विधवा मामी की चूत की वासना

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दोस्तो.. Meri Sex Story में मेरी यह पहली सेक्स कहानी है।
मेरा नाम प्रदीप है। मैं कुकमा, गुजरात से हूँ। मैं 18 साल का हूँ.. मेरा ऊँचाई साढ़े छह फुट और मेरा रूप थोड़ा सा गोरा और लंड काफी लंबा और मोटा है।

मेरे तीन मामा हैं, सभी पास-पास में ही रहते हैं। मैं जब भी अपनी ननिहाल जाता तो अपनी बड़ी मामी विद्या के पास ज्यादा रहता था।

मेरे मंझले मामा के गुजर जाने के बाद वो अकेली रहती थीं। मैं बचपन से ही उनके पास रहता था वो मुझे बहुत प्यार करती थीं। छोटी उम्र में वे ही मुझे नहला देती थी.. तब वे मेरी बड़ी सी लुल्ली को सहलाती थी तो मुझे बहुत अच्छा लगता था।

वे चूंकि कम उम्र में ही विधवा हो गई थीं और उनके कोई संतान भी नहीं है। शायद इसलिए उनकी कामेच्छा मेरी बड़ी सी लुल्ली देख कर भड़क जाती थी। वो लगभग 36 साल की हैं.. पढ़ी-लिखी हैं और दिखने में बहुत गोरी हैं।

अब मैं जवान हो गया तो उनके बड़े मम्मे और बड़ी गांड देखते ही मेरा लण्ड पैन्ट फाड़कर बाहर आने को मचल जाता था।

बात तब की है.. जब मुझे एक एग्जाम देने अहमदाबाद जाना पड़ा। उसी समय उनको भी किसी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने अहमदाबाद जाना था।
मुझे सात दिन तक उधर रहना था और उनको भी पांच दिन तक वहीं रहना था।

उन्होंने कहा- इधर सात दिन के लिए एक होटल में कमरा बुक कर लेते हैं।
मेरे मन में उनके साथ मजे करने का ख्याल आया, मैंने तुरंत एक अच्छे होटल में कमरा बुक कर लिया।

अगले दिन हम दोनों साथ में रवाना हुए। शाम के पांच बजे होटल पहुँच कर रूम की चाभी लेकर कमरे में गए। उसके बाद थोड़ी देर आराम करके वो नहाने चली गईं, मैं पढ़ाई करने बैठ गया।

तभी थोड़ी देर में आवाज आई- प्रदीप, जरा तौलिया देना तो।
मुझसे रहा नहीं गया, मैं जल्दी से तौलिया लेकर मुँह मोड़ कर खड़ा हो गया।
तभी उनकी आवाज आई- जा तू मुझे शरीर को कोरा करना है।

मैं चला गया.. फ़िर मामी घाघरी और ब्लाउज पहन कर बाहर आ गईं, वो बोलीं- तुझे नहीं फ़्रेश होना.. चल मैं तुझे नहला देती हूँ।
मैं बोला- चलो ठीक है.. आज आपके हाथों से ही नहाता हूँ।

उन्होंने मेरे कपड़े निकाले और बोलीं- तू मेरे कपड़े निकाल दे।
मैंने कहा- आप तो अभी नहा कर गई हो।
उन्होंने बोला- निकाल भी दे..

अभी मैं अंडरवियर में था और मामी ने हँसते हुए बोला- अंडरवियर इतना क्यों जोर से फूल रहा है?
मेरे तो छक्के छूट रहे थे।

फिर मैंने उनके नग्न जिस्म को देखा तो चूत के पास बालों का जंगल था.. जिस कारण से उनकी चूत दिख ही नहीं रही थी।
मैंने बोला- आप इन्हें काटती नहीं हो?
वो बोलीं- हटाने का टाइम ही नहीं मिलता.. आज इन्हें तुम हटा दो।

