दोस्त की बहन चुदाई– 1

(Dost Ki Bahan Chudai- 1)

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दोस्त की एक बहन की शादी हो और दूसरी से मामला फिट हो जाने वाली hindi sex stories आप दोस्तों को बहुत हिट लगती होगी तो कुछ वैसी जबरदस्त मेरी मामला भी फिट हुई..

मेरा नाम अर्जुन है मेरी उम्र 23 है। यह मेरी पहली कहानी है अगर कोई ग़लती हो जाए तो माफ़ करना। यह कहानी करीब 3 साल पुरानी है, राज़ मेरा बहुत अच्छा दोस्त है।

मेरे दोस्त की दो बहन है तो उसकी बड़ी बहन की शादी थी हम ( मैं और मेरा दोस्त) शादी की तैयारी मे लगे हुए थे, एक दिन उसकी छोटी बहन (कंचन उम्र 24 साल ) को शादी के कपड़ों के लिए बाज़ार जाना था।

उस दिन मैं राज़ के घर पर ही था तो कंचन मेरे पास आई और बोली की..
कंचन- अर्जुन यार मुझे शादी के कपड़े के लिए जाना है तो तुम चलो।
मैं चलने के लिए तैयार हो गया जेसे ही मैंने गाड़ी निकाली तो उसके साथ उसकी फ्रेंड पिंकी भी आ गयी, हम तीनों बाज़ार चले गये उन्हे काफ़ी टाइम लग गया, मैं अकेला उनका इंतज़ार कर रहा था।

करीब 1 घंटा बाद वो दोनो आ गई लेकिन कुछ नही था उनके हाथ में।
मैं- क्या हुआ कपड़े कहाँ हैं तो, पिंकी- भाई यहाँ कुछ अच्छा नही है कहीं और चलते हैं।
मैं- कंचन तुम्हारे पासे पैसे कितने हैं? कंचन- है पापा का ATM Card है।

मैं उन्हें पास ही मे एक मॉल मे ले गया वहां उन्होंने कपड़े लिए ओर हम घर की तरफ चल दिए, तभी पिंकी के भाई का फोन आया और वो उसे घर आने के लिए बोल रहा था। तो पिंकी ने कंचन से बोला

पिंकी :- कल मेरा पेपर है तो मुझे जाना होगा। वो वहीँ से चली गयी। अब मैं और कंचन घर की और रवाना हो गये तभी कंचन बोली
कंचन:- अर्जुन यार तुम तो बताओ की कपड़े कैसे हैं। मैं- घर जाकर बता दूँगा आंटी भी देख कर बता देगी।

कंचन- अगर अच्छे नहीं हुए तो अभी बदल देंगे। पिंकी को तो अच्छे लगे हैं तुम भी देख लो।
मैंने गाड़ी साइड मे लगा कर उसके कपड़े देखने लगा।
वो काफ़ी छोटे कपड़े थे शहर मे तो ये सब चलता है लेकिन गाँव मे नही तो मैने उससे बोला..
मैं- यार गाँव मे ये अच्छा नही लगेगा लेकिन तुम इन कपड़ो मे बहुत सुंदर लगोगी।
कंचन- वो तो ठीक है अब बहन की शादी तो एक बार ही होगी कहने दो जो कहेगा।

मैं- ठीक है, तुम्हारी मर्ज़ी। तभी उसके कपड़ों में मुझे उसकी ब्रा पेंटी नज़र आई मैं उन्हें देखता रहा ब्रा का साइज़ काफ़ी बड़ा था उसके चूचे काफ़ी बड़े थे, उसका साइज़ 34-28-30 था।

उसकी पेंटी पर कुछ लगा था शायद उसकी चूत का पानी था। उसे पहले पह्न कर देखी होगी मैं पेंटी पर लगे पानी को हाथ से महसूस कर रहा था। की तभी उसने मुझे ये करते देख लिया।

कचन- ये क्या कर रहा है? मैं- कु.. कुछ नहीं।
कंचन- मैंने सब देख लिया है तू क्या कर रहा था तुझे शर्म नही आती।
मैं- ग़लती हो गयी। कंचन- चल अब घर।

हम घर पहुँच गये मैं अपने घर आया और पैंटी के बारे मे सोच कर मुट्ठी मारने लगा अब मुझे ये लगने लगा की कैसे किसी की चूत चोदूं।

दो दिन बाद मैं दोस्त के घर गया लेकिन वहाँ रवि (मेरा दोस्त) नही था तो मैं आंटी के पास चला गया और कम मे मदद करने लगा आंटी काम से घर से बाहर चली गई और मैं सब के साथ काम करा रहा था, तभी मैने कंचन से माफी मांगने उसके कमरे मे चला गया, लेकिन वहाँ कोई नही था।

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