गर्लफ्रेंड की सहेली की चूत चुदाई

8 min read

मेरा नाम राज है, जोधपुर राजस्थान का रहने वाला हूँ। मेरा कद 5 फुट 7 इंच का है।
मुझे पहली बार अपनी True Indian Sex Stories लिखने का मौका मिल रहा है।

बात उस समय की है.. जब मैं 4 साल पहले बी.टेक. करने के लिए अपने गाँव से जोधपुर आया था। मैं अपने चाचा के घर रह रहा था।

कुछ महीनों की तैयारी के बाद मैंने कॉलेज ज्वाइन किया। वहाँ बहुत सारी लड़कियां भी थीं। उसमें से साक्षी नाम की लड़की के साथ मेरा हमेशा कॉम्पिटीशन रहता था। वो भी पढ़ाई में बहुत होशियार थी।

कुछ दिनों बाद हम दोनों में दोस्ती शुरू हुई और हम हमेशा एक-दूसरे की प्रॉब्लम सॉल्व करते थे.. धीरे-धीरे हमारी दोस्ती प्यार में बदलने लगी। हम दोनों कभी-कभी घूमने बाहर जाया करते थे।

उसके पिता किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब करते थे और माँ बैंक में जॉब करती थीं इसलिए कई बार मैं उससे मिलने उसके घर भी जाया करता था.. लेकिन अभी तक मैंने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया क्योंकि वो शादी से पहले इस बात से सहमत नहीं थी।

उसके घर की ऊपर वाली मंजिल पर किरायेदार रहते थे.. जिसमें एक लड़की और उसके माता-पिता रहते थे। उसके पिता टीचर थे। लड़की का नाम प्रिया था.. वो देखने में बहुत सुन्दर थी। उसके उभारों को देखकर जी करता था कि काश मैं उसे अपनी गर्लफ्रेंड बनाता.. तो मजा आ जाता।
प्रिया और साक्षी आपस में सहेलियाँ थी।

वैसे मैं आपको बता दूँ कि मैंने इससे पहले भी कई लड़कियों के साथ सम्भोग किया है। लेकिन प्रिया के क्या चूचे थे.. क्या गांड और क्या रसीले होंठ.. अय हय उसका रूप देखते ही उसे चोदने का दिल करने लगता था।

उसका 32-30-32 का गदराया जिस्म देखकर मैं पागल हो गया था। धीरे-धीरे मैं साक्षी के घर रोज जाने लगा.. ताकि मैं प्रिया को देख सकूं।
वो हमेशा टॉप और जीन्स पहनती थी। मैं जब भी जाता.. मेरा उससे बात करने का बड़ा मन करता। कई बार प्रिया मेरे सामने ही साक्षी के पास आ जाती थी, तो वो मेरे साथ थोड़ी घुल मिल गई थी।

एक दिन की बात है.. साक्षी ने मुझे बताया कि वो दो दिन के लिए अपने ननिहाल जा रही है।
मुझे ख़ुशी हुई कि इस बहाने में प्रिया से अकेले मिल सकूँगा।

दूसरे दिन मैं जानबूझ कर साक्षी के घर गया.. ताकि प्रिया से मिल लूँ।
मैंने वहाँ जाकर बेल बजाई.. कोई नहीं आया। मैंने 2-3 बार बेल बजाई तो प्रिया ने ऊपर से आकर दरवाजा खोला, शायद वो अभी नहाकर निकली होगी। उसको देखकर मेरे होश उड़ गए।

उसकी पतली कमर, भरी हुई बड़ी-बड़ी चूचियाँ देख कर मेरे मन में उसके साथ रात बिताने के ख्याल आने लगे।
उसकी बगैर ब्रा की टी-शर्ट से बड़ी-बड़ी चूचियों की घुन्डी साफ दिख रही थीं।
मैंने ‘हैलो..’ बोला और पूछा- साक्षी कहाँ है?

