डॉक्टर ने चोदा- 2

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शमा की इलाज करने करने के लीये उसे पूरा खुलकर साथ देने को कहा अब hindi sex stories के इस भाग में शमा डॉक्टर की हर बात को मानते हुए चुदाई तक पहुँच गई..

अब तक आपने पढ़ा..

डॉक्टर ने तुरंत पैजामा खोल कर लंड को शमा के हाथों मे पकड़ा दिया। बाप रे काफी बड़ा है ना ! तो देर किस बात की जल्दी से घुसाइए और चोदिए ? ‘मै तो तुम्हें इतना प्यार से चोदूँगा की तुम याद करोगी।’ इसके लिए आज का दिन ठीक नहीं है कल करेंगे ठीक है।

और शमा कुछ देर में मालिक के घर चली गई। दूसरे दिन मैं उसे चोदने के लिए व्याकुल था की शमा सजधज कर आई। उसके हाव भाव से ही लग रहा था की चुदवाने मे वह आतुर है। दरवाजा बंद कर शमा कमरे मे आई तो उसे बाहों मे लेकर चूमना चालू कर दिया।

प्रतिउत्तर मे वह मेरे होंठों को चूसने लगी। धीरे धीरे मैं उसके सलवार के ऊपर से ही चूचियों को दबाने लगा तो वह बोली की सलवार उतार लो न। मोहन ने समीज उतार दी, चूचियाँ तनी हुई थी, निप्पल गुलाबी हो गयी थी।

अब आगे..

मोहन ने एक चुचि की निप्पल को होठों से चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरी चुची को कस कस कए दबाने लगा।

शमा भी मेरे होठों को अच्छे से चूसे जा रही थी। बारी बारी से चूची चूसने से शमा में नशा छाने लगा, मेरा लंड भी खड़ा हो गया और शमा के बदन को चुभने लगा। शमा ने शर्मा कर मेरे लंड को पकड़ ली और उसे दबाने लगी।

शमा- पैजामा खोलो ना बाबू ! मोहन– तुम खोल लो और मै भी तुम्हारी सलवार को उतार देता हूँ। शमा– आपका तो एकदम लपलपा रहा है बाबू। मोहन- क्या ? शमा– बाप रे लंड है या कोई छोटा सा बांस ! शमा लंड को नरम हाथों से खींचने लगी और सुपाड़ा को अंगुली से सहलाने लगी।

मैं भी उसकी बुर पर हाथ लगाया, चिकना, रस से गीली हो गई थी। शमा को बिस्तर पर लिटा दिया, पैरों को फैलाया बुर फूल गयी थी, कमर के नीचे तकीया लगा दिया बुर ऊपर की ओर उठ गयी। शमा – डॉक्टर बाबू, क्या कर रहे हो ? डॉक्टर– पहले चुत की पुजा की जाती है फिर उसका भोग लगाया जाता है तब चोदा जाता है।

शमा– मेरा पति तो ऐसा कभी नहीं किया। डॉक्टर ने बुर को सहलाया, उंगली से छेद पर सुरसुरी दी, शमा ‘सी… सी… आह…. आह… बाबू जी…’ मोहन ने फिर जीभ से बुर के छेद पर घुमाने लगा तो शमा भी मेरे लंड को कस कस कर दबाने लगी।

बुर से तेजी से पानी निकलना शुरू कर दिया और मोहन उसे जीभ घुसाकर रस को खींच कर पीना चालू कर दिया। शमा तो पागलों कि तरह छट पटाने लगी। उसने अपने सिर को जोर जोर से झटकना चालू किया। ‘आआह्हह्ह शीईव्वव्वाअम्मम आआअह्हह्ह तूउम्म इतने दिन कहाँ थे।

‘ऊऊओह्हह माआईईइ माअर्रर्रर जाऊऊं गीइ। मुझीए माअर्रर्रर डालूऊओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लूऊ’

और उसकी योनि में रस की बौछार होने लगी। मोहन ने जीभ निकाल लिया तो शमा ने लंड को चूम ली और कही– बाबूजी अब घुसा दीजिये। मोहन– कल जब नकली लंड को घुसना चाहा तो घुसा था, फिर तुम क्या की ? शमा- उसे मुंह मे लगाकर आगे-पीछे किया, तब हचाक से घुसा था।

