मामी की चुदाई- 1

(Mami Ki Chudai- 1)

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चुदक्कड मामी की अल्हड जवानी को देख आहें भरने वाली desi sex kahani में कई कहानियां हैं और मेरी यह कहानी अपनी मामी के साथ कुछ ऐसे ही शुरुआत करने से हुई..

हाय दोस्तों मेरा नाम राज है। मैं मेरे मामा और मामी के साथ दिल्ली में रहता हूँ मेरे मामा प्रबंधक के रूप में filpkart में काम किया करते थे। मामी मुझसे लगभग बारह साल बड़ी थी। मैं उस समय कोई १८-१९ साल का था।

घर पर सभी मुझे राज कह कर बुलाते थे। मामी की तेज नजरें मुझ पर थी। वो मेरे आगे कुछ ना कुछ ऐसा करती थी कि मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। वो शरीर में भरी पूरी थी और बदन गदराया हुआ था। उनके सुडौल स्तन बहुत ही मनमोहक थे और थोड़े भारी थे।

मुझे मामी के बोबे और मटके जैसे चूतड़ बहुत अच्छे लगते थे। मेरी कमजोरी भी यही थी कि जरा से मामी की चूचियाँ हिली या चुतड़ लचके, बस मैं उत्तेजित हो जाता था और लण्ड को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता था।

भाभी को भी ये बात शायद मालूम हो गई थी कि उनके कोई भी एक्शन से मेरा बुरा हाल हो जाता था।

आज भी कमरे में सफ़ाई कर रही थी वो। उसके झुकते ही उसके बोबे झूल जाते थे, और मैं उन्हें देखने में मगन हो जाता था। वो जान कर के उन्हें और हिलाती थी। मुझे वो तिरछी नज़रों से देख कर मुस्कराती थी, कि आज तीर लगा कि नहीं।

वो अपने गोल मटोल चूतड़ मेरी तरफ़ करके हिलाती थी और मुझे अन्दर तक हिला देती थी। आज घर पर कोई नहीं था, सो मेरी हिम्मत बढ़ गई। सोचा कि अगर मामी नाराज हुई तो तुरंत सॉरी कह दूंगा।

मैं कम्प्यूटर पर बैठा हुआ कुछ देर तक तो उनकी गोल गोल गाण्ड देखता रहा। बस ऐसा लग रहा था कि उनका पेटीकोट उठा कर बस लण्ड गाण्ड में घुसा दूँ। बस मन डोल गया और मैंने आखिर हिम्मत कर ही दी।

‘राज क्या देख रहे हो ?’ ‘मामी, बस यूँ ही…. आप अच्छी लगती हैं !’

वो मेरे पास आ गई और सफ़ाई के लिये मुझे हटाया। मैं खड़ा हो गया। अचानक ही मेरे में उबाल आ गया और मैं मामी की पीठ से चिपक गया और लण्ड चूतड़ों पर गड़ा दिया।
भाभी ने भी जान कर करके अपने चूतड़ मेरे लण्ड से भिड़ा दिया। पर उनके नखरे मेरी जान निकाल रहे थे।

‘राज, हाय ! क्या कर रहा है !’

‘मामी अब नहीं रहा जा रहा है..’ मामी ने अपनी गाण्ड में लण्ड घुसता मह्सूस किया और लगा कि उसकी इच्छा पूरी हो रही है। वो पलटी और और मुझे अपनी बाहों में कस लिया और अपनी भारी चूंचियाँ मेरे शरीर से रगड़ दी।

‘हाय, पहले क्यूँ नहीं किया ये सब?’ और मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मुझे भी साफ़ रास्ता मिल गया। मेरी हिम्मत ने काम बना दिया।

‘आप इशारा तो करती, मेरा तो लण्ड आपको देखते ही फ़ड़क उठता था, लगता था कि आपको नंगी कर डालू, लण्ड घुसा कर अपना पानी निकाल दूँ !’

‘कर डाल ना नंगी, मेरे दिल की निकाल दे, मुझे भी अपने नया ताजा लण्ड का स्वाद चखा दे रे !’ भाभी का बदन चुदने के लिये बेताब हो उठा था।

‘मामी, तुम कितनी मस्त लग रही हो, अब चुदा लो ना, मेरा लण्ड देखो, निकालो तो सही बाहर, मसल डालो मामी, घुसा डालो अपनी चूत में !’ मेरा लण्ड तन्ना उठा था।

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