नेहा की योनि का कामरस 1

रात के लगभग 12:30 बजे मोबाईल की रिंग बजी तो ना चाहते हुए भी मैने फ़ोन उठाया, सामने से एक जानी-पहचानी आवाज़ सुनाई दी।

नेहा का फ़ोन था, वो बोली कि दीप, कल पानीपत बस स्टैंड पर मुझे ठीक 11 बजे पिक कर लेना। इतना कह कर उसने फोन कट कर दिया।

उस रात मैं काफ़ी खुश था क्यूंकि लगभग 2 महीने बाद मेरी नेहा से बात हुई थी एक समय में वो मेरी गर्लफ्रेंड थी पर पिछले 4 महीनों से उसके स्वभाव में काफ़ी परिवर्तन आ गया था।

मुझे बेहद प्यार करने वाली नेहा अब मुझसे बात भी नहीं करती थी।

खैर, मेरा नाम दीप है। हाइट 5 फीट 6 इंच और रंग गेंहुआ। मैं पानीपत का रहने वाला हूँ और इस वक़्त दिल्ली में जॉब कर रहा हूँ।

छोड़ो इन सब बातों को, अगले दिन शनिवार था और शनिवार को मेरे ऑफीस का ऑफ होता है तो मैं तय समय से कुछ पहले ही पहुँच गया था।

देखा की नेहा तो पहले से ही मेरा इंतज़ार कर रही थी, मुझे देखते ही वो मेरी बाइक पर बैठ गई और सीधे बोली कि दिल्ली चलो।

मैं हैरान था पर बिना कुछ बोले मैं दिल्ली की और चल पड़ा।

लगभग दो बजे हम नारायना पर थे। हमने वहाँ कुछ स्नॅक्स खाए और इतने में वो बोली कि चलो हेट-स्टोरी देखते हैं।

मैंने दो टिकेट्स ली और फिर हम अपनी सीट पर जाकर बैठ गए।

ये तो आप समझ गए होंगे कि वो कितनी हॉट मूवी थी तो जाहिर है मूवी ख़त्म होने तक मैं काफ़ी गर्म हो चुका था पर नेहा को मैंने छुआ भी नहीं था क्यूंकि रिश्तो में काफ़ी कड़वाहट आ चुकी थी।

खैर, मूवी ख़त्म होते ही वो बोल पड़ी कि दीप, चलो तुम्हारे रूम पर चलते हैं।

मैंने नारायना में ही कमरा ले रखा था तो लगभग दस मिनट में ही हम मेरे कमरे पर थे और हमारे कमरे पर जाते ही नेहा ने अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिए।

मुझे उस वक़्त कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि नेहा को हो क्या गया है।

जो नेहा मुझसे लगभग पूरी तरह दूर जा चुकी थी वो अचानक इस तरह।

खैर, मैंने भी समर्पण कर दिया और हम दोनों एक-दूसरे के होंठो को चूसने लगे।

करीब पाँच मिनट तक उसके होंठो का रसपान करने के बाद मैंने मोर्चा संभाल लिया। धीरे-धीरे मैं उसके होंठो से होता हुआ उसकी गर्दन तक पहुँच गया और चूमने लगा।

अब तक उसके भी मुँह से सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गई थी, मैं चूमता-चूमता कुछ और नीचे आया तो उसके टॉप में से उसके स्तन का उपरी हिस्सा दिख रहा था जो की आमतौर पर हर लड़की का दिखता है।

जैसे ही उसके उस हिस्से पर मैने अपने थरथराते होंठ रखे तो उसके मुँह से उई माँ… निकल गया।

धीरे-धीरे मेरे हाथों ने भी हरकत में आना शुरू कर दिया और मैंने उसके टॉप के ऊपर से ही अपने हल्के-हल्के हाथों से उसके वक्षों को गोल-गोल सहलाना शुरू कर दिया और बीच-बीच में हल्के से उसके वक्ष दबा भी रहा था।

अब उसके मुँह से सिर्फ़ आहह… आहह… की सिसकारियाँ ही निकल रही थी, फिर अचानक से उसने मेरे हाथ हटाते हुए अपना टॉप निकल फैंका।

आज भी उसके वक्षों का वही साइज़ था जो पहले हुआ करता था और जैसे ही उसने अपना टॉप निकाला, देख कर मेरी आँखों में आँसू आ गए कि आज उसने वही पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थी जो मैंने उसे उसके पिछले जन्मदिन पर तोहफे में दी थी।

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