मेरी पहली सुहागरात माया के साथ

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देसी कहानी तब की है जब मैं पहली बार माया के हुस्न के कायल हो उसकी चुदाई के बारे में सोचने लगा कि तभी वो पल आया जब उसकी कुँवारी बुर की चुदाई का मौका हासिल हुआ..

सभी पाठको को मेरा प्यार भरा नमस्कार!

मैं राज गाजियाबाद से हूँ। मैं मेरी सेक्स स्टोरी की कहानियाँ काफी समय से पढ़ता आ रहा हूँ लेकिन, मैं आज आप सभी को अपनी आप बीती सुनाने जा रहा हूँ!

पहले मैं आप लोगों को अपने बारे में बता दूँ। मैं 25 साल का एक बांका नौजवान हूँ! रंग गोरा कद 5’8″ है!

अब मैं अपनी असली बात पर आता हूँ, बात उस समय की है, जब मैं स्टडी करता था और मैं घर से बाहर रहता था। उसी शहर में मेरी एक दूर की बुआ भी रहती थी। मैं कभी कभी सन्डे को उनके घर चला जाया करता था!

एक दिन मैं बुआ के साथ बैठा बातें कर रहा था कि घर के अन्दर उनकी कोई पड़ोसी आई, वो एक 22 साल की लड़की थी, रंग सांवला, कद छोटी, चूचियाँ उठी-उठी और चूतड़, क्या मस्त लग रहे थे!

चूँकि! सब मुझे शरीफ समझते थे, इसलिए मैं अपने काम में लग गया और वो बुआ से बात करने लगी! बीच बीच में मैं उसे देखे जा रहा था और वो भी शायद! मुझे देख रही थी।

अचानक! हमारी आँखें मिली और दोनों ने हल्की सी स्माइल दी! मुझे जब भी मौका मिलता, मैं बुआ के घर चला जाता और वो भी आ जाती घर में बोल देती कि, दीदी के पास जा रही हूँ।

वो बुआ को दीदी बोलती थी! एक सन्डे मैं बुआ के घर गया हुआ था कि, तभी फूफा जी आए और मुझसे बोले- राज मैं ऑफिस के काम से 15 दिनों के लिए, आज शाम को बाहर जा रहा हूँ।

मैं तुमको फ़ोन ही करने वाला था कि तुम आ गए! फूफा जी मुझपर बहुत ही विश्वास करते थे, मैं उनकी बात मान गया, शाम को फूफा जी चले गए और मैं उनके घर पर ही रूक गया!

अगले दिन वो फिर आई! उसका नाम माया था। बुआ जबतक घर का काम करती, तबतक हम दोनों आपस में बातें करते, धीरे-धीरे हम काफी घुलमिल गए।

कभी-कभी तो मैं बुआ और माया एकसाथ बैठ कर हँसी मजाक करते थे, चूँकि! मैं और बुआ पहले से ही आपस में काफी फ्रैंक थे, सो हम आपस में साड़ी बातें कर लेते थे!

अब माया भी मुझसे खुल गई थी, सो सारी बातें होती रहती, दिन मस्ती में बीत रहे थे!

जब बुआ काम में बिजी होती तो, मैं और माया अकेले होतें तो सेक्स की बातें भी स्टार्ट हो गई थी।

एक दिन माया ने मुझे पप्पी ले ली! मैंने भी उसके कोमल गालों पर चुम्मी दे दी! लेकिन बिना शर्माए उसने फिर पप्पी ली, अब तो मैं कहाँ रूकने वाला था! उसके गालों पर चुम्मों की बौछार कर दी और, उसके जिस्म से चिपक कर बैठ गया!

मेरे अन्दर एक अजीब रोमांच उठने लगा! शायद उसे भी इस बात का एहसास था। इस बार फिर वो उठी और, बुआ के पास गई और वापस मेरे पास आकर बैठ गई।

एक बार फिर चुम्मियों का दौर चल पड़ा! मैं उसके गालों को चूसे जा रहा था और वो मुझे, हम दोनों धीरे धीरे गर्म हो रहे थे! अब मेरे हाथ उसकी चूचियों तक जा पहुँचे, मैंने उसे सहलाना और दबाना शुरू कर दिया।

उसकी सिसकारियाँ निकालने लगी! हम अब भी एक दुसरे को चूसे जा रहे थे, तभी बुआ के आने की आवाज हुई और हम अलग हो गए!

