मेरी चुदाई : मरवा ली गाण्ड बातों बातों में

(Meri Chudai: Marwa Li Gaand Baton Baton Me)

दोस्तो.. मेरा नाम अजय है और आज अपने एक मस्त Meri Chudai अनुभव के बारे में बताने वाला हूँ। मेरी बचपन से ही सेक्स की तीव्र इच्छा रही है। चुदाई का खेल खेलना पसंद ना हो.. पर मुझे दूसरों का लण्ड देख कर भी रहा नहीं जाता। बस हमेशा मौके की तलाश में रहता हूँ कि कोई ऐसा मिल जाए.. जिसका मैं खूब रसपान करूँ और जी भर के उससे अपनी मचलती गाण्ड में उसका लौड़ा डलवा कर तन की प्यास बुझाऊँ।

मैं इंजीनियरिंग का छात्र हूँ और अपने घर से दूर.. दूसरे शहर में पढ़ता हूँ। इसीलिए मुझे अपनी प्यास बुझाने का मौका खूब मिल जाता है।

दस दिन पहले की बात है.. काफ़ी दिनों से किसी नए लण्ड के दर्शन नहीं हुए थे और गाण्ड में आग लगी हुई थी। मैंने सोचा की थोड़ा बाहर घूम कर आता हूँ.. शायद कोई मर्द मिल जाए.. जिसे मैं अपनी ओर खींच सकूं।

काफ़ी देर तक बाहर घूमा.. पर कुछ नहीं मिला और जैसे-जैसे समय निकलता जा रहा था.. मेरे तन-मन की भूख भी बढ़ती जा रही थी।

तभी मुझे पीछे से एक आवाज़ आई, मैंने पीछे मुड़ कर देखा.. तो देखता ही रह गया।
एक गोरा सा जवान एकदम हॉट और सॉलिड बदन वाला आदमी था।

एक मिनट तक तो मैं बस ये ही सोचता रहा कि इसका लण्ड कैसा होगा। पर फिर उसने दुबारा आवाज़ लगाई.. तो मुझे सुनाई दिया कि वो किसी अड्रेस के बारे में पूछ रहा था।

मेरा मन नहीं माना और मैंने सोचा कि कैसे भी इसको फंसा लूँ।
जब मैंने अड्रेस देखा.. तो वो मेरे कमरे से ज़्यादा दूर नहीं था, मैंने उससे कहा- थोड़ा दूर है.. पर मैं भी अपने कमरे पर ही जा रहा हूँ.. तो आप मेरे साथ चलिए.. यह पता भी उसी रास्ते पर है।

वो कुछ सोचने लगा.. पर फिर ‘हाँ’ कह कर मेरे साथ चल दिया, हम दोनों पैदल-पैदल चलने लगे।
रात के आठ बज रहे थे और उस रास्ते पर दूर-दूर तक अधिक लोग भी नहीं दिख रहे थे।

मैंने उससे बात शुरू की, थोड़ी देर इधर-उधर की बात करते-करते मैं बार-बार अपना हाथ उसके हाथ से टकरा रहा था। फिर मैंने उससे पूछा- तुम्हारी शादी-वादी हुई है क्या?
उसने बोला- नहीं हुई.. क्यों कोई बात है?

यह सुन कर तो मेरा लण्ड और खड़ा हो गया कि आज तो एकदम नया माल हाथ लगा है।
मैंने कहा- नहीं कोई बात नहीं बस यूं ही पूछा..
इतने में उसने मुझसे पूछा- तुम्हारी हो गई है क्या?
मैंने कहा- अरे कहाँ साहब.. शादी की किस्मत ही कहाँ है.. पर उसके बिना भी तो मज़ा लिया जा सकता है।

यह सुन कर वो भी हँस पड़ान उसने पूछा- किस तरह के मज़े लिए है तुमने?
तो मैंने कहा- रहने दो यार.. पता नहीं तुम क्या सोचोगे।
वो बोला- अरे बताओ तो सही.. पक्का बुरा नहीं मानूँगा।

मैंने उससे बोला- यह बताने से ज़्यादे करके दिखाने में ही समझ में आएगा।
वो बोला- क्या करके दिखाने में?

तो मैं तुरंत ही उसके लण्ड को उसकी पैंट के ऊपर से सहलाने लगा और एकदम से दबा दिया।
उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की.. पर मैं नहीं रुका और उसके होंठों पर चूमने लगा और साथ में उसके लण्ड को भी हिलाने लगा।

उसने मुझे धक्का मार दिया।
मैंने फिर से उसके लण्ड को पकड़ा.. उसको धक्का मारते हुए दीवार पर धकेल दिया।

इस बार उसने भी मेरा चूमने में साथ दिया और हम एक लंबा चुंबन करते.. इससे पहले उसने कहा- हम रोड पर हैं।
मैंने उससे कहा- चलो मेरे कमरे पर चलते हैं.. मज़ा आएगा।
तो उसने ‘हाँ’ कह दी और हम जल्दी से कमरे पर आ गए।

कमरे में घुसते ही उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और अपनी बांहों में दबोचने लगा।

मुझे उसका लण्ड अपनी गाण्ड की दरार पर महसूस हो रहा था। मेरा लण्ड इस बात से एकदम तन गया था। इतने में ही उसने अपना एक हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया और सहलाने लगा और साथ ही साथ अपने होंठों से मेरे कान को चाटने लगा। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत घूम कर झट से उसके गरम होंठों पर चुंबन दे दिया।

वो मेरे होंठों को अपने दांतों से काटने लगा, क्या मज़ा आ रहा था। एक मिनट तक लगातार चुंबन के बाद मैंने उसको बिस्तर पर धकेल दिया और झट से उसके ऊपर कूद गया, मैंने उसकी पैंट खोली और जिस चीज़ का मैं इतने दिनों से इंतज़ार कर रहा था.. आज उसके दर्शन हो गए।

उसका लण्ड मेरे जितना ही बड़ा था.. पर कुछ तो अलग बात थी उसमें। मुझसे रुका नहीं गया और मैंने फट से उसको अपने मुँह में ले लिया। बड़े दिनों बाद मैंने लण्ड के स्वाद को चखा था। शरीर के अन्दर एक अलग ही गर्मी चढ़ने लगी।

वो ‘उन्ह आ.. आहह..’ करने लगा और मैं समझ गया कि उसको मज़ा आ रहा है। इसलिए मैं और ज़ोर-ज़ोर से उसका लण्ड चूसने लगा। थोड़ी ही देर में उससे रहा नहीं गया और उसने मुझे घुमा कर उल्टा पटक दिया और मेरे ऊपर आ गया।

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