डॉक्टर ने चोदा- 1

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कोई मरीज खुद से एक डॉक्टर के साथ चुद कर बच्चा पाने की लालसा पूरी करे वैसी कहानियां आप लोगों ने hindi sex stories में बहुत पढ़ी होंगी तो पेश है एक ऐसी कहानी..

डॉक्टरी के साथ चोदाई

मेरा नाम मोहन है और मैं पेशे से होम्योपैथी डॉक्टर हूँ। विलासपुर के एक छोटे से कस्बे में विगत तीन वर्षों से किराए का मकान और चेम्बर है। मकान मालिक एक माड़वारी का है और वह भी एक कपड़े का थोक व्यापारी है।

मकान के दूसरे तल्ले मे मकान मालिक अपनी पत्नी के साथ रहता है और मुझे पहले तल्ले में रहने के लिए और नीचे चेम्बर के लिये दिया है। चेम्बर में दिन के बारह बजे से शाम के पाँच बजे तक खोलता हूँ।
चेम्बर और अपना कमरा साफ करने के लिये मकान मालिक ने एक दाई को लगा दिया था जिसका उम्र 22-23 साल की है। वो मकान मालिक के यहाँ भी काम करती है। दाई का नाम शमा है और उसका पति मकान मालिक के कपड़ा के दुकान मे काम करता है।

मकान मालिक की पत्नी का भी उम्र 26-27 वर्ष की है और उसको कोई संतान नहीं हुआ था। शमा को कोई संतान नहीं हुआ था।
गोरी बदन की, स्तन तनी हुई, कपड़े के ऊपर से साफ नजर आती थी। मेरा प्रैक्टिस काफी अच्छा चल रहा है क्योंकि होम्योपैथी के साथ साथ अंग्रेजी दवा का प्राथमिक उपचार कर देता हूँ।

मरीजों की संख्या भी काफी अच्छी है। दवा सप्ताह भर के साथ फीस की रकम पचास से सौ रुपया ले लेता था। मकान मालिक भी अपनी पत्नी की दवा मेरे से लेती है पर मैं पैसे नहीं लेता हूँ। शमा सुबह सात बजे मेरा कमरा साफ करने आती है और खाना भी बना देती है।

एक दिन शमा ने कहा– डॉक्टर बाबू, मेरा शादी हुए तीन साल हो गए पर मेरा कोई बच्चा नहीं हुआ। आप तो सब लोगों का इलाज करते हो, मेरा भी इलाज करो न !
डॉक्टर– चेक करना होगा। शमा– इलाज तो बहुत करवाया पर कोई फायदा नहीं हुआ।

आपभी कीजिये। डॉक्टर– आओ, बिस्तर पर लेटो, देखता हूँ। शमा बिस्तर पर लेट गई। मोहन (डॉक्टर) ने पेट दबाया, नाभि को दबाया और बोला– तुम्हें सलवार खोलनी होगी।
शमा– अंदर तो पैंटी भी है, उसे भी खोलना होगा ? मोहन– आधी कम से कम घुटनों तक उतारो तो! शमा ने सलवार और पैंटी को घुटनों तक सरका दिया।

उसकी चूत पर काफी बाल थे। मोहन– बाल को क्यों साफ नहीं करती हो, इसलिए भी जब तुम्हारा पति तुम्हें करता है यह बाल रुकावट करती है। पहले बाल साफ कर लो फिर देखेंगे। शमा– समय नहीं मिलता है दिन भर काम मे लग जाता है और रात मे जाता हूँ तो थक कर सो जाती हूँ और मेरा पति मुझे रोज चोदता भी नहीं है न।

उसके मुंह से “चोदता” सुनकर हैरान हो गया। शमा– साहब, आप ही साफ कर दो ना ! मोहन – फिर तो तुम्हें पूरा सलवार उतारना होगा ? शमा– ठीक है, उतार दीजिये, इलाज की जरूरत है तो कोई बात नहीं। मोहन का मन डोल गया और सोचने लगा की इसे तो आराम से चोदा जा सकता है।

झट से मोहन से छोटी कैंची ली और चूत पर के बालों को सहलाना शुरू किया। एक एक कर बाल को काटते हुये चुत को सहला भी रहा था। बालों को सहलाने से उसके शरीर में ऐंठन आने लगी और पैरों मे भी हलचल होने लगी।
पंद्रह मिनट के अंदर उसके चूत की सफाई कर दी। इतने में वह पनिया भी गयी तो एक अंगली उसके चूत के छेद पर रगड़ दिया।

शमा– गुदगुदी होती है और शमा ने मेरे अंगुली को दबा दी तो फिसल कर चुत मे घुस गया। शमा – आपका अंगुली तो बुर मे घुस गया है। मोहन तुरंत अंगुली निकाल लिया और बोला– जाओ साबुन से धो लेना और फिर कल देखेंगे। डॉक्टर ने एक पुड़िया दवा भी खाने के लिए दे दी।

शमा काम खत्म कर मालिक के घर कम करने चली गई। दूसरे दिन शमा साड़ी पहन कर आई और फटाफट काम खत्म कर मेरे पास आई और बोली– डॉक्टर बाबू आज चेक नहीं कीजिएगा क्या ? डॉक्टर– हाँ, हाँ, क्यों नहीं, तुम तैयार हो तो मै भी तैयार हूँ।

