सब्र का फल 3

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Hindi Sex Stories Padhte Raahiye Aur Msst Abusive Chudai Karte Rahiye Kyunki Chudai Ke Dauran Aap Jitni Gandi Baate Karenge Actual Life Me Aapka Relation Utna Hi Strong Hoga…

लेखक – विनय

यह क्या कर रहे हो .?.

इस बारी उसका गुस्सा एकदम रियल था. मैंने सोचा, लो बेटा गये सारे सपने पानी में.

फिर दिमाग़ गया की रेस्टोरेंट में इतने सारे लोग हैं अभी सीन ना क्रियेट हो पर लकिली शाम का टाइम था तो असल में रेस्टोरेंट तो खाली सा ही था. ऐसा नहीं की पहली बार मैंने ऐसी सिचुयेशन फेस करी पर किसी को पाने के लिए इतना जयदा उत्सुक मैं पहले कभी नहीं हुआ..

मुझे पता था की मुझे अपने चहरे पर बिल्कुल भी डर, या गिल्ट नहीं दिखने देनी है..

मैंने बस ऐसा फेस बनाया की जैसे मुझे समझ नहीं आया की क्या बड़ी बात हो गई..

फिर उसने मेरा हाथ पा कर कर अपनी थाइस से हटा लिया और मुझ से हल्का सा अलग हो कर बैठ गई और बोली – मैं वैसी लड़की नहीं हूँ और वो और मुझे सुनाने लगी .. मैंने तुम पर ट्रस्ट किया पर तुमने ना जाने मुझे क्या समझ लिया और सुनाती चली गई.

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उसकी आवाज़ में थोड़ा गुस्सा था और थोड़ा दुख.

मैंने पूरी बात उसकी सुनी.

उसने सब बोल लिया फिर भी वो मेरे पास बैठी रही और अपना मुंह दूसरी ओर फेर लिया.

फिर मैंने एकदम कम आवाज़ में बोलना शुरू किया ..

अंजलि, मुझे पता है तुम एकदम सिंपल और सीधी लड़की हो… पर फिर भी वो मुंह फेर कर ही बैठी रही जैसे सुन नहीं रही हो..

हाँ, यह बात सच है की मैं तुम्हारे साथ हर वो चीज़ करना चाहता हूँ जो एक लड़का एक लड़की के साथ करता है..

ऐसा सुनते ही, वो एकदम से गुस्से से मेरी तरफ पलटी..

पर मैंने अपना हाथ दिखा कर बोला – लेकिन मेरी बात सुनो.. ऐसा इसलिए नहीं है की क्यूंकी मुझे लगता है की तुम एक आसान या चीप लड़की हो पर ऐसा इसलिए है की मुझे आज तक किसी के साथ इतनी जल्दी इतना डीप कनेक्शन फील नहीं हुआ.. उसका गुस्सा ऐसा लगा की थोड़ा शांत हुआ.

फिर मैंने उसको पूरा बताया, हर छोटी छोटी बात जो मुझे उसके बारे में अच्छी लगी और वो जैसे पिघलती सी चली गई.

दोस्तों यह बात मैं केवल उसको सुनाने के लिए नहीं बोल रहा था… मुझे वाकई में उसके साथ स्पेशल फील हुआ था. पर फिर आदमी तो आदमी रहेगा ही.. चुदाई तो निकल नहीं सकती आदमी के दिमाग़ से.

वो फिर शांत हुई और बोली – इसमें कुछ ग़लत नहीं है.. मुझे गुस्सा नहीं करना चाहिए था.. लेकिन मैं यह सब अभी नहीं कर सकती.. जहाँ से मैं हूँ वहाँ तो शादी के बाद ही यह सब करते हैं..

फिर मैंने बोला – मैं तुम्हारी बात को पूरी तरह समझ रहा हूँ और ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जो तुम्हें कंफर्टबल ना हो.. और चलो अब हंस भी दो और मैंने पेट में गुदगुदी करके उसको हँसया..

वैसे तो यह कपल वाला रेस्टोरेंट था पर पता नहीं कहाँ से एक फैमिली हमारे सामने वाली टेबल पर आ कर बैठ गई.

रेस्टोरेंट में वैसे भी इससे ज़्यादा कुछ हो नहीं सकता था. तो मैं उसको बोला – तुम यहाँ पर नई नई आई हो ना.. मैं तुम्हें एक मस्त पार्क दिखता हूँ..

और फिर मैं उससे पार्क में ले गया.

पार्क में ऑलरेडी कुछ कपल्स थे जो एक दूसरे की बाहों में थे.

कुछ कपल किस कर रहे थे और कही कोने में एक लड़का एक लड़की की पैंट में हाथ डालने की कोशिश कर रहा था पर लड़की डालने नहीं दे रही थी.

ऐसे माहौल में अंजलि भी शायद थोड़ी अराउज़ हो गई और लोगों को देख कर सोच में फ़र्क आता ही है.

वो कोशिश कर रही थी उन कपल्स की तरफ ना देखे पर मुझे पता था उसका पूरा ध्यान वहीं है.

वो फिर अपने को संभाल कर बोली..

विनय यह सब कितना अजीब है.. हम आज ही मिले और मुझे पता है तुम्हारी लाइफ में कईं लड़कियां हैं फिर भी मैं तुमसे इतना उत्सुक फील कर रही हूँ..

उसने जैसे ही यह बोला, मैंने तुरंत उसके चहरे को हाथ में ले कर उसके लिप्स को किस कर लिया.

वो भी मानो जैसे इसी मोमेंट का इंतेज़ार कर रही थी और मुझे ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी.

मैं किस कर बोला – आई लव यु अंजलि..

वो भी बोली आई लव यु टू विनय और फिर दोबारा हम किस करने लगे.

मैं एक एक करके उसके होठों को हल्के हल्के सक किया.

हम दोनों के होंठ एकदम गीले हो चुके थे.

बीच बीच में उसके मैं अपनी जीभ भी उसके होठों और दातों के बीच फेर रहा था.

वो किस्सिंग से ओन हो रही थी. उसने अपना हाथ मेरे घुटने के जस्ट ऊपर थाइ पर रख दिया और धीरे धीरे मसलने लगी.

मैंने भी अपने हाथ से घुटने के पास उसकी इन्नर थाइ की मसाज करने लगा.

दूसरा हाथ से में उसकी गर्दन को पकड़ कर उस होंठ चूम रहा था.

धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी थाइ में ऊपर की और बढ़ने लगा.

अब थाइ मसाज करते हुए मेरी उंगलियाँ उसके टाँगों के बीच में हल्के हल्के छूने लगी लेकिन मैंने जल्दबाज़ी नहीं करी पहले की तरह. थाइ मसाज करते करते ही मैंने उसकी चूत को रब करना शुरू किया.

उसकी साँसे और तेज़ हो गई और अब मैं उसकी चूत को सलवार के ऊपर से सहलाने लगा.

उसकी सलवार भी गीली हो गई थी.

मैं फिर अपना हाथ उठा कर उसकी सलवार और पैंटी के अंदर में डाल दिया. मेरा हाथ उसकी नंगी चूत को छू पाता उससे पहले ही उसने उससे रोक दिया और बोली ..

विनय, यहाँ नहीं….

मैंने उसको समझाया की वहाँ कोई ख़तरा नहीं है.. लेकिन वो नहीं मानी पर मेरे सिर पर भी उसकी चूत का भूत सवार था ..

मेरी कहानी जारी रहेगी…

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Written by

मस्त कामिनी

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