चाची की चूत चुदाई– 2

(Chachi Ki Chut Chudai- 2)

This story is part of a series:

चाची के ओर से मौन इशारा मिल चुका था अब मैं मौके की तलाश में था meri sex stories को अंजाम तक पहुँचाने के लीये जिसके लीये मैं पहल चाची से बिंदास किया..

अब तक आपने पढ़ा..

चाची- बेटा उसमें कुछ किताबें हैं तुम्हारे चाचा की, अगर तुम्हारे काम की हो तो ले जाओ
मैं- ओके चाची थेंक्यू और मैने एक छोटी वाली बुक ले ली और नीचे आ गया ।
मेरा लंड अब भी खडा था मैं चुपचाप सोफे पे बैठ गया। चाची मुझे बार बार घूर रही थीं।

अब आगे..

थोडी देर बाद वो मेरे बगल में आकर बैठ गईं और मुझसे पूछने लगी की कोई किताब है, तुम्हारे काम की तो मैने कहा ‘हाँ..’ बस एक किताब है वो मैंने ले ली है।
चाची- अगर और किताब चाहिये तो ले जाओ अब तुम्हारे चाचा को ज़रूरत नहीं है।

मैं- ठीक है बाद में ले जाउंगा। उन्होंने मेरा हाथ पकड लिया और बोली ठीक है, उनका हाथ बहुत गरम था और वो धीरे धीरे सह्ला भी रही थीं।

मेरी चाची 38 साल की हैं और उनके सिर्फ एक लडकी है जो शादी के बहुत सालों बाद पैदा हुई थी, चाची मेरे इतना करीब बैठी थीं कि उनकी जांघ मेरे जांघ से बिल्कुल चिप्की हुई थी और उनका जांघ बहुत गरम लग रहा था मुझे।

मैं अब समझ चुका था कि चाची को चुदाई की आग तड्पा रही है, बस मुझे गरम चूत पे अपना लौड़ा मारना था। झट से मैंने भी उनका हाथ पकड लिया और सहलाने लगा।
तभी उनकी लडकी मुझसे मैथ्स का सवाल पूछने लगी और मैं सब छोड कर पढाने लग गया।

थोडी देर बाद वो चाय लेकर आईं और काफी देर तक टेबल सही करने के बहाने से मेरे सामने झुकी रहीं, क्या गोल गोल सफेद रसगुल्ले थे मंन तो यही कर रहा था कि खा जाऊं।
हम दोनों एक दूसरे को ऐसा करते हुए देख रहे थे, फ़िर वो चाय रख कर किचन मे चली गईं।

मैं भी पीछे पीछे पहुँच गया जब चाची ने मुझे अपने साथ खडा पाया तो पूछा- क्या चाहिये?
मैं- चाहिये तो बहुत कुछ पर अभी सिर्फ पानी पिला दीजिये। वो- जो चाहिये खुल के मांग लो शर्माना मत और वो पानी निकालने के लिये झुकी।

मैं उनके बिल्कुल पीछे खडा था इसलिये उनके झुकते ही मेरा लंड उनकी गांड से टच हो गया,
वो कुछ नही बोली बल्कि पानी निकालने में ज़्यादा समय लगाने लगीं तो मैं समझ गया कि चाची को मज़ा आ रहा है, तो मैंने एक हाथ उनके गांड पर रखा और दबा दिया।

वो झट खडी हुईं और मुझे पानी दिया और कहने लगीं तुम्हें पानी कि बहुत ज़रूरत है और एक शरारत भरी मुस्कान दी, मैं समझ गया कि चाची भी चुदने के लिये तैयार हैं।
बस पहल करने से डरती हैं। मैंने एक प्लान बनाया कि चाची को बातचीत से जितना खोल पाऊँगा उतना खोलुंगा ताकि ये अपने मुंह से बोल कर मेरा लंड मांगें।

मैं घर आ गया और चाची के बारे में सोचता रहा फ़िर मैने वो किताब निकाली जो वहां से लाया था, उस किताब मे सब लोग विदेशी थे उसमे सारी लडकियाँ गोरी चमड़ी वाली जिनको देखते ही मेरा लंड खडा हो गया।

उस किताब में सब चुदाई के आसन थे, कोइ झुका के चोद रहा है कोई बिठा के चोद रहा है, कोई लिटा के चोद रहा था कोई गोद मे लेकर चोद रहा था मुझे सबसे अच्छ लगा जो कुतिया बना के चोद रहा था। फ़िर मैं मुट्ठ मार के सो गया।

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