नौकरानी का नंबर लग गया

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Meri Sex Story Par Prasidh Lekhak Raviraj Ji Ki Ek Aur Nayi Peshkash… Padhiye Aur Enjoy Kijiye…

प्रेषक: रवीराज मुंबई

मेरी पहली दो कहानियाँ, अगर आपने पढी होगी तो आपको पता चल जायेगा की ये कहानी भी पहली कहानियों से रिलेटेड ही हैं।

जबसे अमित की मम्मी से सेक्स किया था, मुझे दुबारा औरत के संग करने कि इच्छा हो रही थी, सेक्स तो अमित के साथ भी होता था पर औरतों के साथ सेक्स करते हुये क्या मजा मिलता है, ये मैं जान गया था।

नौकरानी को हमे सेक्स करते हुये, छुपकर देखते वक्त मैं असानी से ब्लैकमेल कर सकता था, पर ऐसा नहीं किया क्यों की गेम उल्टा पड कर वो भी हमे ब्लैकमेल कर सकती थी..

जो भी करना था, प्लान बनाकर ही करना था..

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

एक सुबह, मैंने ढेर सारे कंडोम के पैकेट मेरी धुलने वाली पेंट की जेब में रख, कुछ खुले कंडोम बिस्तर पर गिरा दिये, जो इस्तेमाल हुये थे उन्हें बिना कागज में लपेटे, वैसे ही डस्टबीन में डाल दिया।

मकसद ये था के नौकरानी, मुझ पर गुस्सा हो जाये.. कंडोम्स और गंदगी को देख कर..

जब उनका साफ सफाई का समय हुआ, मैं बिना टावेल लिये नहाने चला गया..

अपने हमेशा के वक्त पर वो बेडरूम में आयी, जैसा मैंने सोचा था वैसा ही हुआ..

कमरे की हालत देख कर और पेंट में ढेर सारे कंडोम पा कर, वो पेंट के साथ बाथरूम में घुस गई..

मैं बाथटब में नंगा लेटा हुआ था.. मेरा नंगा बदन उन्हें दिख नहीं रहा था क्यूकी टब में ढेर सारा झाग था..

तुम्हारा क्या चल रहा हैं .?. – अंदर दाखील होते हुये, वो गुस्से से बोली.

क्या हुआ .?. – मैंने अंजान बनते हुये, पूछा..

कमरा कितना गंदा किया है और ये क्या है .?. – कंडोम के पॅकेटस् को पेंट की जेब से निकालते हुए उसने पूछा..

सारी, रात को अचानक नींद लग गई, इसलिये.. – मैं बता ही रहा था के उन्होंने, मेरी बात काट दी..

तुम बहुत बिगड गये हो… तुम्हारे माँ बाप को बताना पड़ेगा…

ओ… नहीं… मम्मी पप्पा को मत बताना… – कहते हुये, मैं बाथटब से उठा..

मुझे ये होश ही नहीं रहा के मैं नंगा बाथटब में खडा हूँ.. मम्मी पप्पा का नाम लेकर, उन्होंने मेरी हवा ही निकाल दी थी..

छी… तुम नंगे हो… – कहते हुये, वो चिल्लाई..

अरे चिल्लाओ मत… – कहते हुये, मैं उनके मुँह पर हाथ रखने के लिये बाथटब से बाहर निकल रहा था.. तभी बैलेंस जा कर टब में ही गिर गया..

मेरा बैलेंस जाता देख, वो मेरी तरफ मुझे संभालने के लिये दौडी.. मुझे पकडते हुये, उनका भी बैलेंस गया और वो मेरे साथ टब में गिर गई..

ये क्या किया, तुमने .?. वो मुझ पर चिल्लाई…

मैंने क्या किया… मेरी तरह आपका भी बैलेंस गया ना…

पर करने क्या जा रहे थे, तुम .?.

आप जोर से चिल्ला रही थी, ना… मम्मी पप्पा का नाम लेकर तो आपका मुँह बंद करने आपकी तरफ आ रहा था…

क्यों .?.

आपकी आवाज से मम्मी पप्पा, अंदर आ जाते तो…

सिर्फ बिगडे नहीं हो, पागल भी हो गये हो…

कयों .?.

घर में तुम्हारे और मेरे अलावा कोई है, क्या .?.

