भैया को दारू पिला चोदा भाभी को

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मैं जहाँ किराये में रहता था, वहाँ पर एक भैया और भाभी भी रहते थे। Hindi Sex Stories की घटना में, एक बार! मुझे पड़ोस वाली भाभी के साथ चुदाई का मस्त मौका मिला..

हेलो दोस्तो,

मैं राकेश 28 साल का हूँ और एक कंपनी में काम करता हूँ। आज भी मैं देखने में सही हूँ और आकर्षक भी हूँ। इसलिए जो भी भाभियाँ मुझे मिलती है, वो मुझसे खुश हो जाती है।

मैं आपको पिछले गर्मी में हुआ, एक किस्सा बताता हूँ। मैं एक किराये के मकान में रहता था, और उस घर में सिर्फ 2 रूम थे, एक कमरा मेरे पास था और दूसरे में एक नया किरायेदार था।

वो लोग पति-पत्नी थे, और उनका 3-4 साल का एक बच्चा भी था। भाभी पटाखा तो नहीं थी! लेकिन उसका फिगर बड़ा सही था। उसके बदन को देख कर कोई भी उसका कायल हो सकता था!

मेरी उनसे जानपहचान हुई, और सब कुछ ठीक चल रहा था। मैं उन्हें भैया-भाभी कहकर ही बुलाया करता था। मैं होटल में ही खाना खाता था और घर आकर सो जाता था।

शनिवार को मैं खाना साथ में ही लेकर आता, और साथ में कुछ दारु। शनिवार मैं अपने घर में ही खा-पी कर पार्टी कर लेता था।

उस शनिवार को भी मैं कमरे में दारु पी रहा था। तभी भैया कमरे में दाखिल हुए और मुझसे पूछा- क्यों भाई क्या चल रहा है?

मैंने जल्दी से बोतल छुपाई और बोला- कुछ नहीं! भैया!

वो बोले – झूठ बोल रहे हो, अकेले-अकेले पी रहे हो? मुझे भी पिलाओ!

मैंने कहा – भाभी देख लेंगी, तो डाटेंगी और आप मेरा भी पीना बंद करवा दोगे।

वो बोले – चिंता मत करो! तुम दारू डालो, मैं अभी आता हूँ।

वो थोड़ी देर में पापड़ के साथ आये और बोले- मैं तुम्हारी भाभी को बताकर आया हूँ।

मैंने भाभी की चुदाई के बारे में सोचा

थोड़ी देर बाद! भाभी जी पकोड़े लेकर आ गई। वो उस समय नाईटी पहने हुए थी। हम दोनों बातें करने लगे, और कुछ देर में ही दारु का नशा होने लगा।

बहुत दिनों से चूत मारने का मन था! और उनको देखते ही, मेरा लण्ड एक दम खड़ा हो गया। हालांकि! मैं चुपचाप ही बैठा रहा।

मैंने दो पेग मारे, तब तक भैया तीन पेग पी गए थे, और उनकी आवाज़ लड़खड़ाने लगी थी। उन्होंने अपने लिए एक पेग और बना लिया।

हालांकि! मैंने मना किया तो बोले – पीने दे यार, आज काफी दिनों के बाद पी रहा हूँ। रात के 11 बज रहे थे! तभी भाभी जी खाना लेकर आई।

उन्होंने उनकी हालत देखी! और बोली – इसलिए, मैं इन्हें मना करती हूँ, थोड़ी सी ही पीने के बाद लुड़क जाते है। प्लीज! आप इन्हें मेरे रूम में लिटा दीजिए।

मैंने एक तरफ हाथ डालकर भैया को उठाया तो दूसरी तरफ से भाभी जी ने, और हम उनको उनके रूम में ले गए।

हमने उन्हें बेड पर लिटाया और लिटाते समय! मेरा हाथ भाभी जी के चूतड़ों पर रखा गया, तो मैंने उन्हें सॉरी बोला!

वो बोली – कोई बात नहीं!

मैं अपने रूम में आकर खाना खाया, और उनके नाम की मुठ मारकर सो गया! अगले दिन! रविवार को भी भैया आ गए।

मैंने उनको मना किया, तो वो बोले – पिलाओ ना यार! औरतों की तो आदत होती है, ज्यादा बोलने की! मैं चुप हो गया।

थोड़ी देर में भाभी जी आ गईं और मैंने उन्हें बता दिया। उन्होंने बोला – मानते तो है नहीं! लेकिन कम पिलाना!

आज भी वही सब हुआ! चार पेग के बाद, भैया फिर से होश में नहीं थे! भाभी जी ने फिर से मुझे बोला, भैया को रूम में पहुचने के लिए।

रास्ते में एक दो बार! मेरा हाथ उनकी चूचियों से टकराया! तो पता चला, कि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी है!

भैया को बेड पर लिटाते हुए, मैंने जान बूझकर! हाथ उनकी चूतड़ पर रख दिया। अब जल्दी में उन्हें पकड़ लिया!

