पायल की चूत हुई कायल 4

(Paayal Ki Chut Hui Kaayal 4)

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Hindi Sex Stories Par Pesh Hai Paayal Ki Chut Hui Kaayal Ka 4th Part…

लेखिका – पायल मिश्रा

मेरी धुन्नी पर कटोरी को थोड़ा सा तिरछा करके गंगा जल और शहद का मिश्रण धीरे धीरे गिराया..

फिर उन्होंने उनकी उंगलियों को मेरी धुन्नी पर रगड़ना शुरू किया..

शुद्धि करते हुए ऐसा एहसास होगा, ये सोचा नहीं था मैंने.

गुरु जी के गर्म हाथ मेरी धुन्नी को ज़ोर ज़ोर से रगड़ रहे थे.

उम्म्म… गुरु जी… – मैंने सिसकारी भरते हुए “आ” भरी..

उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी धुन्नी में डाली और उंगली को हिलाने लगे जिससे उनकी उंगली का सिरा, मेरी धुन्नी में कस कर रगड़ने लगा..

ओह गुरु जी ये क्या… स स्स्स्स स्स…

फिर उन्होंने रुक कर मेरी तरफ देखते हुए कहा – बहू, धुन्नी को ठीक से शुद्ध करना होगा… तुम्हें मेरे साथ देना होगा, इसमें… अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो में ये टोना कभी नहीं निकाल पाउँगा, बहू…

मैंने उनकी तरफ देखते हुए, बस अपनी गर्दन हिलाते हुए हामी भरी..

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गुरु जी अब नीचे झुक गये और उन्होंने अब अपनी जीभ मेरी धुन्नी पर रगड़नी शुरू की..

श गुरु जी… आ आ अह ह स स्स्स्स्स स्स…

मैंने उनकी बालों में उंगलियाँ फेरनी शुरू की और गुरु जी अपनी जीभ को गोल गोल घुमाने लगे, मेरी धुन्नी के इर्द-गिर्द.

श गुरु जी… स स्स्स्स्स स्स ओह माआ आ अ… मैं मज़े से कराहने लगी और मैंने बिना सोचे समझे कहा – और चाटिये ना, गुरु जी…. हाँ, और चाटिये ना…

मेरे मुंह से ऐसा सुन कर उन्होंने अपनी जीभ का सिरा, मेरी धुन्नी के छेद में धकेला और मेरी धुन्नी को चाटने लगे..

स स्स्स्स्स् सस्स आ आ आ आ अह ह उम्म्म्म म म म म म म म म म म म म ओह माआ आ आ आअ उफ फ फ फ फफ्फ़…

मैंने उनके सिर को ज़ोर ज़ोर से मेरी धुन्नी में दबाया..

फिर गुरु जी ने अपना मुंह खोल कर मेरी धुन्नी पर प्रेस किया और मैंने उनके दाँतों को मेरी धुन्नी पर कटोचते हुए महसूस किया..

आ आ आ आ स स्स्स्स्स स्स ओह माआ आ ऑश और कीजिए ना मेरी शुद्धि गुरु जी… पूरे बदन की शुद्धि कीजिए पूरी रात… स स्स्स स्स…

अब गुरु जी ने मेरे सीने पर से पल्लू हटाया और मेरा ऊपर आकर बिना कुछ कहे मेरे मुंह पर अपना मुंह रखा.

उनके गर्म होंठों के स्पर्श से जैसे में पिघल से गई.

मैंने उनकी पीठ पर हाथ रखते हुए उन्हें कसकर दबोच लिया.

गुरु जी ने अपना मुंह खोल कर मेरे होंठों को कस कर अपने मुंह में भींचना शुरू किया.

फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरे होंठों पर रगड़ना शुरू किया.

मेरे होंठों को वो अपनी जीभ से चाट रहे थे और मैं मस्त होकर मचल रही थी..

म्म्म्म म म म उम्म्म्म एम्म्म…

मैंने अपना मुंह खोला और उनकी जीभ अपने मुंह में ली.

गुरु जी अब अपनी जीभ को मेरी जीभ के चारों तरफ रगड़ रहे थे.

फिर मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में डाली.. गुरु जी, मेरी जीभ को चूसने लगे अपने मुंह में लेकर..

चूसते हुए उनके मुंह से – मु ह मु ह मु ह मु ह मु ह मु ह मु ह की आवाज़ें आ रही थी..

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