मोहन चारपाई पर बैठ गया। शमा जमीन पर बैठ गयी और लंड के सुपाड़ा को होठों से चूमने लगी। नमकीन रस का स्वाद ली और बोली– थोड़ा रस और पीते हैं। मोहन ने बोला पहले पूरा लंड ले लो चूसो कहकर पूरा लंड शमा के मुंह मे डाल कर चोदने लगा।

गों…. गों…. गों की आवाज आने लगी। मोहन ने शमा को बिस्तर पर ले गया, दोनों पैरों को कंधे पर रखा, सुपाड़े से बुर के छेद पर रगड़ने लगा। ‘आआअह्हह्हह.. ऊओह्हह.. ह्हह्हाआन्न.. हाआन्नन.. ऊउईईइ…’ लंड को दबाया, शमा की बुर का दरवाजा खुला, सुपाड़ा गच से जाकर फंस गया।

मोहन शमा के ऊपर झुक कर दोनों हाथों से सर को पीछे से पकड़ा, होठों को चूसना चालू किया और एक धक्का दिया। चरचराते हुये आधा लंड बुर मे धंस गया, काफी टाईट थी, शमा बड़बड़ाने लगी– बड़ी मोटा है, दुख रहा है, लग रहा है गरम लोहा घुसा दिये हो डॉक्टर बाबू !

मुहँ से एक जोर की चीख ‘आईईईईए…’ निकल गई। मोहन एकदम शमा के ऊपर झुक गए और सामान्य होने तक वैसे ही रुके रहे। वह चूचियों को दबाते रहे तथा जोर से चूमते रहे। जब मैं कुछ ठीक हुई तब शमा ने पूछा- कितना गया? तो डॉक्टर बाबू बोले- अभी तो आधी ही गयी है।

शमा एक बार दर्द के मारे फिर ‘आईईईईए… आईईईईए…. कर के चिल्ला उठी। लगा कि मेरी चूत फट गई है और इसीलिए इतना दर्द हो रहा है। मेरी चूत की सील टूटने पर भी इतनी दर्द नहीं हुई थी जितनी कि अब हो रही थी।
मोहन मेरी तकलीफ को समझते हुए रुक गए थे और अपना दाहिना हाथ मेरी चूत के ऊपर उगे हुए हल्की हल्की बालों के उपर रखा और थोड़ा दबाया और मेरे ऊपर लेट गए।

बाएं हाथ से मेरी चूची को मसलते हुए पूछा- अब कैसा लग रहा है? अगर तुम कहती हो तो मैं निकाल लेता हूँ नहीं तो जब कहोगी तभी बाकी डालूँगा। और इसके बाद अपने होंटों को मेरे होंटों पर रख कर उन्हें चूसने एवं चूसाने लगे।

करीब पांच मिनट ऐसे ही पड़े रहे और शमा अपनी किस्मत को इतना लंबा मोटा और सख्त लण्ड से चुदाई के लिए सहराने लगी। उसे चुदने की तमन्ना कितनी अच्छी तरह पूरी हो रही है इससे वह बहुत खुश थी। बुर के अंदर लहर हो रही थी और लंड अकड़ा हुआ था।

‘डॉक्टर बाबू कुछ कीजिये ना..’ डॉक्टर ने बगल से होम्योपैथ तेल की शीशी उठाई और थोड़ा से लंड को बाहर कर तेल से नहला दिया और फिर एक बार ज़ोर से पकड़ा और लंड को धकेल दिया। थोड़ा पीछे खींचा और साँस रोक कर जोर का झटका मारा और जड़ तक अन्दर ठेल दिया।

शमा के मुँह से अटकते अटकते निकला- धी.. रे…. आ…. ह… दू… खे….! और उन्होंने प्यार से मेरे गाल थपथपा दिए और कहा- दुखता है? अब नहीं दुखाऊँगा ! मैं कसमसा रही थी, उन्हें धक्का देने की कोशिश कर रही थी पर मेरी दुबली पतली काया उनके भैंसे जैसे शरीर के नीचे दबी थी।