जैसे ऐसा ना लगे! कि मैंने ये जानबूझकर किया है! भाभी कुछ नहीं बोली। हाथ चूतड़ों पर रखने से पता चला, कि उन्होंने पेंटी भी नहीं पहनी है!

भाभी बोली – चलो खाना खाते है! हमने साथ में खाना खाया। ऐसा करीब! दो महिनों तक चला।

भाभी की चूचियों और चूतड़ों पर हाथ फेरा

मैं कभी चूचियों पर हाथ फेरता! तो कभी चूतड़ पर हाथ फेरता! और अपने कमरे में आकर मुठ मारकर सो जाता।

ऐसे ही! एक शनिवार को मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया! आज मैंने शुरू से ही! भैया के पेग बड़े बनाए, और चार पेग के बाद वो बेहोश से हो गए।

रात में! भाभी जी उन्हें लेने ले लिए आई। तब मैंने भैया को एक साइड से पकड़ा तो भाभी ने दूसरी साइड से, पर इस तरह वो जा नहीं पा रहे थे!

अब मैंने भाभी जी को बोला- मैं पीछे से पकड़ता हूँ, और आप आगे से पकड़ो!

मैंने भैया के बगलों में हाथ डालकर! उनको उठाया हुआ था और भाभी ने आगे से पकड़कर! अब मेरे हाथ उनके चूचियाँ पर लग रहे थे!

वो आज भी ब्रा नहीं पहनी थी! पर वो कुछ नहीं बोल रही थी। उनके रूम तक पहुँचने तक! भाभी के निप्प्ल खड़े हो गए थे!

जब! भैया को मैंने बेड पर लिटाया, तो जान बूझकर! भैया को हल्का सा भाभी के ऊपर छोड़ दिया। भाभी नीचे! उनके उपर भैया! और उनके ऊपर मैं गिर पड़े!

मेरे हाथ भाभी की चूचियों पर थे! मैंने ऊपर उठने की कोशिश की! और इस बहाने से उनके चूचे को दो- तीन बार दबाया!

अब मैं उपर उठ गया, और साइड से हाथ भाभी के बूब्स पर ले जाकर! भैया को उठाया। इस बार! मैंने दोनों चूचियों पर हाथ रगड़ दिए। भाभी कुछ नहीं बोली।

अब मैंने नीचे हाथ उनकी चूत के ऊपर रगड़े! और भैया के पैर भी उनके उपर से हटाए।

तब भाभी ने चैन की साँस ली! और वो भी उठ गईं। भाभी भैया के कपडे उतारने लगी, जिसमें मैं उनकी हेल्प करने लगा।

उनकी हेल्प करते हुए, मैं कभी अपने लण्ड को उनकी गांड पर रगड़ देता! और कभी उनके चूचियाँ पर हाथ रखकर उनको दबा देता!

वो भी, इन सब हरकतों का बुरा नहीं मान रही थी! मैंने सोचा! कि जब इतने में कुछ नहीं बोल रही है! तो आगे भी कुछ नहीं बोलेगी।

यह सोचकर! मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया, और उनको धक्का मार दिया। मैं उनके ऊपर गिर गया! तो वो मेरे नीचे उलटी थी, और मैं उनके ऊपर था!

खड़े लण्ड से भाभी को घोड़ी बना चोदा

मेरा खड़ा लण्ड! उनकी गांड में फंसा हुआ था! मैंने उनको उठाने के बहाने और खुद उठने के बहाने! उनकी नाईटी उनके चूतड़ तक उठा दी!

वो फिर से! भैया के कपड़े उतारने में लगी हुई थी। वो ऐसा कर रही थी, कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो!

मैंने फटाफट अपना लण्ड निकाला और उनके पीछे आ गया। अब उनकी हेल्प करने के बहाने! अपना लण्ड उनकी चूत के ऊपर रख दिया।

वो थोड़ा आगे पीछे हो रही थी, तो मैंने उनको पकड़ लिया! अब लण्ड को उनकी चूत में डाल दिया! वो चुपचाप भैया के कपड़े बदल रही थी।

मैंने पूरा लण्ड अन्दर घुसा दिया! पर वो कुछ नहीं बोली। अब मैंने उनकी चुदाई! उसी घोड़ी वाली पोजीशन में शुरू कर दी!

कुछ देर चोदने के बाद! अपना माल उनकी चूत में निकाल दिया, और वापस अपने रूम में आ गया!

थोड़ी देर बाद! भाभी खाना लेकर आई और हम दोनों ने चुपचाप खाना खाया।

मुझे कई बार भाभी के बदन और चूचियों को छूने का मौका मिलता, तो मैं उनको याद कर मुठ मारता था। एक शनिवार! मैंने भाभी को चोदने की योजना बनाकर! भैया को ज्यादा और बड़ा पैक बनाकर पिला दिया! जिससे वो जैसे बेहोश हो गए. भैया को घर छोड़ने के बहाने Hindi Sex Stories की किस्से में! भाभी की चूचियों को छूते हुए, मैंने उनकी चूत चोद डाली..

Written by

akash

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