चाची की चूत चुदाई – 1

(Chachi Ki Chut Chudai- 1)

This story is part of a series:

ट्यूशन पढ़ाने जबसे अपनी चाची के घर जाने लगा तब से चाची की मदमस्त जवानी को देखकर मेरा मन मचलने लगा जिसकी meri sex stories आपके लीये फ़रमाया हूँ..

हैलो दोस्तों कैसे हो आप सब ? मेरा नाम शाहिद है मेरी उमर 21 साल है और बिल्कुल कुंवारा हूँ, मेरा शरीर काफी गठीला है।
अब मैं सीधा अपने मुद्दे की बात बताता हूँ। ये तब शुरु हुआ जब मैं 12 पास करके छुट्टियां मना रहा था, मुझे मेरे चाचा ने कहा कि तु खाली बैठा रह्ता है मेरी बेटी को पढा दिया कर।

उनकी लडकी दूसरी क्लास में है। मुझे बहुत बोरिंग लगा इसलिये मैने उन्हें मना कर दिया। पर बाद में उन्होंने मेरे पापा से कहा इसलिये मुझे मानना पडा और मैने हाँ कर दिया।
ये मेरी पहली कहानी है इसलिये गलतियों को ध्यान न दें। मैं पहले दिन पढाने गया जब मैने वहाँ पहुँच कर दरवाज़ा खट्खटाया तो मेरे तो तो मेरी चाची मेरे सामने खडी थी।

मै उन्हें देख कर मुस्कुराया और सलाम किया बदले में उन्होंने भी स्माइल पास किया और अन्दर आने के लिये कहा। मै अंदर जाकर सोफे पे बैठ गया और उनकी लड्की को पढाने लगा। मुझे वहां बिल्कुल भी मज़ा नही आया हालांकी वहाँ मुझे चाय बिस्किट पूरा नाश्ता मिला।

दूसरे दिन मैं फ़िर गया और चाची ने दरवाज़ा खोला और मैं उनको देख कर दंग रह गया क्यूंकि उन्होंने बहुत ही टाइट सलवार कमीज़ पहन रखा था, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थीं, जब उन्होने अंदर आने के लिये कहा तब मुझे होश आया और मैं शर्म से पानी पानी हो गया मैने उनका ऐसा रूप कभी नहीं देखा था ।

हालांकि मेरे दिमाग में उनके बारे में कोई गलत ख्याल नही था पर वो आज मुझे अच्छी लग रही थीं। मैं सोफे पे बैठ कर उनको चोर नज़रों से देख रहा था और मैंने नोटिस किया कि वो भी मुझे कभी कभी देख रही थीं और फ़िर मुझे एक स्माइल पास किया बदले मे मैं भी मुस्कुराया।

तभी वो मेरे पास चाय लेकर आयी और जैसे ही टेबल पर रखने के लिये झुकी मेरी तो आँखें फ़टी कि फ़टी रह गयीं क्यूंकि मेरी नज़र उनके स्तन पर पड़ी जो बिल्कुल गोरे थे मेरी तो सांस ही रुक गयी थी।

चाय रखके वो मुझसे बोलीं- शाहिद बेटा चाय पियो और कुछ चाहिये तो बताओ शर्माना मत। मैंने कहा ओके और मैं पढाने में व्यस्त हो गया लेकिन मेरा ध्यान अभी भी उनके बूब्स पे था। ऐसे बूब्स मैने सिर्फ पोर्न मूवीज़ में देखा था, बिल्कुल गोल और बड़े।

मैं जब भी उनके घर जाता मुझे चाचा नही मिलते थे क्यूंकि उनकी ड्यूटी सुबह 9 बजे से रात 7 बजे तक होती थी और उनको घर आते आते 9 बज जाते थे, इसलिये जब मैं पढाने जाता तो चाची अकेली रहती थीं।

मैं आपको अपनी चाची के बारे में तो बताना ही भूल गया उनकी लम्बाई 5 फीट 1 इंच होगी, रंग बिल्कुल गोरा, साइज़ 36-34-38 वो दिखने में बिल्कुल कयामत लगती है।
मैं एक दो बार उनके साथ बाहर भी गया हूं, जब वो बहार निकल्तीं हैं तो सब उन्हीं को घूरते रहते हैं। खैर मैने अपना पढ़ने का काम खत्म किया और घर चला आया।

आज पहली बार मैंने उनके बारे में गलत सोचा पर मुझे अच्छा लग रहा था। मैं बार बार उनके बूब्स के बारे में सोच रहा था और मेरा लंड भी सख्त हो गया तो उसको शांत करने के लिये मैंने मुट्ठ मारी तब जाकर सुकून मिला।

अब मुझे वहाँ आना जाना अच्छा लगने लगा और मैं रोज़ वहां जाने लगा, मेरा पढाने में ध्यान कम लगने लगा और मैं ताक झांक में ज़्यादा रहने लगा उनकी लडकी अभी बहुत छोटी थी, इसलिये उसको इस बारे में कोइ जानकारी नही थी।

चाची आज फ़िर चाय और बिस्किट लेकर आई और टेबल पे रखने लगी। मैंने फ़िर उनके बूब्स देखे आज उन्होने लाल रंग की ब्रा पहन रखी थी, फ़िर मैंने नोटिस किया की ये सब करते हुए वो मुझे देख रही थीं, मैं बहुत डर गया और नीचे देखने लगा।

मेरी चोरी पकडी जा चुकी थी फ़िर मैंने उनकी तरफ देखा तो पाया कि वो मेरी तरफ अब भी देख रही थीं फ़िर मैं जल्दी जल्दी पढा कर घर आ गया, मुझे डर था कि चाची मेरी शिकायत न कर दें इसलिये मैं अगले दिन नही गया।

एक दिन बाद मेरे पास चाची ने फ़ोन किया और पूछने लगी की आये क्यूँ नही तो मैंने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया, वो ये सुन कर हंसने लगीं मैने पुछा कि क्या हुआ लेकिन उन्होने कुछ नही बताया और कल के बारे में पूछने लगी कि आओगे या नही तो मैने हाँ कह दिया।

मैं अगले दिन फ़िर पहुंचा चाची ने गेट खोला तो मैं हंस कर उनसे मिला और अन्दर जाकर बैठ गया। आज वो घर की साफ सफाई में व्यस्त थीं।

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