वो बोली- वो तो अपने ननिहाल गई है।
मैंने जानबूझ कर बोला- मुझे बताया नहीं.. मैं इतनी दूर से मिलने आया हूँ।

थोड़ी देर रुककर वो बोली- कोई बात नहीं.. इतनी दूर से आए हो.. तो थोड़ी देर बैठो और चाय पीकर चले जाना।
मैं थोड़ी नानुकुर करने के बाद प्रिया के साथ ऊपर चला गया।

मैंने पूछा- कोई दिख नहीं रहा है?
उसने बोला- मेरी माँ मार्किट गई हुई हैं।

उसने मुझे अपने कमरे में बिठाया और चाय बनाने चली गई। मैं भी उसके ख्यालों में खो गया और सोचने लगा कि आज तो लॉटरी लग गई।

वो चाय लेकर आई, मुझे देने के लिए झुकी.. जिससे उसकी दोनों चूचियों की आधी झलक मुझे दिख गई। मैं ध्यान से उसकी चूचियों को देख रहा था। मेरा मन कर रहा था कि अभी ही मैं उसकी चूचियों को पकड़ कर मसल दूँ, पर मैं कुछ कर नहीं सकता था।

यह बात शायद उसे पता चल गई थी, वो जानबूझ कर सोफे पर ऐसे झुक कर बैठी कि मुझे उसके मम्मे आसानी से दिख जाएं।

धीरे धीरे हम इधर-उधर की बातें करने लगे, मैंने उससे पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या?
वो बोली- नहीं मुझे ये पसंद नहीं है।

मैंने चाय पीते-पीते उसको अपने कपड़ों पर डाल दिया। वो एकदम उठी और पानी लेकर अपने हाथों से साफ़-साफ़ करने लगी। उसका ध्यान नहीं था लेकिन मेरा लंड खड़ा हो गया और उसे महसूस हुआ वो उठ कर शरमा गई।

अब मुझमें भी हिम्मत आ गई। मैंने उसका हाथ पकड़ा बोला- मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ और साक्षी को नहीं तुमको देखने आया हूँ।
उसने भी कहा- मैं भी आपको लाइक करती हूँ.. लेकिन बोलने की हिम्मत नहीं हुई।

फिर क्या था मैंने उसको अपनी बांहों में ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा।
क्या रसीले होंठ थे।

फिर मैं उसको सोफे पर ले गया और उसके ऊपर आकर जबरदस्त किस करने लग गया। अब वो भी गरम होने लगी थी और कराह रही थी।
उसके फूल की पंखुड़ी जैसे कोमल होंठ मुझे इतने मीठे लगे कि मेरा लंड अकड़ने लगा।

फिर वो बोली- कुछ करो.. अब रहा नहीं जा रहा राज.. जल्दी कुछ करो।

लेकिन मैं तो चूत का पुराना खिलाड़ी था इतनी जल्दी कैसे करूँ। मैंने उसको बिस्तर पर ले जाकर पटका और धीरे-धीरे अपने एक हाथ को उसके कपड़े के अन्दर डाल कर उसकी छोटी-छोटी चूचियों को हल्के-हल्के से सहलाने लगा, फिर उसके निप्पल को चुटकी में लेकर मसलने लगा। थोड़ी ही देर में प्रिया को भी मज़ा आने लगा।

‘सीईई आहह उफ्फ़.. आहह.. बहुत अच्छा लग रहा है..’ वो सीत्कार करने लगी।

अब मैंने प्रिया का कुर्ता उतार दिया और उसकी एक चूची को ब्रा से बाहर निकाल कर मुँह में लेकर चूसने लगा, दूसरी चूची को मैं हाथ में लेकर धीरे-धीरे मींज रहा था।

वह धीरे-धीरे बुदबुदाने लगी- ओह.. आह हाहह.. र..राज.. मज़ा आ रहा है.. और ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूची को चूसो..

