वो प्यार था या हवस

(Nangi Chut Vo Pyar Tha Ya Hawas)

क्या आपने पब्लिक प्लेस पर Nangi Chut देखी है? मुझे घूमना-फिरना बहुत अच्छा लगता है क्योंकि घूमने-फिरने के दौरान ही मुझे मेरी जिन्दगी के सबसे हसीन पल मिले हैं।
मैं आपको अपनी रेलवे स्टेशन पर मिली एक लड़की उर्मी के साथ मुलाकात के बारे में बता रहा हूँ.. उसके बाद उसके साथ मेरी मुलाकातें कुछ और ही आगे बढ़ गई।

वो मेरी बाजू वाली सीट पर बैठी थी, उसने छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी, उसने अपनी टांग दूसरी के ऊपर रखी हुई थी।

मैं ट्रेन देखने के लिए उठा, वापिस बैठा तो मेरी नजर उसकी स्कर्ट के अन्दर दिख पड़ी, मैंने देख लिया कि उस लड़की ने स्कर्ट के अन्दर पेंटी नहीं पहनी थी।
उसे यूं इस हालत में देख कर मेरा तो एकदम से लंड खड़ा ही हो गया था. जब उसने मुझे उसकी खुली बुर की तरफ़ निहारते हुये देखा तो वह कामुक तरीके से मुस्कुरा दी.. जिस से मुझे लगा कि अब मेरा मामला आगे बढ़ सकता है।

मैंने उससे वहीं बैठ कर बात करनी शुरू कर दी। चूँकि वो भी मुझ पर आसक्त हो चुकी थी.. तो मस्ती में मुस्कुराती हुई मुझ से बात करने लगी।
जब मेरी ट्रेन आई तो मैंने देखा कि किस्मत से हम दोनों की ट्रेन एक ही थी और हम दोनों को उतरना भी एक ही स्टेशन पर था।

मैं अन्दर से फूला न समा रहा था, मुझे लगा कि शायद मुझे ट्रेन में ही इसकी बुर पर लंड रगड़ने का अवसर मिल जाये।
सफ़र के दौरान वो मुझ से बतियाती हुई मेरी बगल की सीट पर ही आ कर बैठ गई.. कुछ देर के लिए उसकी झपकी भी लग गई तो मैंने उस वक्त उसकी चूची पर भी हाथ फेर दिया.. पर उसने मेरी हरकत का कोई विरोध नही किया।

पर यह मेरी बदकिस्मती रही कि मैं उसकी चूची से आगे न बढ़ सका।

स्टेशन से अपने घर को जाने से पहले मैंने उसका और उसने मेरा नम्बर ले लिया था. मैंने फोन पर बात की और दो दिन बाद ही उसने मुझसे बात करके चाय पर बुलाया।

उतावलेपन में मैं आधा घण्टा पहले ही उसके घर पहुँच गया, उसने मुझे सोफे पर बिठाया और ‘मैं अभी आई’ कह कर चली गई।

मैं टीवी देखने लगा, वो शायद नहाने गई थी। वो जब बाहर आई, तो मैं उसे देखता रह गया, वो सिर्फ तौलिए में थी, वो पानी में भीगी हुई कोई अप्सरा लग रही थी।

वो अपने कमरे के दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई।
मैं टीवी छोड़कर उसके पास चला गया और उसकी गीली जुल्फों से खेलने लगा। कुछ ही पलों में रोमांच बढ़ गया और हम दोनों उसके कमरे में चले गए और पलंग पर पसर गए।

मेरे हाथ उसकी नंगी और गीली जांघों को स्पर्श कर रहे थे। वो बहुत ही मस्त और कामुक लग रही थी और मेरा मन कर रहा था कि मैं उसको कच्चा चबा जाऊँ।
उसके होंठ प्यासे लग रहे थे। मैंने अपने हाथ उसकी गर्दन पर रखे और उसकी जुल्फों के साथ खेलकर उसके शरीर को कामुक स्पर्श देने लगा।

वो भी अब मस्ती में आने लगी और मेरे हाथ को चूमने लगी। यही सही मौका था और मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके प्यासे होंठों पर अपने होंठ रख दिये।

हम दोनों ही काफी समय से प्यासे थे और आज मौका मिलने पर अपने आपको तृप्त करने चाहते थे। मैंने उसकी होंठों, गर्दन और उसके गालों पर अपने होंठों से चुम्बनों की बौछार कर दी और उसने अपना शरीर को मस्ती में हिलाना शुरू कर दिया।

हम दोनों का शरीर गर्मी में तप रहा था और पसीने से पूरा भीग चुका था। मेरा लंड तो एकदम सीधा खड़ा था। उर्मी ने मेरी पैंट को खोल दिया और मेरे लंड को बाहर निकालकर अपने हाथों में ले लिया और मेरे लंड की मुठ मारने लगी। मुझे उसके हाथों से मुठ मरवाकर मज़ा आ रहा था।

मैंने अपना हाथ उसके पीछे करके, उसका तौलिया खोल दिया.. वो मेरे सामने नंगी हो गई थी।
आह्ह.. वो एकदम काम की देवी लग रही थी.. उसका शरीर बहुत ही सुंदर और कामुक था। उसके शरीर को देखते ही मेरे लंड ने और तेज झटके लेने शुरू कर दिये।

उर्मी ये देखकर हँसने लगी। मैंने आव ना देखा ताव, उसको नीचे पलंग पर धक्का दे दिया और उसकी चूत को चाटने लगा। मेरी जीभ लम्बी होकर उसकी चूत के आस-पास मस्ती में चाट रही थी और उसकी चूत के अन्दर जाकर मस्ती में उसको चाट रही थी।

उर्मी मस्ती में अपनी गांड को हिला रही थी। उसने मेरे बालों से मुझे ऊपर खींच लिया और बोली- अब डाल दो सुकेश… और नहीं सहा जा रहा।

मैंने अपने लंड को उसकी चूत के दरवाजे पर रखा और मस्ती में एक धक्का मार दिया। मेरा लंड सीधा उसकी चूत के आखिर में जाकर टकराया।

वो चिल्ला उठी और मस्ती में अपनी गांड हिलाने लगी। हम दोनों के जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे और पूरे कमरे में ‘ठाप-ठप..’ की आवाज़ गूंज रही थी।

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