अब तो यह सिलसिला रोज चलने लगा साथ ही मुझे वहाँ 5 दिन भी हो गए थे। एक दिन वो आई और रोज की तरह हम तीनों बातों में लग गए, फिर बुआ को किसी काम से बाजार जाना था।

माया को साथ जाने को बोला तो उसने मना कर दिया। खैर! बुआ चली गई और हमारा खेल एक बार फिर से शुरू हो गया! मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और उसके रसीले होंठों को चूसने लगा, माया भी मेरा साथ देने लगी!

मैंने माया को सोफे पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया, और फिर एक-दुसरे को चूसना शुरू कर दिया! अब मेरा हाथ उसकी चूचियों पर चलने लगा, मैं धीरे धीरे सहलाने लगा।

अचानक! उसके चूचे को जोर से दबा दिया, माया चिंहुक कर मेरी तरफ देखने लगी! फिर मुझे किश करने लगी।
शायद! अब उसे भी मजा आ रहा था, तो मेरा हौंसला और बढ़ गया।

अब मेरे दोनों हाथ उसकी चूचियों पर घूम रहे थे, माया के मुँह से अजीब सी सिसकारियाँ निकलने लगी!

अब मेरा हाथ उसकी चूची पर और एक हाथ उसके पेट पर घूम रहे थे! मैंने उसके होंठों से अपने होंठों से अलग किया और उसकी चूचियों को ऊपर से ही चूसने लगा, अब माया चुपचाप खेल का पूरा मजा ले रही थी! और सिसकारियाँ निकाल रही थी।

मेरा एक हाथ माया की चूचियों पर और एक हाथ नीचे कुछ तलाश रहा था, साथ ही मैं माया की एक चूची चूस रहा था! मेरा हाथ माया की पजामी के अन्दर गया तो मुझे किसी जलती हुई आग की भट्टी जैसा एहसास हुआ!

शायद! उसकी बुर बुरी तरह जल रही थी। मैं उसे ऊपर से ही मसलने लगा और कुछ देर बाद मुझे उसकी बुर के पास कुछ गीला गीला लगा! मैंने अपना हाथ उसकी पैन्टी के अन्दर डाला तो, पता चला कि यह उसकी बुर का पानी था।

माया को भी मेरे खड़े लण्ड का एहसास हो रहा था! माया का हाथ मेरे खड़े लण्ड पर घूमने लगा और, मैं भी उसके दोनों चूचियों को बदल बदल कर चूसे जा रहा था! अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।

मैंने उसका सूट निकाला और उसके बड़े बड़े चूचे देखकर मैं पागल हो गया! जल्दी ही उसके ब्रा को भी निकाल कर माया के चूचियों को नंगा कर दिया, फिर एक एक कर दोनों को चूसना शुरू कर दिया और नीचे मेरा हाथ कमाल कर रहा था!

धीरे धीरे, मैंने एक उंगली उसकी बुर में डाल कर आगे पीछे करना शुरू कर दिया। अब तो वो मचल उठी मुँह से सेक्सी आवाजें निकालने लगी! अब तो माया भी मेरे लण्ड को पैंट से बाहर निकाल के सहलाना शुरू कर दिया था।

मुझे भी अब मजा आने लगा था! माया की आवाज़ तेज़ होती जा रही थी। मैंने पजामी भी खींच कर निकाल दिया पर वो बिल्कुल भी विरोध नहीं कर रही थी और अब मेरे सामने वो केवल पैन्टी में थी।

मेरा लण्ड तो अब फटने को हो रहा था! मैंने उसकी चूचियों को छोड़ उसकी बुर का उभार साफ दिखाई दे रहा था! मैंने अपना मुँह उसकी कसी बुर पर लगाया और उसकी बुर को चूसने का मजा लेने लगा।

माया अब सेक्सी आवाज़ के साथ ही तड़प रही थी, मैंने माया की पैन्टी निकाल कर उसे पूरी नंगी कर दिया! फिर चूसना शुरू कर दिया! धीरे धीरे मैंने अपनी पूरी जीभ को उसकी बुर के अन्दर डाल कर पेलने लगा!