मैंने उसके निप्पल तो हल्के से काटा तो वो मादक आवाज़ में बोली- ऊहह..
मैंने कहा- मेरी जान.. मज़ा आ रहा है ना?
‘हाँ जान.. बहुत मज़ा आ रहा है।’ उसने मस्ती में कहा।

प्रिया को पूरी तरह मस्त देख कर मैंने उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया और कहा- अब तुम मेरा लंड मुँह में लेकर चूसो और ज़्यादा मज़ा आएगा।

पहले तो उसने मना किया लेकिन मेरे ज़्यादा ज़ोर देने पर वो मान गई।

वो मेरे लंड को मुँह में लेने के लिए अपनी गर्दन को झुकाने लगी और 69 की अवस्था में आकर लंड चूसने लगी।
मैं भी मस्ती में बड़बड़ाने लगा- आहह जानू.. शाबाश.. बहुत अच्छा चूस रही हो.. और अन्दर लेकर चूसो..
वो और तेज़ी से लंड को मुँह के अन्दर-बाहर करने लगी। मैं मस्ती में पागल होने लगा।

मैंने उसकी जीन्स और पैन्टी दोनों को एक-एक खींच कर टाँगों से बाहर निकाल कर पूरी तरह नंगी कर दिया और फिर उसकी टाँगों को फैला कर उसकी चूत को चाटने लगा। उसकी चूत चिकनी और मुलायम और बिल्कुल साफ थी। ऐसा लग रहा था कि आज या कल में ही साफ़ की हुई है।

मैंने अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच घुसा दिया और उसकी चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा और जीभ को उसकी चूत के अन्दर ले जाने लगा।

वह बोल उठी- हाय.. ये आप क्या कर रहे हैं.. मेरी चूत क्यों चाट रहे हैं.. आहह.. मैं पागल हो जाऊँगी.. ओह.. हाय।

वो अपनी कमर को ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करते हुए मेरे लंड को चूस रही थी। करीब दस मिनट तक हम ऐसे ही एक दूसरे को चूसते चाटते रहे। हम लोगों का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था।

उसने कहा- जानू अब सहा नहीं जा रहा कुछ करो वरना मैं मर ज़ाऊँगी।

यह सुन कर मेरा लंड फड़फड़ाने लगा और मैं फिर देर न करते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा.. पर मेरा लंड उसकी चूत के हिसाब से काफ़ी बड़ा था।

पर काफ़ी देर तक चूमाचाटी करने से उसकी चूत से पानी निकल गया था और वो झड़ गई.. जिससे उसकी चूत चिकनी हो गई थी, मेरा लंड मोटा होते हुए भी चिकनी चूत में बड़े आराम से घुसने लगा था। हालांकि उसे बहुत दर्द हो रहा था और थोड़ा खून भी आने लगा था.. वो थोड़ी रोने लगी थी।

मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और लंड पूरा अन्दर सरक गया।

मैं थोड़ी देर रुका और जब मैंने देखा अब उसका दर्द कम हो गया है, तो मैंने धक्के मारने शुरू किए। कुछ ही धक्कों के बाद उसको भी अब मजा आने लगा।

वो भी नीचे से अपने चूतड़ों को उठा कर मेरा साथ देने लगी, फिर मैंने तेज़ धक्के देने शुरू कर दिए।
थोड़ी देर बाद उनके दोनों पैर अपने कंधे पर रख कर उसको धकाधक चोदने लगा।

वो हल्के-हल्के स्वर में चिल्लाने लगी थी ‘आहह.. उहह..’

लगातार कई मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था, मैंने पूछा- कहाँ छोड़ूं?
उसने कहा- मेरे मम्मों पर छोड़ दो।

मैंने दो-तीन और झटके लगाए और उसके मम्मों पर अपना सारा वीर्य छोड़ दिया और कुछ मिनट तक उसके ऊपर यूं ही पड़ा रहा, फिर बाथरूम में जाकर हम दोनों एक साथ नहाए और इसके बाद मैं अपने घर चला गया।

मैंने लगातार दो दिन रोज आकर प्रिया को दबा-दबा कर चोदा।

मित्रो, मेरी पहली चुदाई कैसी लगी.. मुझे जरूर बताना, यह मेरी सच्ची Indian Sex Stories है।
प्लीज मुझे ईमेल करके अपने सुझाव जरूर दीजिएगा।
[email protected]

Written by

akash

Leave a Reply