होली के रंग में आंटी की चुदाई

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आपको Desi Sex kahani पसंद है तो आज पेश है आपके लिए मेरे और पड़ोसी आंटी से हुए चुदाई की कहानी, इस कहानी में आंटी ने होली के मौके में अपनी चुदाई करवाई

हेलो दोस्तो,

मैं महफूज़ मेरी सेक्स स्टोरी का नियमित पाठक रहा हूँ और मैं पहली बार मेरी नहीं बल्कि मेरे दोस्त की आपबीती बताने जा रहा हूँ!

यह कहानी मेरे दोस्त राघव की है! बाकी की कहानी जाने राघव की जुबानी!

मेरा नाम राघव है। यह मेरी पहली कहानी है मेरी सेक्स स्टोरी की कहानी पर। मेरी कहानी कुछ वास्तविक और कुछ काल्पनिक है, पर यह कामुक नहीं बल्कि अति कामुक है!

कृप्या अपने अपने विचार जरुर दें कहानी पढ़ने के बाद मेरे इस ईमेल पर दें [email protected]

सोनी आंटी की मचलती गांड

यह कहानी 4 साल पहले की है। इस कहानी की नायिका मेरी आंटी(पड़ोसन) है।

आंटी का नाम सोनी है, काफ़ी सुन्दर है! लेकिन जो मस्त अंग है, उसके शरीर में वो है उसके गांड बाहर निकली हुई एकदम चौड़ी कम से कम 38 क होगी!

उसका पूरा शरीर एकदम वाइन के बोतल के तरह जिसका नाप काफ़ी मोटा होता है!

कभी कभी आंटी घर पर आती थी, तो मैं बस आंटी के गांड ही देखता था! जब वो चलती है तो उसके गांड ऊपर नीचे होती है और मेरा लण्ड अक्सर खड़ा हो जाता है।

मुझे वैसे भी व्यस्क महिला के गांड मारने का ज़्यादा शौक है।

बात है! होली के दिनों की। आंटी कुछ ज़्यादा ही पसंद करती है होली को।

उस दिन! क्या माल लग रही थी! हरे रंग के साड़ी में, बाल बाँधे हुए थे उसने, और झीनी ब्लाउस और दिख रहा था।

जब पीछे से देखता तो लगता की पीठ पर चांटे मार के लाल कर दूँ साली के! और फिर चलूँ।

सोनी आंटी को चुदासी होना

आखिरकार उसका और मेरा आमना सामना हुआ मैंने उसे विश किया।

उसने मुझे मैंने उसको हमने एक दूसरे के गाल पर गुलाल लगाया और वो चल दी मुड़ कर।

मुड़ने के बाद उसके गांड और झीनी ब्लाउस देख कर मेरे मुँह से सस्स्! निकला।

शायद! वो उसने सुन लिया और 10 सेकेंड देख कर करके चली गई। जैसे! मानो मेरे अन्दर क हवस नाप गई हो।

मैं भी अपने दोस्तो के साथ चल दिया होली खेलने और 2-3 घंटे बाद सभी लोग अपने अपने घर के अन्दर जा चुके थे।

मैंने सोचा! मैं भी सोनी आंटी के पति को रंग लगा आऊँ और फिर मैं भी चलूँ अपने घर।

सोनी आंटी ने रसीली बातें की

मैं आंटी के घर गया देखा! तो कोई नहीं दिख रहा था। मैंने आवाज़ लगाई, तो सोनी आंटी अन्दर से आई।

मैंने पूछा- अंकल कहाँ है?

वो बोली- कहीं गए है?

मैं बोला- ठीक है! मैं चलता हूँ और फिर शुरू हुई रसीली बातें उसके और मेरे बीच!

आंटी: कुछ काम था क्या?

मैं: नहीं बस! होली खेलनी थी थोड़ी! अंकल ही रह गए बाकी सबके साथ खेल लिया।

आंटी: सबके साथ! मेरे साथ कहाँ खेला अभी!

मैं: अभी लगाया तो था आपके गाल पर गुलाल बस हो गया! और क्या?

आंटी: तुझे कहाँ आता है खेलना होली! अभी आ जाएँगे अंकल खेल लेना उन्हीं के साथ!

मुझे ऐसे लगा, जैसे मेरी मर्दानगी पर किसी ने सवाल उठा दिया हो?

मैं: आंटी आता तो मुझे बहुत है खेलना! बस आपके साथ नहीं खेल सकता ना!

आंटी: क्यों? ऐसा क्या करता है तू! या डरता है???

मैं आगे बढ़ा और एकदम काला रंग हाथ में लेकर उसके कंधे पर लगाया और मुँह पर भी लगा दिया।

आंटी ने मेरे लण्ड पर रंग लगाया

आंटी: हँसते हुए! इसी की बात कर रहा था! तुझे सच में नहीं आता खेलना?

आंटी ने वही रंग लिया। मेरे सामने आई, मेरा पैजामा खींचा और अन्दर हाथ डाल कर मेरा लण्ड पकड़ कर अच्छे से मसल दिया रंग के साथ!

ये सब करते हुए साली मेरे आँखो में ही झांक रही थी। मैं हक्का बक्का रह गया!

उसके इस हरकत से। उसके रंग लगते ही मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया था।

वो बोली: लगता है! तुझे होली तो नहीं, बल्कि कुछ और अच्छे से आता होगा!

मैं पूछा- क्या मतलब आंटी?

वो बोली: साले ज़्यादा सीधा मत बन, सब जानती हूँ मैं!

मैं: क्या जानती हो आंटी, साफ साफ बोलो मेरे समझ नहीं आ रहा!

