सब्र का फल 2

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Hindi Sex Stories Padhne Waale Mere Sabhi Readers Kya Aap Jante Hain Hafte Me 3 – 5 Baar Aur Mahine Me 18 – 20 Baar Sex Karne Waale Insaan Ko Cancer, Diabites, Aur Kaafi Bimari Hone Ka Khatra Bahut Kam Hota Hai…

लेखक – विनय

वो भी बहुत शरमाते हुए बात कर रही थी.

आँखें उसकी पहले से भी बड़ी हो गई थी. पता चला की वो देहरादून से अभी अभी दिल्ली आई है. कुछ 15 दिन पहले ही.

दिल्ली के किससे सुन कर उसको यहाँ बहुत डर लगता है, इसलिए किसी से जल्दी बात नहीं करती.

उसने अभी अभी इंजिनियरिंग से ग्रॅजुयेट किया था और आई एस की कोचिंग जाय्न करी.

आई एस बनाना चाहती थी.

अब उसको वहाँ किस तो नहीं कर सकता था और ऐसे आमने सामने खड़े होकर बात करने में उसको छू भी नहीं पा रहा था तो मैंने उसको बोला..

देखो तुमने मुझे आज इतनी चोट पहुँचाई.. अब तुम्हें ट्रीट दे कर उसका भरपाया करना होगा..

वो एकदम से मान गई. मैं उसको टोमॅटोस नाम के रेस्टोरेंट में ले गया जहाँ सारे कपल्स आते हैं.

हम दोनों, अगल बगल बैठ गये.

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

अभी शाम के 6 ही बजे थे तो खाने का टाइम तो नहीं था.

वैसे भी मुझे भूख किसी और चीज़ की ही थी. फिर भी मेरा मन था, जितना टाइम उसके साथ अभी स्पेंड कर सकते हैं उतना ही उसको अपना बनाना की तमन्ना मेरी पूरी होने के चान्सस हैं.

कल का किसको पता तो मैंने दबा कर 3-4 डिशस ऑर्डर कर दी.

वो थोड़ा कंफर्टबल हुई तो मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया.

मेरा हाथ छूते ही हल्का सा जैसे उसको शॉक सा लगा पर उसने अपना हाथ हटाया नहीं.

थोड़ी देर तक एक टेन्षन सी रही लेकिन वो फिर से कंफर्टबल हो गई और देहरादून के किस्से बताने लगी.

असल में में वो देहरादून से नहीं थी बल्कि उसके पास किसी छोटे शहर से थी.

बहुत ही कन्सर्वेटिव परिवार से थी और कहने की ज़रूरत नहीं है की उसका कभी कोई बॉय फ्रेंड नहीं रहा.

अब शायद हाथ पकड़ कर बैठने से वो इतना कंफर्टबल हो गई थी जैसे हम बॉय फ्रेंड गर्ल फ्रेंड ही हों.

अब फिर भी यह डाउट था क्या वो मुझे अपने साथ कुछ करने देगी क्यूंकी लड़की बहुत कन्सर्वेटिव थी.

रोमांटिक होना अलग बात है लेकिन चुदाई होना एक और बात.

मुझे पता था वो मुझ में बहुत इंट्रेस्टेड है.

मेरे बारे में भी बहुत सवाल पूछ रही थी और मेरी गर्ल फ्रेंड के बारे में पूछ कर मुझे छेड़ सा रही थी पर अभी डिसाइड होने वाला था की क्या हमारी गाड़ी रोमॅन्स के स्टेशन से आगे बढ़ेगी की नहीं.

फिर वो ऐसे ही मज़ाक में बोली..

तुम्हें तो लगता है लड़कियां पाटने के अलावा कोई काम ही नहीं है..

मैंने मज़किया गुस्सा दिखाते हुए उसकी गर्दन को अपने हाथ से जाकर लिया और गर्दन दबाते हुए अपनी तरफ खींचा और बोला – अभी बताऊँ मैं तुझे .?. और फिर मैंने उसकी नकल उतरते हुआ बोला – लड़कियां पाटने के अलावा कोई काम ही नहीं है…

वो बोली – छोड़ो मुझे.

मैंने फिर भी उसको दबाए रखा बोला – पहले सॉरी बोल..

