छात्रा की गांड दिखाई और मेरी चुदाई

(Desi Kahani Chhatra Kee Gaand Dikhaai Aur Meri Chudai)

आपको Desi Kahani पसंद है! तो आज पेश है ऐसी सच्ची घटना, जिसमें चुदाई के साथ नंगे जिस्म के जलवे का भी वर्णन भी हुआ है। यह मेरे और एक छोकरी के साथ हुआ..

हाय दोस्तो,

मेरे मौसा जी की नाटक कम्पनी

मेरा नाम गुप्तांगी है! और यह मेरा पुकारू नाम और असली नाम है। मैं अभी 23 साल की हूँ और एक नाटक कम्पनी में काम करती हूँ।

रंग मंच! मैं 18 साल की उम्र से ही करती रही हूँ, हाँ पहले केवल नाचती थी।

यह नांच और नाटक कम्पनी है जो मेरे प्रिय मौसा जी चलाते हैं! इसमें कोई 40 कलाकार काम करते हैं।

इस कम्पनी में कोई 20 तो नर्तकियाँ और पुरुष नर्तक (नांचने वाले) हैं जो की 18 से 24 की उम्र के बीच के हैं, कुछ नांचने वाले तो मेरे से भी अच्छा नाचते हैं।

नाटक करनेवालों मे तो 10 साल के बच्चे, कई गबरू जवान पट्ठे और हाँ अधेड़ उम्र के भी कलाकारें है! जो कि! 35-40 की उम्र के बीच के और ये बड़े अनुभवी हैं।

यह नांच और नाटक कम्पनी देहात में लगने वाले मेलों मे भी भाग लेते हैं! पर ज़्यादा नहीं! देहात में भाग वालों की अलग मंडली है।

आम तौर पर तो मौसा जी बड़े शहरों मे प्रचार करके भाग लेते हैं।

नांच के कार्यक्रम अलग होते हैं और नाटक के अलग! हाँ! साथ में कार्यक्रम भी होते हैं!

नाटक के अंत में चूत दिखाना

हर कार्यक्रम के बिल्कुल आख़िरी हिस्से में! जब वो ख़त्म हो रहा होता है, तो एक-न-एक नाचनेवाली छोकरी को अपनी चूत दिखानी पड़ती है!

हालांकि! घूम कर गांड भी! पर गांड थोड़ी देर के लिए! यानि एक मिनट चूत तो! 3 से 5 मिनट के लिए गांड!

चूत दर्शन के वक्त शौक़ीन लोग 100 के या 500रु के नोट नांचने वाले को पकड़ाते हैं। मैं भी चूत दिखाती हूँ! पर सभी कार्यक्रमों मे नहीं!

खास निजी कार्यक्रमों में! जो कि मेरे मौसा जी होटल्स में करते हैं।

जो नांच होता है! वो एकल भी होता है, और ग्रूप नांच भी। हाँ! हम लोग नौटंकी भी करते हैं!नौटंकी बहुत भद्दी और अश्लील होती है।

इसके अलावा नाटक भी होता है, नाटक वो भी दोहरे मतलब वाला और उत्तेजक। कुछ नाटक करने के लिए भाड़े पर कलाकार भी मँगाने पड़ते हैं!

निजी कार्यक्रम में नंगापन और चुदाई

अब एक बात बता दूँ! कि होटल्स में हम जो निजी कार्यक्रम देते हैं! उसमे बहुत ज़्यादा अश्लीलता, एकदम नंगापन और माफ़ करें! असली चुदाई होती है!

दोस्तो, अब मैं आपको बताती हूँ! एक कार्यक्रम के बारे मे जिसके बैनर पर लिखा है बड़े बड़े रंगीन अक्षरों मे! वो है: स्कूल गर्ल की इज्जत उतार

इस कार्यक्रम के लिए हमें एक स्कूल से सम्पर्क करके स्कूल की लड़की ही पता कर लाए थे। यह लड़की ऐसी थी! जो भद्दा नाच भी कर सकती थी।

इस नाटक मे खुद मेरे मौसा जी ने इस लड़की की इज्जत उतारी थी और मैंने इस नेक काम में मदद की थी, ठीक है ना दोस्तो!

ऐसी चुदाई ना देखी और ना सुनी

दूसरा कार्यक्रम एक होटल में निजी कार्यक्रम के तौर पर किया गया था।

इसमें खुद मेरी इज्जत के चिथड़े उड़ गए थे। यानि! मेरी पक्कम-पक्का, पक्की चुदाई हुई हरेक तरीके से! तो शुरू होता है!

स्कूल गर्ल की इज्जत उतार चुदाई

ठक! ठक! किसी ने मौसा जी के गुसलखाने में दस्तक दी!

मौसा जी ने दरवाजा खोला, तो देखा! एक साँवली पर खूबसूरत लड़की! स्कर्ट-टॉप-टाई में किताबें, अपनी छाती से चिपकाए खड़ी है!

नौकरानी ने उसे भीतर बैठने को कहा, और एक गिलास पानी दिया।

मौसा जी ने आकर उसके कंधे को छुआ और फिर लड़की की पीठ पर हाथ सहलाते हुए बोले, बेटी, क्या काम है?

वो बोली कि, उसको वर्मा सर ने भेजा है! और यह किताबें दीं है आपको देने, और यह चिट्ठी भी उन्होंने आपको दी है।

वर्मा सर, मौसा जी के ख़ास मिलने वाले थे। चिट्ठी में लड़की को कोई काम देने की बात थी। इस लड़की का नाम रिंकी था।

छोकरी के गोरी गुदाज जाँघों के झलक

कमरे के तेज रफ़्तार पंखे से, उसका स्कर्ट उड़ उड़ जाता था! जिसमें उसकी गोरी गुदाज जाँघें साफ झलकती!

मौसा जी ने उससे कहा- तुम दूर क्यों बैठी हो? सामने आओ! मेरे पास ही सोफे पर आजा बेटी! प्यार से पूछकर कहा, तो वो आने के लिए उठ खड़ी हुई!

मौसा जी ने उसकी कोमल हाथ पकड़, धम्म से अपने बिल्कुल पास बैठा लिया! बोले, जूते खोल दे मुन्नी! तो उसने जूते खोल दिए।

मौसा ने मुझसे कहा- अरे भाई! इस बेचारी को कुछ खाने को दो तो!

मैं एक थाली में काले अंगूर और कोका कोला की बोतल ले आई। लड़की ने थाली को छुआ भी नही।

वर्मा जी की चिट्ठी उसे दिखाते हुए! वो बोले, ऐसी नौबत कैसे आ गई? यह लिख रहे हैं, कि तुम्हारे पास स्कूल की पूरी फीस भी देने को नही, ना पूरी किताबें तो काम कैसे चलेगा?

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