मैंने उनकी झांटों को साफ़ किया, बाद में उन्होंने खुद को पानी से साफ किया तो उनकी चूत चमक उठी।
मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था, वो हँसते हुए मुझे नहला कर कपड़े पहनाने लगीं।

अब वो बोलीं- अब तो मैं तुम्हारे साथ ही घर जाऊँगी.. इसलिए तुम एक्जाम में ध्यान दो। मुझे भी कल की तैयारी करनी है.. इसल़िए कल सेन्टर से आने के बाद तुम्हें एक चीज बारे में बताऊँगी।

फिर हम दोनों ने खाना आर्डर किया। इसके बाद मामी 12 बजे तक सो गईं। मैं भी थोड़ी देर बाद सो गया। सुबह हम दोनों साथ में निकले। मैं एग्जाम दे कर वापस आया.. तो देखा मामी पेट पर हाथ रख कर सो रही थीं।

मैंने बोला- क्या हुआ.. मामी कैसा रहा आपका इन्टरव्यू?
वो बोलीं- ठीक हुआ।
मैंने पूछा- आपको क्या हुआ.. कुछ प्रोब्लम है?
बोलीं- हाँ.. कमर में दर्द हो रहा है.. तू तेल लगा दे।

मैं बैग में से तेल निकाल कर लाया और बोला- बताइए.. किधर लगाऊँ?
उन्होंने साड़ी निकाल कर कहा- कमर पर लगा।

मैं धीरे-धीरे उनके मदमस्त गोरे जिस्म पर मालिश कर रहा था। तभी मेरा हाथ उनकी गांड की तरफ गया।
वो बोलीं- क्या कर रहा है?
मैंने कहा- हाथ फिसल गया।

कुछ देर बाद मालिश करवाने के बाद वो शायद गर्म हो गई थीं।
तो उन्होंने लैपटॉप निकाला और एक ब्लू फिल्म लगा दी।

उन्होंने मुझसे कहा- क्या कभी ऐसी फिल्म देखी है.. या कभी किसी के साथ ऐसा किया है?
मैं बोला- फिल्म तो देखी है पर कभी किसी के साथ किया नहीं है।
मामी- फिल्म देख कर क्या करता था?
मैं- बस मुठ्ठी मार लिया करता हूँ।

मामी लैपटॉप को साइड में रख कर मेरे होंठों को चूसने लगीं.. मैं भी चूसने लगा फिर मैंने उनकी पीठ पर हाथ डाला और वो भी मेरे जींस के ऊपर हाथ फेरने लगीं। कुछ ही पलों में उन्होंने मेरी जींस को खोल कर निकाल दिया। मैंने भी उनके ब्लाउज को निकाल दिया।

आह्ह.. क्या बड़े-बड़े मम्मे थे और मैं उनके बादाम के रंग जैसे मम्मों से खलने लगा।

मामी बोलीं- ये खेलने की चीज नहीं.. इन्हें चूस.. तब मजा आएगा।

मैं तो कुत्ते की तरह मम्मों को मुँह में भर कर चूसने और काटने लगा।

उन्होंने मेरी अंडरवियर में हाथ डाल दिया और मेरे लंड को सहलाने लगीं।

फिर उन्होंने मेरे अंडरवियर को निकाल दिया। मैंने भी उनकी घाघरी निकाल दी। अब वो सिर्फ पैन्टी में थीं। अभी वो मेरे लंड को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने में मस्त थीं। मैं लंड चुसाई से थोड़ी ही देर में झड़ गया। मामी मेरा पूरा माल चाट कर पी गईं।

फिर मामी ने 69 होने को बोला। अब मैंने भी पैन्टी को निकाल कर फेंक दिया।

क्या बताऊँ.. उनकी चिकनी चूत ऐसी थी जैसे किसी ने आज तक उसमें लंड डाला ही न हो। मैंने उनकी चूत में उंगली डाली तो वो ‘आह्ह्हह.. शिह्ह्हह..’ करने लगीं।

फिर मैं चूत को चूसने लगा और जीभ से उन की चूत को चोदने लगा। थोड़ी देर में तो वो भी झड़ गईं। उनकी चूत का पूरा रस मैं पी गया।

कुछ देर तक लगातार चूत चाटते हुए मैंने उनका पूरा साफ़ कर दिया इस दौरान मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था और उनकी चूत भी दोबारा गरम हो गई थी।

अब वो बोलीं- चूत को चोदेगा भी या चूसता ही रहेग़ा?

