औरत की आग 2

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लेखक – सुमित पहलवान
सम्पादिका – मस्त कामिनी

वो बोली – अरे वाह!! सुमित… कितने दिन बाद, देख रही हूँ तुम्हें…

वो लगातार, मुझे नीचे से ऊपर देखे जा रही थी..

उनकी निगाह मुझे टटोल रही थी.. शायद सोच रही हो कहीं ग़लत पैसे तो खर्च नहीं किए..

वैसे उनकी निगाह, काफ़ी प्यासी सी भी थी..

जब वो अपने होंठों को काट रही थी तो एक पल को तो मुझे ऐसा लगा की ये मुझे से अभी लिपट जाएगी..

मैं भी उसके हाब भाव देख कर, मुस्कुरा रहा था..

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फिर उन्होंने लड़के को पानी लेने भेज़ दिया और लड़के के जाने के तुरंत बाद, वो मेरे पास बैठ गई और धीरे से बोली – तुम, किसी बात की चिंता मत करना… तुम चाहो तो 2-3 दिन भी यहाँ रुक सकते हो… मैंने बड़ा सोच कर प्लान बनाया है…

मैंने कहा – हाँ प्लान तो आपका मस्त है पर मुझे, कल ही वापस जाना होगा…

मुझे लगा, वो कुछ मायूस हो गई..

असल में, मुझे लगा की कहीं दो तीन रुकने में पैसे की समस्या ना हो और फिर अभी तक मुझे वो इतनी आकर्षक नहीं लगी थी की मैं अपना नुकसान कर लूँ..

खैर, लड़का पानी लेकर आ गया..

अभी दिन के, 11 बज रहे थे..

वो बोली – सुमित भैया, खाना तैयार है… आओ, खाना खा लो…

मैं उठा और उससे पूछ कर, बाथरूम की तरफ जाने लगा तभी उनका लड़का हाथ मे बेट लिए उनसे बोला – मम्मी, मेरा आज़ मैच है… मैं खेलने जा रहा हूँ…

वो बोली – ठीक है, जा… होम वर्क हो जाना चाहिए, पर…

मैं और वो, अब दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे..

मैं नहा धो कर, बाथरूम से होकर वापस आया और फिर मैंने और उन्होंने साथ में खाना खाया..

खाना खाने के बाद, मैं आकर सोफे पर बैठ कर टीवी देखने लगा..

करीब 10-15 मिनट बाद, वो काम ख़तम करके आ गई..

दरवाज़ा बंद कर, वो मेरे पास आकर बैठ गई..

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वो, गुलाबी रंग की साड़ी पहने हुए थी..

अब मैंने, गौर करना शुरू किया..

उसके चुचे, बहुत बड़े थे..

“36 या 38” के होंगे..

गाण्ड और जांघें भी, बहुत माँस लिए हुए थीं..

उसे गौर से देखने पर, अब मेरा लण्ड खड़ा हो गया..

इधर, वो मुझे देख रही थी और मैं उन्हें..

मैंने सीधे उनका चेहरा आपने दोनों हाथों में लिया और उसके होंठों को, अपने मुंह में भर लिया..

उन्होंने भी मुझे बाहों में भर लिया और वो भी मेरे होंठ चूसने लगी..

हम दोनों, सोफे पर ही बैठे थे..

वो मुझसे, लिपटे चली जा रही थी..

मैं भी उन्हें समेटने की कोशिश कर रहा था..

किस करते हुए, मैंने उनके एक पैर को पकड़ कर अपनी कमर पर रखना चाहा पर पैर भारी था..

फिर उसने ही ज़ोर लगा कर पैर ऊपर उठाया और मेरी कमर पर रख दिया..

अब मैंने “फोर प्ले” शुरू किया, उसे ऊपर से नीचे तक चूमते हुए..

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सबसे पहले मैं, उनके मम्मे दबाने लगा..

