सब्र का फल 4

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Hindi Sex Stories Padhne Waali Female Readers Jan Lijiye Ki Ek Aam Aadmi Ka Ejacuation Time 9 – 11 Minute Ka Hota Hai…

लेखक – विनय

वो किस्सिंग से ओन हो रही थी. उसने अपना हाथ मेरे घुटने के जस्ट ऊपर थाइ पर रख दिया और धीरे धीरे मसलने लगी.

मैंने भी अपने हाथ से घुटने के पास उसकी इन्नर थाइ की मसाज करने लगा.

दूसरा हाथ से में उसकी गर्दन को पकड़ कर उस होंठ चूम रहा था.

धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी थाइ में ऊपर की और बढ़ने लगा.

अब थाइ मसाज करते हुए मेरी उंगलियाँ उसके टाँगों के बीच में हल्के हल्के छूने लगी लेकिन मैंने जल्दबाज़ी नहीं करी पहले की तरह. थाइ मसाज करते करते ही मैंने उसकी चूत को रब करना शुरू किया.

उसकी साँसे और तेज़ हो गई और अब मैं उसकी चूत को सलवार के ऊपर से सहलाने लगा.

उसकी सलवार भी गीली हो गई थी.

मैं फिर अपना हाथ उठा कर उसकी सलवार और पैंटी के अंदर में डाल दिया. मेरा हाथ उसकी नंगी चूत को छू पाता उससे पहले ही उसने उससे रोक दिया और बोली ..

विनय, यहाँ नहीं….

मैंने उसको समझाया की वहाँ कोई ख़तरा नहीं है.. लेकिन वो नहीं मानी पर मेरे सिर पर भी उसकी चूत का भूत सवार था ..

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मैंने बोला – चलो मेरे घर चलते हैं..

वो बोली – नहीं इतनी जल्दी नहीं.. हम आज ही मिले हैं…

लेकिन मैं फिर भी हार नहीं मानी.. घर में हम यह सब कुछ नहीं करेंगे.. मैं तुझे मस्त मैंगो शेक बना कर पिलाऊंगा..

वो बोली – सच .?.

मैंने बोला – हाँ सच और मन ही मन सोचा की मैंगोस तो है नी नहीं घर में.

एनीवेस मैं उसको अपनी बाइक पर बिठा कर घर ले आया.

रास्ते भर यही सोच रहा था किस किस पोज़िशन में चोदूंगा उसे.

दोस्तों बात जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी इमॅजिनेशन भी बढ़ रही थी. लेकिन फिर भी मैं इसी में बिलीव करता हूँ की जब तक लंड चूत के अंदर ना हो तब तक कहीं भी कट सकता है तो मैंने अपने आप को अटॅचमेंट से संभाला.

रूम मेरा 1 फ्लोर पर है. वो मेरे आगे आगे चल रही थी और मैं पीछे सी आ रहा था..

पीछे से मैं उसकी इधर उधर मटकती गाण्ड के मज़े ले रहा था..

दोस्तों मन तो था की वहीं के वहीं उसकी गाण्ड को चबा जाऊं पर कहते हैं ना सब्र का फल मीठा होता है.. मुझे पूरी आशा थी की सब्र का फल ज़रूर बहुत बड़ा, सॉफ्ट और मस्त होगा.

फ्लैट के अंदर मैं उसको रूम में ले आया.

वो बोली – चलो फटाफट मेरे लिए माँगो शेक बनाओ…

मैंने बोला – ज़रा रूको तो सही.. 10-15 मिनिट में बनाते हैं.. तब तक एक मेरे पास एक मस्त मूवी है, मैं दिखता हूँ..

मुझे पता है दोस्तों आप सोच रहे होगे मैं उसको पॉर्न मूवी दिखाऊंगा पर ऐसा नहीं था..

मेरी एक पसंदीदा रोमांटिक मूवी है “बिफोर सन्राइज़”.. मैंने वो मूवी लगाई अपने लॅपटॉप पर और हम साइड बाइ साइड लेट कर देखने लगे मूवी को.

