्या कहूँ कुछ समझ नहीं आया, ऐसी रक्षा !!! भला कौन बहन माँगेगी !!!

फिर भी दीदी का दिल रखने के लिए मैंने हाँ कह दिया..

हम प्लान के मुताबिक आधे घंटे पहले मम्मी को खेलने जा रहे है कहके निकल पड़े..

वहां, मलखान ने बाकियो को कह दिया के आज मैदान मे कीर्तन पूजा होगी, तो खेल बंद करवा दिया.. बस फिर क्या .. .

मैं जैसे ही दीदी को लेकर उस किया झाड़ी के पास पहुँचा, तो मलखान वहां पहले से खड़ा मुस्कुरा रहा था..

सिर्फ़ एक हाफ पैंट और कुछ पह्नना मुनसिफ़ नहीं समझा था उसने..

उसके पतले बदन मे भी काफ़ी मस्क्युलर लाइन्स दिख रहे थे और हमे देख कर मुस्कुरा ने लगा..

आकर दीदी को मेरे पास से लेकर चला गया..

मुझे तो ऐसी खुंदक हई, मानो मैं दलाल हूँ और वो मेरी आइटम को लेकर जा रहा हो..

क्या दिन था मैं अपनी ही प्यारी दीदी को इस चूतिए से चुद्वाने लाया था.. पर मैं करता भी क्या.. .

जब मलखान दीदी राज़ी तो क्या करेगा काज़ी…

वो दी को लेकर झाड़ी के अंदर चला गया, मैं वहां वॉचमन जैसा खड़ा था..

मुझे काडी हुई के देखे अंदर जा के हो क्या रहा है..

मैंने चारो और देखा दूर दूर तक कोई नहीं दिखा तो मैं भी अंदर चला गया.. जाकर देखा.. .

दीदी की कमीज़ और चुनरी पेड़ो के बीच बिच्छाया हुआ है..

दीदी एक नारियल पेड़ पे पीठ टीका खड़ी है हाथ ऊपर के पेड़ को पकड़े है..

मलखान अपने मुंह को दीदी की चीकनी बगल मे लगा के चूम रहा है..

दीदी की काली ब्रा मे उसकी चूचियाँ बाहर निकलने को तड़प रही थी..

ब्रा की कोने से चूचियों के कुछ हिस्से बाहर निकले है फिर उसकी छातियों पे ब्रा के ऊपर से काट रहा है..

ऐसा करते हुए वो नीचे आता है और दीदी की पाजामा पैंटी खीच के पैरों तक ले आता है..

दीदी भी लात से उसे निकाल फेंकती है..

इतना कर के मलखान उठा और दीदी की काली ब्रा के स्ट्रिप्स को दोनों तरफ करके दीदी की बाजुओ से खिसका देता है..

पर अब भी चूचियाँ ब्रा कप से आधी ढकी हई है..

मैं तो तरस गया था दीदी की निपल्स को देखने को पर मलखान चूचियों को छोड़ दीदी को फिर चूमने लगा..

इस पर दीदी ने खुद अपने ब्रा के कप्स को खीच के पेट तक ला दिया और फिर जो दिखा वो…

वो मेरा लंड झेल नहीं पाया और अपनी बहन को नंगी गोल गोल गोरी चुचियाँ देख मैं झड़ पड़ा..

मेरे लंड ने ऐसे पानी छोड़ा जैसे २ घंटे से मूत आ रही हो..

कहानी जारी रहेगी…

Padhte Rahiye Sex Stories Hindi Me Roz Nayi Kahaniya…

Written by

मस्त कामिनी

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