ग़रीबी का फ़ायदा उठाया

(Gareebi Ka Faayda Uthaya )

जिसे कुछ दिन पहले खुश देखा वो महीने भर में दुःख दिखी तो वैसे वक़्त मैंने जब उसे मदद किया तब उसने बदले में मुझे भी कुछ देना चाही और meri sex stories शुरू हुई..

हैलो दोस्तों मेरा नाम अर्जुन है उम्र 23 यह एक सच्ची कहानी है। इस कहानी की सुवत करीब 7 साल पहले हुई होगी जब मैं स्कूल मे पढ़ता था दसवीं क्लास में। मेरा स्कूल 30 Km आना जाना पड़ता था।

तो घरवालों ने मेझे बाइक दिला दी थी Pulsar 150CC तो मेरा आना जाना बाइक पर था तो मैं अपने दोस्तो के साथ घर आता था।

घर आते टाइम हम एक दुकान पर रुकते थे जो की फास्ट फुड की थी हम सब दोस्त डेली घर आते समय उस दुकान पर रुकते थे, उस दुकानदार की शादी हो गयी थी। उसके 4 बच्चे भी थे लेकिन उसकी बीवी एकदम मस्त लगती थी लगता ही नही था की वो चार बच्चों की माँ है।

उसका शरीर काफ़ी भारी था मैं मज़ाक में उस दुकानदार से बोल दिया करता था की उसकी बीवी माल है, लेकिन वो हँसी मे ले जाता था। ऐसे ही चलते चलते मैने बारहवीं कर ली ओर कॉलेज मे चला गया ओर उस दुकान पर जाना भी कम हो गया था।

लेकिन उस दुकानदार से काफ़ी अच्छी दोस्ती थी तो एक दो महीने मे चला जाता था एसे ही कॉलेज भी हो गया ओर मेरी जॉब लग गई और मेरा उस दुकान पर आना जाना ना के बराबर हो गया।

करीब एक साल पहले मैं उस दुकान पर गया तो पता चला की उस दुकानदार का निधन हो गया ओर अब उसकी बीवी दुकान चलाती है मुझे सुन कर काफ़ी दुख हुआ फिर मैने उस दुकान पर जाना ही छोड़ दिया।

एक दिन अपने दोस्तों के साथ स्कूल के दोस्तों से मिलने जा रहा था तो मैं उस दुकान के सामने से गुज़रा तो उस दुकानदार की याद आई सोचा इसकी कुछ मदद कर दूं बेचारी कैसे घर चला रही होगी।

तो मैंने उससे कुछ समान लिए ओर पैसे ज्यादा दे दिए ओर कहा की ज़रूरत पड़ेगी रख लो। फिर दोबारा से आने जाने लगा रहा एक दिन वो बोली की आप इतनी दूर से आते हो तो फोन कर के आया करो कभी दुकान बंद मिले उसने अपना नंबर दिया ओर कहा की सिर्फ़ काम हो तो ही बात करना।

मैं वहाँ से आ गया एक दोस्त को जाने का मन किया तो मैने पहले फोन किया ओर उससे बात की ओर वहाँ चले गये। एक बार उसकी फोन आया मैंने काट कर फोन किया तो वो कुछ दुःखी सी लग रही थी तो वो दुःखी आवाज़ मे बोली।

‘अगर मैं कुछ बोलूँ तो आप बुरा तो नही मनोगे..’ (सच पूछो तो दोस्तो लंड तो इतना सुनते ही खड़ा हो गया था) मैंने कहा बोला क्या बात है तो उसने की मुझे 500 रुपये की ज़रूरत है दे सकते हो?

मैने कहा ठीक है आता हूँ दे दूंगा थोडा टाइम लगेगा आने में, क्योंकि बारिश हो रही थी मैने घर से गाड़ी ले कर निकला ही था की मेरा चचेरा भाई आ गया ओर बोला कहाँ जा रहा है।

मैने उससे सब बताया तो वो साथ चल दिया हम उस दुकान पर पहुँचे ओर कुछ खाने के बहाने मैंने उससे 1500 रुपए दे दिए ओर घर की तरफ चल दिया।

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