मुझे अपने लिए दोस्त चाहिए था

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आपको Desi Kahani पसंद है तो आज आपके लिए पेश है मेरी बिल्कुल सच्ची कहानी जिसमें मुझे बचपन से कोई दोस्त नहीं मिला पर जब मिला तो, मेरी ज़िन्दगी बिल्कुल बदल गई।

हेलो दोस्तो,

मेरा नाम जस्ट फ्रेंड्स मैंने इसलिए रखा है! क्योकि मेरा कोई खास फ्रेंड नहीं है और मैं अपने अच्छे दोस्त बनाना चाहता हूँ।

यह मेरी पहली कहानी है! मुझसे हिन्दी टाइपिंग नहीं आती, कोई ग़लती हो जाए तो माफ़ करना।

दरअसल! मैं पाँचवीं क्लास में था, तब मेरे मामा मुझे अपने घेर ले गए और मुझे मेरी नानी के पास छोड़ दिया।

मैं अपने परिवार से दूर हो गया, मैं वहीं नानी क पास पढ़ने लगा!

पहले! मुझे लगा था कि मैं अपनी नानी क पास खुश रहूँगा, क्योकि मैं जब छुट्टियों में अपनी मम्मी के साथ आता था, तो नानी मुझे बहुत प्यार करती थी!

जब मैं वहाँ रहने लगा! तो मुझे बहुत अकेलापन लगा क्योंकि कोई मेरे साथ खेलने वाला नहीं था।

ना ही कोई नए दोस्त पड़ोस में! मैं गुस्सा रहने लगा ऐसे में मुझे जिसका भी साथ मिलता, मैं उसके साथ रहता!

उसमें भी मेरी नानी मुझे टोकती रहती थी! और मेरी स्कूल में भी किसी से कोई दोस्ती नहीं हुई।

मेरी नानी मेरे स्कूल में पानी पिलाने का काम करती थी इसलिए वो मुझे लंच में भी नहीं खेलने देती थी।

ऐसे में! मेरी संगत बिगड़ गई और मैं गलत संगत में पड़ गया।

स्कूल में जब 2 महीने की छुट्टी होती तो, मैं अपने घर जाता और वो 60 दिन मेरे लिए जैसे जन्नत होते थे!

मैं अपने परिवास के साथ होता था। मेरे परिवार में मेरी मम्मी, मेरी बड़ी बहन, मुझसे छोटा भाई, और एक सबसे छोटी बहन हैं!

मेरे पिता जी की मौत एक एक्सीडेंट में हो गई थी तो गाँव के रिवाज के अनुसार मेरी माँ की शादी मेरे चाचा के साथ कर दी गई थी।

वैसे भी! हमारे परिवार साथ में थे, दादा दादी चाचा चाची सब थे! मेरी माँ और मौसी दोनों बहनों की शादी एक ही घर में हुई थी!

इस तरह वो देवरानी जेठानी भी थी! मेरी माँ बड़ी थी, वैसे मेरी माँ चार बहनें और एक भाई है। और वो भाई यानी मेरे मामा! मेरी सबसे बड़ी मौसी के पास रहते हैं।

इसलिए! मुझे मेरी नानी के पास छोड़ा! ताकि वो अकेली ना रहे। मेरी तीनों मौसी और मेरी माँ सब अपने ससुराल में थी और मामा बहन के पास!

इस तन्हाई के चलते मुझे जो संगत मिली! उससे ही मैने सारी गंदी हरकतें सीखी। जैसे! मूठ मारना! सेक्स की बातें करना!

दसवीं क्लास में आते आते! मैं स्कूल के बच्चों के साथ स्कूल में बहाने मारने लगा, और जैसा कि मैने कहा, मेरा नानी के पास दिल नहीं लगता था।

पढ़ाई तो नाम मात्र ही होती थी! वो जो कुछ मैं स्कूल में क्लास पर टीचर से सुन लेता था।

मेरा दिमाग बहुत तेज है, मैं जल्दी से कुछ भूलता नहीं!