अरे, यार… सच में… मैं पागल हो गया हूँ… – कहते हुये, मैं अपने पागलपन पर हंस पड़ा..

हंस क्या रहे हो .?. देखो तुम्हारी वजह से, मेरी क्या हालत हो गई है… पुरी तरह से भिग गई हूँ…

हाय, रे दैया… तुम्हारी तरह, मैं भी पागल हो गई हूँ जो एक नंगे के साथ बाते कर रही हूँ… – कहते हुये, वो उठने लगी..

रुक जाओ ना… दोनो पागल मिल कर, नहा लेते है… – कहते हुये, मैने उन्हें अपने उपर खिंच लिया..

क्या कर रहे हो .?. छोडो तुम, सच में बिगड गये हो…

और तुम .?.

मैंने क्या किया .?.

तुम जो मुझे और अमित को रोज रात को दरवाजे के की – होल से देखती हो उसका क्या .?.

वो चुप रही, कुछ बोली नहीं..

बोलो – चुप क्यों हो गई .?.

तुम पहले से जानते थे, के मैं, तुम दोनों को देख रही थी .?.

हाँ…

फिर चुप क्यों रहे .?.

मैं आपको, शरमिंदा नहीं करना चाहता था…

आज क्यों बताया .?.

आज आप, मेरी बाहों में जो हो…

कोई बाहों वाहों में नहीं हूँ… – कहते हुये, वो फिर उठने लगी..

पर मैंने उन्हें जाने नहीं दिया.. हाथों से खिच कर, अपने उपर लिटा दिया..

छोड़ो…

मैंने उनकी छटपटाहट को नजर अंदाज करते हुये, उनकी साडी अलग करनी चाही…

नहीं… छोडो… क्या कर रहे हो .?.

वही, जो आप रोज रात को, छुप कर देखती है…

मुझे कुछ नहीं करना…

आप मत करो, मैं करता हूँ… कहते हुये, मैंने उन्हें किस करना शुरू किया..

वो छटपटाती रही पर मैं रुका नहीं.. आखिरकार, वो भी मेरी किसिंग में शामिल हो गई.. जब मुझे लगा के वो उत्तेजीत हो चुकी है, मैंने किस बंद किया..

तुम, बहुत गंदे लडके हो…

पर आप बहुत अच्छी हो… – कहते हुये, मैंने उनके बुब्स दबाने शुरु किए..

एक हाथ से उनके बुब्स दबाते हुये, मैने अपना लंड उनके हाथ में दे दिया.. वो हौले हौले उसे सहलाने लगी.. मैंने फिर किस करना शुरू किया..

कुछ देर बाद, मैंने उन्हें नंगा कर दिया..

बाथटब में हम दो नंगे एक दुसरे के बदन से खेल रहे थे..

मैंने उनकी चुत में लंड को पेलने के लिये, उनकी चुत को उंगली से फैला कर सुपाडा उस पर रख दिया..

लंड को चुत पर रगडते हुये, मैं उन्हें सहला रहा था.. वो भी अपनी कमर हिला कर लंड को चुत में लेने को बेताब हो रही थी..

मैंने धीरे – धीरे अपना लंड, चुत में घुसा कर उन्हें चोदना शुरू किया.. हम दोनों भी कमर हिलाते हुये, एक दुसरे को धक्के मारे जा रहे थे..

हमारे हिलने से टब के पानी में लहरे तैयार हो रही थी.. वैसी ही, हमारे बदन के अंदर भी चुदाई की लहरे उफान मार रही थी..

काफी देर तक चला, ये सैलाब तब जाकर थमा जब हम दोनो झड़ चुके थे..

(कहानी कैसी लगी .?. मेल करके जरुर बताना… मैं जानता हूँ के सेक्स सीन में, मैं जादा कुछ नहीं लिख रहा हूँ… पर “फोर प्ले” में, आपको कुछ ना कुछ वेराइटी पक्की मिलती रहेगी… आपके रिप्लाय से कहानियों में और जान डाली जा सकती हैं…)

आपका रवीराज…

मेरा ईमेल है – [email protected]

Meri Sex Story Ki Raviraj Ji Aur Baki Sabhi Lekhak Se Vinti Hai Ki Wo Isi Tarah Romanchak Kahaniya Likhte Rahe…

Written by

akash

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