भाभी की जबरदस्त चुदाई होटल में-2

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भाभी की पैन्टी को सूंघ कर मुठ मारने में बहुत मजा आया, अब मेरा मन उनकी चुदाई को हुआ और Hindi Sex Stories की इस घटना में मुझे भाभी की चुदाई का मौका मिल भी गया..

अब तक आपने पढ़ा..
भाभी के साथ मेरा रायपुर जाना तय हुआ, जगदलपुर से रायपुर 500 किमी दूर है!

सिर्फ एक ही ट्रेन है जो रात को 8 बजे निकलती है और अगले दिन सुबह 7 बजे रायपुर पहुँच जाती है।

वही ट्रेन अगले दिन रात को 8 बजे रायपुर से निकलती है और सुबह 7 बजे जगदलपुर आ जाती है।

हमारा रात को निकलना तय हुआ और दूसरे दिन पहुँचकर काम पूरा होने के बाद, उसी रात को वापस लौटना था।

भैया को कल निकलना था, अब सब तैयारी हो गई और मैं क्या बताऊँ दोस्तो, मैं तो बहुत खुश था।

यह सोच रहा था, कि मौका तो मिलेगा ही नहीं लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था।

अब आगे..
रात को भैया हमें छोड़ने स्टेशन आए और हम अपने सीट पर चले गए।

उसके बाद भैया वापस चले गए, क्योंकि उन्हें बिल्कुल सुबह निकलना था।

हमारा टिकट एसी फर्स्ट क्लास में था लेकिन जल्दबाज़ी के कारण रैक मिला था और हमें एक केबिन में एक ही सीट पर बैठना करना था।

हम अपने केबिन में जाकर बैठ गए और एसी फर्स्ट क्लास में केबिन होते है। उसमें कोई दूसरा आपकी केबिन में नहीं आएगा।

हमने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे, टीटी भी टिकट चेक करके जा चुका था। तभी मैंने भाभी से कहा- भाभी आप सो जाइए मैं यहीं बैठ जाता हूँ।

ठंड बहुत ज़्यादा थी! भाभी ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी और ऊपर से स्वेटर भी पहना था। तभी
भाभी ने कहा- नहीं रवि सीट काफ़ी बड़ा है, हम दोनों सो सकते हैं।

मैं तो यही चाहता भी था! तभी मैंने कहा- जी भाभी।

मैंने कहा- पहले अन्दर मैं सोता हूँ, फिर उसके बाद आप मेरे आगे सो जाना। इस पर भाभी ने हाँ में सर हिलाया, अब मैंने अपना जैकेट उतार दिया और लोवर में सो गया।

भाभी ने भी अपना स्वेटर उतार दिया और कहा- हे भगवान्!

रवि मैंने कहा- क्या हुआ भाभी

तब उन्होंने बताया कि अपना नाईटी लाना भूल गई है!

तब मैंने कहा- कोई बात नहीं भाभी! आप साड़ी में ही सो जाओ, अब भाभी मेरे आगे सो रही
थी और हमने एक ही कंबल ओढ़ रखा था।

ठंड का मौसम था! रात के एक बजे चुके थे। ट्रेन अपनी पूरी रफ़्तार में थी और भाभी भी गहरी नींद में सो रही थी।

सेक्स में चूर भाभी के साथ सोने का मजा

मुझे कहाँ नींद आने वाली थी! तभी मैंने देखा, कि भाभी गांड बिल्कुल मेरे लण्ड के सामने है और मेरा
लण्ड उसमें समां जाने के लिए फुँफकार मार रहा है।

मुझे तो डर लग रहा था! तभी मैंने अपने एक हाथ से भाभी को, साड़ी के नीचे हाथ डाल दिया और धीरे धीरे साड़ी को जाँघो तक सरका दिया।

उनकी जाँघो को सहलाने लगा, लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा था और मज़ा भी बहुत आ रहा था। क्या बताऊँ दोस्तो? कितना मज़ा आ रहा था!