खैर! दसवीं में मुझे आराम मिली और ख़त्म भी हो गई। मैंने अपनी माँ से भी कहा, कि मेरा दिन यहाँ नहीं लगता।

उन्होंने भी कहा- यहीं रहकर मेरी ज़िन्दगी सुधर सकती है कहकर मुझे मना कर दिया!

मैने जैसे तैसे 12 पास की फिर मैं गाँव गया! वहाँ हरियाणा में माडू के एक कॉलेज में पढ़ने लगा।

मैं तो गाँव में 8-9 साल के बाद आया था, तो यहाँ भी मेरा कोई दोस्त नहीं था।

मेरे कॉलेज में मेरी बहन और मेरी बुआ की लड़की भी पढ़ते थे, तो वहाँ भी मैं ना ही कोई दोस्त बना सका! ना कोई गर्लफ्रेंड!

धीरे धीरे मैने कॉलेज जाना भी बन्द कर दिया! यह देख मेरी माँ ने मुझे फोटोग्राफी का काम सीखने के लिए, फिर अपने मामा के घर दिल्ली भेज दिया!

दोस्तो यहाँ भी मेरा मन नहीं लगता था, तो मैं काम में ध्यान नहीं दे पता था! लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा!

उल्टा! मुझे दोष देते रहे, कि मैं सीखना नहीं चाहता! नानी के घर पर भी मामा अब रहने लेगे थे!

उन्होंने शादी भी कर ली थी! लेकिन मेरी नानी के साथ झगड़ों के कारण या, फिर मामी थोड़ी तनाव में थी शादी से पहले ही!

पता नहीं! क्या वजह थी लेकिन उन्होंने आत्महत्या कर लिया था! यह उस वक्त की बात है जब मैं 10वीं में था।

अब जब मैं काम सिख रहा था तो मामा क घर सारा काम मुझे करना पड़ता था!

मेरा नानी क घर रहने से बस यही फायदा हुआ, कि मैं घर के सारे काम कर लेता हूँ! एक लड़की के सारे काम बस सेक्सुअल छोड़कर!

खैर! अभी भी मैं ऐसी ही ज़िन्दगी जी रहा हूँ! मेरे मामा ने भी दूसरी शादी कर ली, और उनके दो बच्चे हैं ओर मैं आज ब सबके होते हुए अकेला।

मैं काम भी अच्छा सिख गया हूँ और एक अच्छा फोटोग्राफर हूँ!

दोस्तो, यहीं से मेरी एक अलग ज़िन्दगी शुरू होती है! आपको पता ही होगा!

लड़की किसी की बात सुने या ना सुने लेकिन कपड़े सिलवाते समय दर्जी और फोटो के समय फोटोग्राफर की ज़रूर सुनती है।

मेरी भी यहाँ किसी से दोस्ती हुई, उसके बारे में बाद में! इस कहानी में मैने कोई ग़लत बात नहीं लिखी मैं मेरी सेक्स स्टोरी का नियमित पाठक हूँ!

मैंने यहाँ कई कहानियाँ पढ़ी है कुछ असली लगी कुछ झूठी!

दोस्तो! अगर कोई ग़लती हुई हो तो माफ़ी चाहता हूँ।

अगर! आपका साथ मिला तो अपनी सारी बातें आपको बताना चाहूँगा, क्योकि एक यहीं पर मुझे ऐसा लगा कि मैं अपनी दिल की बात कह सकता हूँ! वरना मैं तो अकेला ही था।

मेरी मेल आईडी है [email protected] आप अपने सुझाव ज़रूर दें!

मैं पहली बार जब नानी घर गया तब मुझे वहाँ मन नहीं लगा पर दूसरी बार तब मेरी ज़िन्दगी में एक अलग बदलाव आया जिसमें मैं एक अच्छा फोटोग्राफर बन गया साथ में एक अच्छा इंसान और तब Desi Kahani में पता चला कि लड़कियाँ किसी की बात माने या ना माने लेकिन दर्जी और फोटोग्राफर की बात मानते ही हैं और जैसे बोलो वैसा करते हैं।

Written by

akash

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