माया की साँसें तेज़ तेज़ होने लगी, उसने अपने हाथों से मेरे सर को बड़ी तेज़ी से अपनी बुर के ऊपर दबा लिया! शायद! अब उससे सहा नहीं जा रहा था।

आखिरकार! उसने बोल ही दिया, बस अब बहुत हो गया खेल! अब पेल दे! लण्ड मेरी बुर में राजा फाड़ दे मेरी मुनिया को! यह सुनकर मुझे और जोश आ गया, मैंने माया की बुर चूसना बन्द नहीं किया जिससे माया अब अकड़ने लगी।

मैं कुछ समझ पाता, इससे पहले उसने अपना अमृत धारा मेरे मुँह पर डाल दिया। वाह! मैं तो निहाल हो गया! मैंने अपना मुँह पोछा और अपने कपड़े भी निकाल कर एक तरफ कर दिया।

मेरे लण्ड महाराज! मेरी डार्लिंग माया को सलामी दे रहे थे, मैंने माया से मेरे लुण्ड को चूसने को बोला तो उसने अपना मुँह एक तरफ कर लिया। मैं समझ गया कि उसने पहले ऐसा कभी नहीं किया है!

माया को मैंने सोफे पर ठीक से लिटाया और, मैं तैयार हो गया अपनी जान की सवारी के लिए मेरा लण्ड तो पहले ही फटने को हो रहा था!

खैर! मैंने माया कि दोनों पैरों को अलग किया, लण्ड पर थूक लगाया और बुर पर लण्ड को टिकाया और धीरे से पुश किया, माया की आह निकल गई, शायद! कुँवारी बुर थी इसलिए, खैर! मैंने दुबारा धक्का मारा!

लण्ड थोड़ा सा अन्दर गया! माया की आँखों में आँसू थे। मैं कुछ समय के लिए रुका, फिर दुबारा धक्का मारा और 4-5 धक्कों में पूरा लण्ड माया की बुर में समा चुका था!

माया अब कराहने लगी तो, मैं थोड़ा रुक गया और फिर जब वो शांत हुई, फिर मैंने चोदना चालू किया। हर धक्के के साथ उसकी आह! निकल जाती, लेकिन मैं रुका नहीं बस उसकी चुदाई करता रहा।

माया को भी अब धीरे धीरे मजा आने लगा और, वो अपने चूतड उठा उठा कर मेरा लण्ड बुर में लेने लगी!

मैं तो बस अपनी रानी को को चोदे जा रहा था! कुछ समय बाद, मुझे महसूस हुआ कि वो दुबारा अकड़ रही है! उसने अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा दिए और मुझे अपनी बाहों में जकड लिया।

इसके साथ ही माया झड़ गई और, उसकी अमृत धारा मेरे लौड़े को भिगोते हुए बह निकली! लेकिन मेरा अभी भी नहीं निकला था।

मैंने धक्के और तेज़ कर दिए! और कुछ समय बाद, मैं भी माया की बुर में झड़ गया और कुछ देर तक माया के ऊपर ही पड़ा रहा फिर बगल में लेट गया। जब वो उठी तो देखा कि उसकी बुर खून से सनी हुई थी।

मैंने उसे समझाया कि पहली बार में ऐसा होता है! आज तुम्हारी सील टूटी है! इसलिए यह खून आया है, अब दुबारा ऐसा नहीं होगा!

मैं बहुत खुश भी हो रहा था कि, चलो कुँवारी बुर तो मिली चुदाई के लिए!

माया अपनी बुर को धोने चली गई और जब वापस आई तो मेरा लण्ड फिर से खड़ा, माया को चोदने के लिए तैयार था! तभी किसी ने दरवाजे पर आवाज़ लगाई। शायद! बुआ आ गई थी।

मेरा खेल यही ख़त्म हो चुका था! मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और सोने का नाटक करने लगा और कब नींद आ गई पता ही ना चला!

जब जागा तब माया अपने घर जा चुकी थी! उसके बाद तो माया को अगले, कई दिनों तक मैंने नहीं पेला जबतक फूफा जी वापस नहीं आ गए!

आगे की कहानी मैं आपको अगले भाग में सुनाऊंगा!

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, जरुर बताइएगा। मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा!

आपका प्यारा राज

[email protected]

मैं हर दिन बुआ के यहाँ जाने और एक दिन जब बुआ हमें अकेला छोड़ बाहर गईं तब हम दोनों के दबे तूफ़ान एकदम से भड़क उठे और मेरी पहली सुहागरात माया की कुँवारी चूत चुदाई से हुई.. आपको ये देसी कहानी कैसी लगी, हमें अपने विचारों से अवगत कराएँ!

Written by

guruji

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