यार, बहुत बड़े बड़े मम्मे थे..

दोनों हाथों में भी, एक ना आए..

मैंने एक मम्मे को दोनों हाथों से दबाया, जब मुझे मज़ा आया..

एक हाथ में उसका चुचा, समा ही नहीं रहा था..

मैं उसके पेट और नेवेल को चूमते हुए नीचे पहुँचा और उनकी साड़ी ऊपर कर दी..

अब मैंने मम्मे को दबाते हुए, अपना सर नीचे करके उसकी गुफा (चूत) में घुसेड दिया..

उन्होंने भी मेरा सर, अपनी दोनों जांघों से दबा दिया..

अब मैंने अपने हाथ उनके मम्मे पर से अलग कर, उनकी दोनों जांघों पर और गाण्ड पर फिराने लगा और लगातार, उनकी चूत चाटता जा रहा था..

वो तो, हुंकार भरने लगी..

ज़ोर ज़ोर से, गाण्ड ऊपर उछालने लगी..

सीईए सीई हूंम्म अहह ह आआ आ आह उःमन… की ज़ोर ज़ोर से आवाज़ निकाल रही थी..

आआह, बहुत मज़ा आ रहा है सुमित… आहह सीई…

मैंने तो कभी सोचा ही नहीं था की उसे भी मैं, मज़ा दे सकता था..

ये सब कहते हुए, अब उसने अपने हाथों से मेरा सर अपनी चूत पर ज़ोर से दबा दिया..

फिर, वो बोली – सुमित, आज पहली बार कोई मेरी चूत चाट रहा है… इससे पहले तो मुझे मालूम ही नहीं था की ज़न्नत तो यहाँ है… कितना मज़ा आता है, चूत चटवाने में… वाह सुमित, खुश कर दिया तुमने मुझे… पूरे पैसे वसूल हो गये, सच में…

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ये कह कर, वो पहले से भी तेज़ हुंकारे भरने लगी – और ज़ोर से चाट… सी सीईए हूंम्म ह आईईई हुम्म स उःन आ आ आ आ आ… की लगातार सिसकारियाँ, निकाल रही थी..

मुझे भी मज़ा आ गया और करीब 10 मिनट तक, मैं उनकी चूत चाटता रहा..

इस बीच, वो कई बार झड़ चुकी थी और मेरे पूरे मुँह और गले में उसका पानी था..

फिर अब उन्होंने खुद ही, मेरा पैंट खोलना शुरू किया और एक ही झटके में मेरे सारे कपड़े उतार दिया..

दो पल में, मैं बिल्कुल नंगा खड़ा था..

उनके सामने, मेरा 7 इंच का लण्ड, उनकी चूत को सलामी दे रहा था..

वो अभी भी, सोफे पर आधी लेटी हुई थी..

ब्लाउज आधा खुला था और साड़ी, ऊपर कमर तक थी..

मेरा लण्ड देख कर, वो सब कुछ भूल गई और लपक कर, मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली – वाह!! सुमित भैया, क्या मस्त लण्ड है, तुम्हारा…

अब वो एक हाथ से लण्ड पकड़ कर, दूसरे हाथ से सहलाने लगी..

मेरा लण्ड, बिल्कुल टन हुआ पड़ा था..

फिर उन्होंने मेरे लण्ड की चमड़ी ऊपर की, जिससे मेरे लण्ड का “लाल सुर्ख सुपाड़ा” बाहर आ गया..

मुझे कुछ दर्द तो हुआ, चमड़ी खींचने से पर क्या करें..

अगर पलंग पर पड़ी, अपनी गर्ल फ्रेंड या बीबी लोगों को नीरस, सीधी साधी, मासूम और अबोध लगती हो तो कभी जिगोलो बनके देखें..

“औरत की आग” क्या होती है, इस का असली एहसास तभी होगा..

कहानी जारी रहेगी.. ..

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Written by

मस्त कामिनी

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