मैं ‘गूं.. गूं..’ ही कर सकी। मेरे पैर काफी देर ऊपर रखने से दुःख रहे थे। डॉक्टर बाबू शमा को बिस्तर के किनारे लाकर कमर को पकड़ा और लंड को आखरी गहराई तक पहुंचा दिया।
लंड शमा की बच्चेदानी की मुंह पर सट गया। अब डॉक्टर बाबू धीरे धीरे लंड को खींचते और फिर धकेल देते। ऐसा करने से शमा को मजा आने लगा।

उसमें से सेक्सी आवाज़ें आ…ह्ह्ह्हह्ह उ…ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह या…..फक….मी…. आदि आ रही थी। मज़ा आ रहा है ! ओ..ओ….ह.ह.ह्ह्ह. की मादक आवाज़ें निकाल रही थी और उनका लण्ड मेरी चूत में पिस्टन की तरह सटासट अन्दर बाहर हो रहा था।

कभी ज्यादा जोर का धक्का लग जाता तो उनका सुपारा मेरी बच्चेदानी से ही टकरा जाता था। अब वास्तव में भी मुझे मज़ा आ रहा था। हम दोनों के मुँह से उंहह्ह्ह…. उंहह्ह्ह… और आहह्ह्ह… आह्हह्ह्ह… की तेज तेज आवाजें निकलने लगी थीं।

शमा के कहने पर डॉक्टर बाबू फुल स्पीड कर दी और मेरी चूत में वह इस जिंदगी के सबसे तेज झटके लगाने लगे। उनका लण्ड महाराज मेरे चूत की गहराइयों को पार कर मेरी बच्चेदानी के अंदर घुस गया था।
अब मेरे से नहीं रहा गया, मैं चिल्ला उठी- बाबूजी , और तेज, और तेज, आह.. आह.. मैं गईईईए.. गईईईए.. गईईईए.. गईईई..। आ….ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊ ह्ह्ह्हह धीरे हु..म्मम्म यह क्या घुस रहा है मेरी चूत में ! कोई तो मुझे बचाओ !

शमा आखरी बार चीखी- ऊ ऊओह्ह्ह्ह ! ई ऊऊ मा आऽऽ ! शमा को बहुत आनंद आ रहा था, वो चिल्ला रही थी- आ आ अह ऊ ओहऽऽ ! तेज, और तेज, आह.. आह.. मैं गईईईए.. गईईईए.. गईईईए.. गईईई..। मेरा जिस्म अकड़ गया और चूत लण्ड से चिपक गई।

इसी समय डॉक्टर बाबू की भी हुंकार सुनाई पड़ी और उनका लण्ड मेरी बुर में फड़फड़ाया। एक ज़बरदस्त पिचकारी छूटी और वीर्य मेरे बच्चे दानी मे लबालब भर गया। मैं तो उस समय के आनन्द में रस की नदी में बह गई।

शमा को एहसास हो गया की डॉक्टर बाबू की चोदई से जरूर बच्चा होगा क्योंकि ऐसी पहले कभी नहीं थी। शमा- डॉक्टर बाबू, आपका लंड तो बड़ा मजा दिया, मैं तो सोच भी नहीं सकी थी जवानी का इतना मजा है, गज़ब का चोदते हैं, मै तो तृप्त हो गयी, कैसा गचागच.. गचागच… फचापच चोद रहे थे।

मैं तो रोज अबके बार आपसे चुदवाउंगी, आप छोड़ेंगे ना… और डॉक्टर बाबू से लिपट गयी और चूमने लगी। फिर वह काम मे चली गयी।
इस तरह डॉक्टर बाबू उसे लगातार कुछ दिन चोदते रहे फिर शमा का मासिक बंद हो गया। शमा खुश हो गयी की वह अब गर्भवती है। डॉक्टर बाबू शमा को दवा भी देते जा रहे थे।

अगले अंक मे पढ़िये शमा ने मकान मालकिन को कैसे गर्भवती बनबाया।

दोस्तों मैं वैसे भी शमा की अल्हड बदन को देखकर उसकी चुदाई का पूरा मन बना लिया था पर मैंने अचानक से उस पर हावी नहीं हुआ बल्कि इलाज करने के आड़ में उसे दिन प्रतिदिन गर्म करता रहा जिसे इस hindi sex stories के जरिये कुछ भाग में लाया.. आप सबों को मेरी यह इलाज का तरीका कैसा लगा अपने कमेंट्स भेजें..

Written by

akash

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