मन तो लेकिन मेरा कहीं और ही था और शायद उसका भी.

मूवी तो चुदाई के बाद देखनी बनती है पर खैर मूवी भी एक बहाना था साथ बिताने का.

फिर मूवी देखते देखते मैंने उसके कान पर किस किया और फिर उसके कान के पीछे..

फिर उसकी गर्दन पर..

उसने भी अपनी आँखें बंद कर लीं और मुंह बिस्तर में दबा कर लेट गई.

मैंने उसकी सूट के पीछे से ज़िप खोली और उसको पीठ पर किस किया.. फिर मैं नीचे आ गया और उसकी सूट को खींच कर ऊपर करने लगा.

वो बस अपना मुंह छुपा कर लेटी हुई थी और हल्की हल्की सिसकियाँ ले रही थी..

फिर मैंने उसका सूट ऊपर करके नीचे से उसकी बॅक पर किस किया और फिर उसकी वेस्ट पर किस किया..

फिर और ऊपर करके उसकी पीठ पर किस किया..

बीच बीच में वो आ कर देती थी..

फिर मैंने उसकी सलवार खींच कर उतरनी शुरू की..

पैंटी भी साथ ही साथ उतारने लगा..

जैसे जैसे उसकी स्किन रिवील हो रही थी..

मैं उससे किस करता जा रहा था.. वो भी मचलने सी लगी..

जैसे ही उसकी पोन्द की दरार जहाँ शुरू होती है वहाँ मैंने किस किया तो उसने फिर से अपनी सलवार खींच कर ऊपर कर ली पर मैं भी इस मुकाम पर आ कर हार नहीं मानने वाला था..

मैंने दोनों हाथों की उंगलियों को सलवार और पैंटी की एलास्टिक में फँसा दिया और एक झटके में दोनों को नीचे खींच लिया.

दोस्तों, जो एक पल के लिए मेरे सामने समा था.. मैं तो मानो बेहोश ही हो गया..

उसकी गाण्ड एकदम गोल गोल जिसको बोलते हैं ना “बबल बट” पर फिर उसने तुरंत अपने हाथों से अपनी गाण्ड छुपाने लगी..

सलवार तो अब मैंने पूरी खींच ली थी की कहीं दोबारा ना चड़ा ले..

अब तो बस उसकी गाण्ड मेरे लिए पूरी खुली थी.. हाथ से कितना छुपात.. जहाँ भी मुझे जगह मिलती मैं किस कर लेता..

वो भी लेकिन गिव उप नहीं कर रही थी..

फिर भी बचाने के कोशिश कर रही थी.. तो फिर मैंने उसके दोनों हाथ अपने हाथों से पकड़ कर अलग कर दिए और अपना चहरा उसके गांड में घुसा दिया..

मुझे पता था उसका पहली बार है तो थोड़ा इनसेक्यूवर फील कर रही होगी तो मैंने उसको शांत किया..

आई लव यु बेबी..

और फिर मैं उसकी गाण्ड को अपने हाथों में पकड़ कर चूमने लगा..

उसने भी अपने हाथ मेरे हाथ के ऊपर ही रख लिए और मैंने उसके दोनों चीक्स को खूब जम के चूमा और काटा..

वो भी कभी चीख रही थी तो कभी ऊहह.. आ.. कर रही थी..

फिर मैं अपने दोनों हाथों को उसके चीक्स पर रख कर अपने अंघुटे से उसकी गाण्ड को खोला तो उसने फिर एकदम से अपने हाथों से अपनी गाण्ड कवर कर ली..

मैंने भी सोचा की पहली बार में ही इतना लक प्रेस करने की ज़रूरत नहीं है..

मैं नीचे आ गया और उसकी चूत को चूमने लगा..

उसकी चूत एकदम रस में भरी हुई थी..

जैसा कहा था ना.. सब्र का फल वाकई बहुत रस भरा था..

मैंने उसको अपनी जीभ से इतना चाटा और चूसा की वो एक बार झड़ गई..

मेरी कहानी जारी रहेगी…

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Written by

मस्त कामिनी

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