वो भी शायद गेम को एंजाय कर रही थी. वो बोली – नहीं बोलूँगी…

तो मैंने और उसको अपनी तरफ दबा लिया. अब मेरा फेस उसके फेस को साइड से छू रहा था.

मैं – नहीं बोलेगी .?.

लड़की – नहीं., छोड़ो मुझे..

मैं – तो सॉरी बोल दो..

फिर भी नही बोली वो तो मैंने दूसरे हाथ से उसको पेट में गुदगुदी करना शुरू कर दिया.. . छोड़ो.. लोग देख रहे हैं .. वो हंसते हुए बोली..

मुझे लोगों की परवाह क्या.. मैं तो बस सोच रहा था क्यू ना मौके का फ़ायदा उठा कर उसके बूब्स भी एक बारी मसल दूँ.. लेकिन एकदम सो बोली..

अच्छा सॉरी.. अच्छा सॉरी.. और मेरा मन एकदम से खराब हो गया.

मैंने अपनी ग्रिप लूस करी और बोला – अब दोबारा ग़लती मत करना.. और छोड़ते हुए उसको गाल पर किस कर लिया.

वो एकदम मुझे गुस्से से देखने लगी, पर मुझे पता था उसका गुस्सा झूठा है.

मैं नॉटी वाली स्माइल ही कर रहा था. फिर वो टिपिकल लड़की स्टाइल में मुझे हाथ पर मार के बोली – गंदे .!.

अब मुझे पता था गेम ओन है. आज नहीं तो कल मुझे उसके वो मस्त होंठ चूसने को ज़रूर मिलेंगी.

अब उसके भी थोड़े भाव चेंज हो गये.

मुझे पहले से भी ज़्यादा टीज़ करने लगी और मैं भी बात बात में उसको दबोच कर अपना गुस्सा दिखाने लगा.

वो अब मुझ से एकदम चिपक कर बैठी थी. गेम ओन था लेकिन दिमाग़ जो है वो कभी संतुष्ट ही नहीं होता.

दिमाग़ में यही चल रहा था कैसे आज ही इसके साथ सेक्स कर सकूँ और पिक्चर्स आ रही थीं कैसे उसके कपड़े उतारूँगा, उसकी नंगी बॉडी कैसी दिखती होगी. पर दूसरी तरफ दिमाग़ कह रहा था इतनी आगे की सोचना सही नहीं..

अभी भी अगर गेम टाइट नहीं खेला तो काम बिगड़ सकता है.. अभी से इन सब का अटॅचमेंट करना सही नहीं.. लेकिन यह भी है की बिना कोई बोल्ड स्टेप लिए बात आगे नहीं बढ़ेगी. तो समय था कुछ करने का जिससे की बात की गति और तेज़ हो सके.

मैं हिम्मत दिखा कर बातों बातों में अपना हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया. तब तो वो कुछ नहीं बोली.

तो मैं हल्के हल्के उसकी थाइस को सहलाने शुरू कर दिया. फिर एकदम से गुस्सा करके बोली..

यह क्या कर रहे हो .?.

इस बारी उसका गुस्सा एकदम रियल था. मैंने सोचा, लो बेटा गये सारे सपने पानी में.

फिर दिमाग़ गया की रेस्टोरेंट में इतने सारे लोग हैं अभी सीन ना क्रियेट हो पर लकिली शाम का टाइम था तो असल में रेस्टोरेंट तो खाली सा ही था. ऐसा नहीं की पहली बार मैंने ऐसी सिचुयेशन फेस करी पर किसी को पाने के लिए इतना जयदा उत्सुक मैं पहले कभी नहीं हुआ..

मुझे पता था की मुझे अपने चहरे पर बिल्कुल भी डर, या गिल्ट नहीं दिखने देनी है..

मैंने बस ऐसा फेस बनाया की जैसे मुझे समझ नहीं आया की क्या बड़ी बात हो गई..

फिर उसने मेरा हाथ पा कर कर अपनी थाइस से हटा लिया और मुझ से हल्का सा अलग हो कर बैठ गई और बोली – मैं वैसी लड़की नहीं हूँ और वो और मुझे सुनाने लगी .. मैंने तुम पर ट्रस्ट किया पर तुमने ना जाने मुझे क्या समझ लिया और सुनाती चली गई.

मेरी कहानी जारी रहेगी…

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Written by

मस्त कामिनी

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