सोनी आंटी की होंठों का चुम्बन

वो बोली: अच्छा! तो सुन मादरचोद, मेरी गांड मारना चाह रहा है और साला सीधा बन रहा है। कुत्ते तेरी नजरों में देखा है मैंने! कितना बुरा चोदना चाहता है तू मुझे!

बस फिर क्या था! मैंने बाल उसके पकड़े पीछे से और उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी।

वो भी मस्त चूसने लगी मेरी जीभ और अपना हाथ मेरे लण्ड के पास ले गई और ज़ोर से दबा दिया।

मैंने उसे पलटा! उसके बाल आगे किए, और पीठ पर एक ज़ोर से चांटा मारा लाल हो गया, वहाँ पर!

आंटी: सस्स! बहनचोद कुत्ते काम कर अपना चल। चोद दे मुझे जैसे चोदना चाहता है!

मैं बोला: रुक नहा कर आता हूँ और तुझे भी नहला देता हूँ।

हम जब नहा कर बाहर आए तो सोनी बोली: किचन में चलते हैं!

सोनी आंटी की गांड चटाई

मैं कहा: पहले हम दोनो बिल्कुल नंगे होंगे फिर किचन में जाएँगे।

सोनी ने अपना गाउन उतार दिया। इतने में मैंने सोनी को अपनी बाहों में पकड़ लिया।

मेरे सर पर तो उसके गांड का भूत सवार था। मैंने किचन में सोनी को घोड़ी बना दिया और उसकी गांड को चाटने लगा।

सोनी ने हाथ से मेरा लण्ड को पकड़ लिया और बोली: मैं पहले इसका जूस पियूँगी।

मैंने कहा: नही! पहले मैं तेरी गांड मारूंगा!

वो बोली: नही गांड फट जाएगी।

सोनी आंटी की गांड में लण्ड

मैंने उसकी गांड में वेसिलीन लगाई और मैंने अपना 6″ का लंबा लण्ड उसके गांड के मुँह पर लगा दिया।

मेरा लण्ड देख कर सोनी बोली: इतना लंबा और मोटा लण्ड साले जान लेगा क्या हरामी।

मैंने ज़ोर से धक्का मारा! तो थोड़ा सा लण्ड उसके गांड में चला गया।

वो चिल्लाई- आ! अहैहै! उउउ! हैहै! आआ! दर्द हो रहा है साले कुत्ते निकाल अपना लण्ड।

उसके ये शब्द आग में घी का काम कर रहे थे, मैंने फिर एक धक्का मारा, इस बार आधा लण्ड उसकी गांड में चला गया।

वो साली गंदी गंदी गाली बकने लगी, बोली: मादरचोद! चोद अपनी आंटी को निकल दे खून गांड से! मुझे चोद और चोदता रह! मैं और ज़ोर से डाला!

उसने फिर बोला- इतना ही जान है बस! मेरी गांड को आज फाड़ ही दे!

मैं बोला: तेरी गांड मार कर तेरी चूत भी मारूँगा, लेकिन माँ की लौड़ी ज़्यादा गालियाँ देगी तो चूत का भी भोसड़ा बना दूँगा!

मैंने इस बार लण्ड को वापस बाहर निकाल कर फिर सरसों तेल लण्ड पर लगाकर!

एक बार फिर उसके गांड में घुसा दिया, इस बार पूरा का पूरा लण्ड सोनी के गांड में चला गया।

सोनी बोली: और ज़ोर से मार मेरी गांड भोसड़ी के फाड़ दे। वास्तव में अब मज़ा आ रहा है।

सोनी आंटी ने लण्ड चूसा और वीर्यापान

मैं आगे की ओर झुक कर उसके चूत में अपनी दो उंगली डाल दी।

इस तरह उसके गांड में लण्ड और उसकी चूत में उंगली डाल कर उसको चोदता रहा, और मैं झड़ गया उसकी गांड में ही!

15 मिनट बाद सोनी बोली: अब मेरी बारी है मैं तुझे खुश करती हूँ।

उसने मुझे कुर्सी पर बैठा कर मेरे लण्ड को अपने मुँह में डाल कर लोलीपॉप की तरह चूसने लगी, इतना मज़ा आ रहा था कि मत पूछो!

वो साली पूरा गले तक मेरे लण्ड को लेती और खाँसती! फिर मेरे लण्ड पर थूकती और फिर चाटती आंड से लण्ड तक। और फिर पूरा गले तक भर लेती ।

5 मिनट बाद! मैं उसके मुँह में फिर झड़ गया! वो साली पी नहीं रही थी, मैंने एक थप्पड़ मारा और वो पी गई!

अब हमें जब टाइम मिलता है अलग अलग तरह से सेक्स करते है पूरे वासना में लीन होकर!

वो सब अगली कहानी में उसके द्वारा मैंने अपनी और पड़ोसनों को भी चोदा और उनमें से एक तो नांचने वाली है, क्या माल थी साली!

दोस्तो, यह थी मेरी कहानी वासना से भरपूर आपको कैसी लगी? आप अपने विचार मुझे इस मेल आई डी पर भेज सकते हैं!
[email protected]

Desi Sex kahani के इस कहानी में मैं अंकल को रंग लगाने गया तो वो घर पर नहीं थे तब मैं लौटकर आने लगा तो आंटी ने रंग के बहाने मेरे लण्ड को मरोड़ने लगी जिससे मेरा लण्ड खड़ा हो गया और मैंने आंटी को नंगी कर पूरे जिस्म में रंग लगाया और उसकी जमकर गांड चुदाई कर डाली..

Written by

guruji

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