शादी से पहले सुहागरात

(Shaadi Se Pahle Suhagraat)

दोस्त की मम्मी को देखकर कई बार उनकी चुदाई करने की सोचता था और एक दिन मेरी देखा देखी से दोस्त की मम्मी को शक हुई और meri chudai उनके साथ हो गई..

हैलो फ्रेंड मैं विकाश और मेरी बॉडी का लुक इतना सेक्सी की कोई भी आंटी और भाभी देखे तो मुझे अपना दिल दे दे।

बात तब की जब मैं बी. कॉम सेकेण्ड ईयर मैं था तब मेरे साथ मेरा दोस्त विक्रम भी पढता था। मैं उसके घर भी आया जाया करता था उसके घर में उसकी मम्मी और वो दोनों ही थे उसके पाप की मौत 12 साल पहले तो चुकी थी।

पर उसकी ममी का शरीर ऐसा था की मालूम ही नहीं पड़ता था की वो एक 20 साल के लड़के की माँ है। उनका फिगर का साइज़ 38-36-30 था। मैं तो हर बार जब भी उनको देखता तो सिर्फ़ उनके मम्मों को ही देखता रहता।

कभी-कभी तो सोचता कि इनको किसी कोने में ले जाकर जम कर चुदाई करूँ पर क्या करूँ दोस्त की माँ थी और वो मुझे बहुत अच्छे से ट्रीट करती थीं। जैसे मैं उनका ही बेटा हूँ। तब भी मेरे मन में विक्रम की माँ के साथ सेक्स करने की चाहत थी।

मेरा दिल बार-बार उनके बारे में ही सोचने लगता कि कैसे इस माल का मजा लिया जाए। अब मैं ज्यादा से ज्यादा समय विक्रम के घर पर जाने लगा और आँखों से ही उसकी माँ के साथ सेक्स करने लगा।

और जब तो खास करके जाता जब विक्रम कहीं बाहर गया होता। मैं उनके घर पर जाकर उनसे जानबूझ कर पूछता- अनिल कहाँ है? तो विक्रम की माँ सोनम आंटी कहती- वो तो बाहर गया हुआ है। तब मैं कहता- ठीक है.. मैं यहीं बैठकर उसका वेट कर लेता हूँ।

और मैं उनके घर मैं ही बैठकर सोनम आंटी को घूरने लगता। जब उनकी निगाहें मुझ पर पड़तीं. तो मैं नजरें हटा लेता। ऐसे ही बहुत दिनों तक चलता रहा।
फिर एक दिन ऐसे ही अनिल के घर पर बैठा था तो सोनम आंटी ने कहा- जरा सुनो मेरा एक काम करोगे?

मैंने झट से कहा- हाँ.. क्या काम है? तो आंटी ने कहा- जरा पलंग सरकाने में हेल्प करोगे.. मुझे उसके नीचे की सफ़ाई करनी है। अनिल से कहती हूँ तो वो भाग जाता है।
मैंने कहा- चलिए.. किधर सरकाना है? उन्होंने मुझे बेडरूम में आने को कहा.. और मैं उनके बेडरूम में चला गया।

मैं एक तरफ़ से जोर से बेड को धकेलने लगा। मैंने कहा- आंटी आप भी धकेलिए भारी है।
तब आंटी भी धकेलने लगीं और बेड को धकेलते वक़्त आंटी का पल्लू गिर गया और उनके भारी भरकम मम्मे ब्लाउज में से जरा नजर आए.. मैं ये देखकर पागल हो गया।

हाय.. क्या मस्त मम्मे थे यार.. दिल किया कि अभी जा के दबोच लूँ और सारा रस पी जाऊँ। उन्होंने साड़ी प्रिन्ट में सफ़ेद रंग की पहनी हुई थी और ब्लाउज भी उसी रंग का था.. तो उनकी गुलाबी रंग की ब्रा साफ़ दिख रही थी।

उनके मम्मों के बीच की दरार का हाय क्या कहने..! वो मुझे पागल बना रही थीं.. साथ में मेरा लंड भी ये देखकर उछलने लगा था। बेड को धकेलने के बाद आंटी ने झाडू ली और वो वहाँ साफ़ करने लगीं।

अभी भी उनका पल्लू नीचे ही गिरा हुआ था। शायद उनका ध्यान ही नहीं गया था या फ़िर मुझे अपने मम्मों का जलवा दिखाने के लिए जानबूझ कर पल्लू उठाया ही नहीं था।
मेरी भूखी नजरें उनके मम्मों पर ही टिकी हुई थीं, मुझे लग रहा था कि अभी जाकर उनको दबोच कर चुदाई कर दूँ.. पर क्या करूँ डर लग रहा था।

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