ये बोल कर उन्होंने अपनी टांगें किसी रंडी की तरह फैला दीं। मैंने भी देर ना करते हुए उनकी चूत के मुहाने पर अपना मूसल लंड रख दिया.. कुछ देर चूत की दरार के ऊपर लंड घिसता रहा। फ़िर चूत के अन्दर थोड़ा सा पेला।

तो वो बोलीं- आहिस्ता से डालना.. पूरा एकदम से न घुसेड़ देना।

मैंने मुंडी हाँ में हिलाते हुए एक झटका लगाया और अपना आधा लंड उनकी लपलपाती चूत में घुसेड़ दिया।

वो चीख पड़ीं- अह्ह्ह्ह्ह..

मैं उनकी चीख को अनसुना करते हुए एक और झटका मार दिया और उनकी आँखों में से आंसू आ गए। मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा। उनकी चीख पूरे कमरे में गूँज रही थी।

‘आआह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह्ह..’

फिर वो भी गांड उठाते हुए ऊपर-नीचे होने लगीं। दस मिनट के बाद वो झड़ गईं और अब मैं भी झड़ने वाला था। मैंने बोला- किधर निकालूँ?

वो बोलीं- अन्दर ही डाल दे।

मैं चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर पड़ा रहा। थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम में गए।

उन्होंने पूछा- मजा आया ना प्रदीप?
मैंने कहा- हाँ

फिर दोनों ने एक-दूसरे को साफ़ किया.. बाहर आकर बिस्तर पर लेट गए और कुछ देर बात करके हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपट कर सो गए।

रात को एक बजे मामी ने मेरे लंड को सहलाया। मैं जाग गया.. और मेरा मूसल लंड भी खड़ा हो गया। मैंने भी उनकी चूत को सहलाया और बोला- मामी अब तुम घोड़ी बन जाओ।

वो बोलीं- मैं गांड तो मरवानी चाहती थी.. तेरा भी मन है तो चल अब आ जा मेरे घोड़े.. सवार होजा।

उनकी गांड तो इतनी कड़क थी कि उंगली भी नहीं जा रही थी।

मामी बोलीं- मेरे बैग में से मक्खन निकाल कर लगा ले।

मैं उनकी गांड में मक्खन लगाकर गांड को चाटने लगा।

फिर मैंने थोड़ा सा और मक्खन लिया और अपने लंड पर लगा लिया।

अब मैं उनकी गांड में लौड़ा लगा कर डालने की कोशिश करने लगा।

मैंने सुपारा गांड में फंसा दिया और एक झटका लगा दिया। मेरा आधा लंड उनकी गांड में घुस गया।

वो एकदम से चिल्ला पड़ीं- अह्ह्ह.. अह्ह्ह.. मैं लंड को डाल कर रखा। थोड़ी देर बाद वो ऊपर उठ कर मेरा साथ देने लगीं।

मैंने भी उनकी गांड मारने की स्पीड बढ़ा दी और कुछ पलों बाद अपना सारा माल उनकी गांड में छोड़ दिया। झड़ जाने के बाद मैं उनके ऊपर पड़ा रहा।

फिर हम दोनों उठे और बाथरूम में गए। हम दोनों एक साथ नहाए और फिर सो गए।

इन 7 दिन में मैंने उन्हें 15 बार चोदा। उसके बाद उनकी मदद से मैंने बहुत सी लड़कियों को चोदा।

आप सभी को Meri Sex Story कैसी लगी.. मुझे जरूर बताइएगा।
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Written by

प्रदीप

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