यह कहकर डॉक्टर ने शमा से कहा – आज तुम्हारे स्तनों को चेक करना है इसलिए चोली को खोलना होगा। शमा – चोली खोलते हुये बोली, बाबू चोली का हुक खुल नहीं रहा है, सहायता कीजिये न, डॉक्टर ने हुक को तोड़ दिया और चोली को खोलते ही उसके दोनों चुचि छलक कर कबूतर की तरह फड़फड़ाकर बाहर आ गयी।

गोल कसी हुई, तनी हुई मुट्ठी भर आकार की, लगा की एक बार दोनों को मसल दूँ पर सहम गया। पूछा– शमा इसको दबाने से दुखता है क्या ? शमा– दबाइएगा तब न मालूम होगा। ‘दबाइए ना..’ डॉक्टर– तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा ना ? शमा – इसमे बुरा की क्या बात है, आपसे इलाज कराना है तो शर्म क्यों ?

मोहन दोनों हाथों से आहिस्ता आहिस्ता दबाने लगा चूची का रंग बदलने लगा शमा के बदन में खलबली होने लगी। मैं शमा के पीछे से चूची दबा रहा था और दबाते हुए उसके नाभि तक हाथों से सहलाता भी था।
शमा को मस्ती आने लगी तो मैं बोला नहीं तुम्हारी चूची में भी कोई बीमारी नहीं है। शमा– फिर कहाँ है ? मोहन– चूत के अंदर देखना होगा। एक पुड़िया दवा फिर दिया और कल के लिए बोला।

अगले दिन शमा आकर बोली– डॉक्टर बाबू आज मन बहुत डोल रहा है, ऐसा लगता है की बुर के अन्दर कुछ हो रहा है शायद दवा का असर है ना।
डॉक्टर– चलो तब साड़ी उतारो देखते हैं। शमा ने साड़ी उतार कर बिस्तर पर चित्त लेट गई। डॉक्टर ने पहले कुछ देर चूचियों को दबाया फिर बुर मे हाथ लगाया तो पनिया गयी थी।

बोला– बुर से तो रस निकल रहा है। डॉक्टर– तुम्हारा पति का अंग कितना बड़ा है ? शमा– यही कोई चार इंच का लंड है। डॉक्टर ने रबर का चार इंच का नकली लंड निकाला और बोला इसको बुर के अन्दर डालो। शमा डालनी चाही पर वह नहीं घुसा।

डॉक्टर ने कहा– यह ऐसे नहीं जाएगा पहले इसको चूस कर थूक से गीला करो तब ना जाएगा। डॉक्टर ने रबर का नकली लंड शमा के मुंह मे घुसाकर आगे पीछे किया फिर बुर के छेद पर दबा दिया। नकली लंड पूरा घुस गया।

डॉक्टर– कितना अन्दर गया है, क्या बच्चे दानी के मुंह को छू रहा है ? शमा– नहीं।
डॉक्टर– तुमको तब सात–आठ इंच का लंबा लंड चाहिए। मेरा लंड तब तक खड़ा हो गया था और तन कर शमा के हाथों मे लग रहा था।
शमा– तब तो मै कभी माँ नहीं बनूँगी ? डॉक्टर– ऐसी भी नहीं है बोलो तो मै अपना वाला लंड दिखाऊं ? तपाक से शमा ने कपड़े के ऊपर से डॉक्टर का लंड पकड़ लिया।

डॉक्टर ने तुरंत पैजामा खोल कर लंड को शमा के हाथों मे पकड़ा दिया। बाप रे काफी बड़ा है ना ! तो देर किस बात की जल्दी से घुसाइए और चोदिए ? ‘मै तो तुम्हें इतना प्यार से चोदूँगा की तुम याद करोगी।’ इसके लिए आज का दिन ठीक नहीं है कल करेंगे ठीक है।

और शमा कुछ देर में मालिक के घर चली गई। दूसरे दिन मैं उसे चोदने के लिए व्याकुल था की शमा सजधज कर आई। उसके हाव भाव से ही लग रहा था की चुदवाने मे वह आतुर है। दरवाजा बंद कर शमा कमरे मे आई तो उसे बाहों मे लेकर चूमना चालू कर दिया।

प्रतिउत्तर मे वह मेरे होंठों को चूसने लगी। धीरे धीरे मैं उसके सलवार के ऊपर से ही चूचियों को दबाने लगा तो वह बोली की सलवार उतार लो न। मोहन ने समीज उतार दी, चूचियाँ तनी हुई थी, निप्पल गुलाबी हो गई थी।

कहानी आगे जारी है।

दोस्तों मैं पेशे से डॉक्टर था और हर मरीज की इलाज करने की मेरी जिम्मेवारी थी और इसी जिम्मेवारी को पूरी करने के लिये मैंने मकान मालिक की नौकरानी शमा की बांझपन दूर करने की सोची अब इससे आगे का हाल इस hindi sex stories के अगले भाग में लाऊंगा.. तब तक आप कहानी के लीये अपने कमेंट्स दें..

Written by

akash

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