यह तो वही जानता है, जिसने अपनी सग़ी भाभी को चोदा होगा। तभी मैं भाभी से और सट गया और उन्हें अपने से चिपका लिया।

वो अभी भी नींद में थी और मैंने धीरे धीरे उनके ब्लाउस के दो बटन भी खोल दिए। अब उनकी चूचियों को सहलाने लगा।

भाभी के जिस्म की गर्मी पाकर मेरा लण्ड पूरे जोश में था, और ऐसा करते-करते सुबह के 4 बज गए। तभी भाभी थोड़ी सी हिली और बस क्या था? मेरे लण्ड ने पिचकारी मार दी।

मैं क्या बताऊँ दोस्तो! मेरे लण्ड से इतने वीर्य निकला जितना पहले 4 बार मुठ मारने से निकलता है और मुझे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था।

मैं यही सोच रहा था कि जब मैं भाभी को चोदुंगा तो कितना मज़ा आएगा और मुझे कब नींद आ गया मुझे पता ही नहीं चला।

अब सुबह के 6 बज रहे थे, भाभी उठ रही थी तभी मेरी भी नींद खुल गई और अभी भी मेरा एक हाथ भाभी की खुली जाँघ पर दूसरा हाथ उनके चूचे पर था।

मैंने सोने का नाटक किया और मैंने देखा, कि भाभी उठी और उन्होंने धीरे से मेरा हाथ हटाया और अपनी साड़ी और ब्लाउज ठीक किया।

उन्हें लगा कि शायद, मैंने ठंड की वजह से अपना हाथ उनके चूचे और जाँघो पर रख दिया है। अब उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और मुझे उठाया।

वो मुझसे बोली- हम पहुँचने वाले है। मैं भी उठ गया और अब हम रायपुर पहुँच चुके थे।

तभी मैंने भाभी से कहा- भाभी ऑफिस तो 10 बजे के बाद ही खुलेगा। हम किसी होटल में चलते है और वहीँ से नहा धोकर ऑफिस चलेंगे।

भाभी को यह ठीक लगा और उन्होंने कहा- ठीक है।

अब हम एक होटल में गए तो उसने हमें कमरा देने से माना कर दिया, क्योंकि उसने हमसे हमारा रिश्ता पूछा, तो मैंने कहा- देवर भाभी!

उसने कहा, कि एक मर्द और औरत को सिर्फ़ तभी कमरा मिलेगा। जब वो जोड़ी हो और रिलेशन प्रूफ के लिए कोई आईडी दिखाना पड़ेगा।

मैं समझ गया कि ये लोग होटल में सेक्स रैकेट चलाते हैं, जिसके कारण हमें कमरा नहीं मिल रहा है।

मैंने भाभी को सारी बातें बता दी तो उन्होंने कहा- तो फिर कैसे करेंगे?

मैंने कहा- एक आईडिया है! लेकिन हमें एक झूठ बोलना पड़ेगा।

तो उन्होंने पूछा- क्या?

मैंने कहा- हमें यह बोलना पड़ेगा कि हम पति पत्नी है, इस बात पर वो हँसने लगी और हालात को देखते हुए उन्होंने हाँ कर दी।

हम एक दूसरे होटल में गए और वहाँ मैंने अपना नाम रवि बताया और आईडी भाभी की आईडी से प्रूफ भी हो गया कि हम पति पत्नी है।

चूँकि, मैं और मेरे भैया एक जैसे दिखते है, तो फोटो आईडी में कोई दिक्कत नहीं हुई।

अब हमें एक सिंगल बेड कमरा मिल गया था।

वो कमरा काफ़ी खूबसूरत था और शायद हनीमून जोड़ी के लिए था।

मैंने भाभी से कहा- भाभी आप नहा लीजिए और बाद में मैं नहा लूँगा।

हम चलेंगे भाभी ने कहा- ठीक है।

भाभी नहा कर आ गई और अब मैं नहाने चला गया।

भाभी की पैन्टी सूंघ मुठ मारने का मजा

मैंने देखा कि बाथरूम में भाभी की पैन्टी और ब्रा सुख रही है।

मैंने उसे सूँघा तो क्या बताऊँ दोस्तो, ऐसा लगा की मानो मैं जन्नत में आ गया हूँ और मेरा लण्ड खड़ा हो गया।

मैंने फिर भाभी के नाम की मुठ मारी और अपने धड़कते लण्ड को शांत किया।

जब मैं नहा कर बाहर आया तो मैंने देखा की भाभी तैयार हो चुकी है।

उन्होंने काले रंग का ब्लाउज और साड़ी पहनी थी और बिल्कुल अप्सरा लग रही थी।

कुछ देर में मैं भी तैयार हो गया और हम जाने के लिए बाहर निकले।

मैंने देखा, कि लोग हमें घूर रहे है तो मैंने भाभी को अपनी तरफ़ खींच लिया। उनकी कमर को
पकड़ लिया।

अब भाभी समझ गई कि मैं ऐसा इसलिए कर रहा हूँ कि किसी को शक ना हो।

अब हम कलेक्टरिएट ऑफिस के लिए निकल गए क्योंकि सुबह के 11 बज चुके थे।

जब हम ऑफिस पहुँचे तो मैंने देखा कि वहाँ काफ़ी लोग है और हमें जिससे काम था। उसका ऑफिस अन्दर था।

मैंने भाभी से कहा- भाभी आप यहीं पर इंतज़ार कीजिए, मैं पता करके आता हूँ।

भाभी ने कहा- ठीक है!

मैं अन्दर चला गया और मैंने सोचा, कि क्यों ना एक प्लान बनाया जाए और भाभी को जबरदस्त तरीके से चोदा जाए।

भाभी को चोदने हेतू बनाया योजना

तभी मेरे दिमाग़ में एक तरकीब आया और मैं बाहर आया और मैंने कहा- भाभी एक दिक्कत है!

उन्होंने पूछा- क्या दिक्कत है!

मैंने बताया, कि जिस आदमी से हमें काम है, वो अभी छुट्टी पर है और अब हमें वो सोमवार को मिलेगा और आज शुक्रवार है।

भाभी ने कहा, कि अब क्या करें और हम यही सोचते सोचते बाहर आ गए।

तभी भैया का फोन आया और उन्होंने कहा, कि अभी कुछ दिन उनका मोबाइल रोमिंग नेटवर्क के कारण बंद रहेगा तो मैं उन्हें कॉल करने के लिए परेशान ना करूँ।

उन्होंने जल्दी से फोन काट दिया, मैं समझ गया कि अब भाभी को चुदने से कोई नहीं बचा सकता।

तभी मैंने भाभी को बताया कि भैया से अब 10 दिन तक बात नहीं हो सकती और अब हम सोचने लगे की क्या करना चाहिए।

तभी भाभी ने कहा कि हम 3 दिन यहीं रुक जाते है, कमरा तो मिल ही गया है और इन 3 दिनों में रायपुर घूमते है।

यह सुनकर तो जैसे मेरी लौटरी ही निकल गई क्योंकि मैं भी तो यही चाह रहा था।

क्या हुआ आगे? क्या मैं भाभी की चुदाई को अंजाम दे पाया! पढ़िए कहानी का अगला अंक और अपने विचार हमें जरुर भेजें! मेरा ईमेल आईडी है।
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भाभी साड़ी में ही सो गई तो मैं उनकी जाँघों को सहलाते हुए, उनकी ब्लाउज के दो बटन खोल चूचियों को सहलाने लगा। मुझे बहुत मजा आया तो भाभी को पकड़कर मैंने आगे पीछे हिलकर अपना वीर्य छोड़ दिया और मुझे बहुत आनन्द आया। मैं भाभी को हर हाल में चोदने के बारे में सोचने लगा और इससे आगे का हाल Hindi Sex Stories के अगले कड़ी में जाने..

Written by

akash

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