शानदार चूत 5

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Hindi Sex Stories Ke Category Me Meri Sex Story Par Sumit Pehlwaan Ki Akhiri Kahani…

लेखक – सुमित पहलवान
सम्पादिका – मस्त कामिनी

मैं बताना चाहता हूँ की “औरत की झिल्ली” फटने में, जितना ज़्यादा वक़्त लगता है वो इतनी ही मोटी होती जाती है..

सही उम्र, यानी 16 से 20 के दौरान “कुंवारेपन की झिल्ली” फट जाने से, लड़की को उतनी तकलीफ़ नहीं होती जितनी उसके बाद होती है..

खैर, हम कुछ देर रुक गये..

मेरा लण्ड, उसकी चूत में था..

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पहली बार, मुझे भी बेपहना दर्द हो रहा था..

कुछ देर बाद, दर्द कम होने पर मैं हिम्मत करके आगे पीछे हुआ..

उसकी ज़रा सी बेसब्री ने, सारा मज़ा खराब कर दिया था..

कुछ देर बाद, अब कुछ ठीक लगने लगा था..

कुछ भी हो, एक “अप्सरा सा बदन” जो सामने था..

सो, फिर मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाई..

उसे भी शायद, मज़ा आने लगा..

वो भी अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर, मेरा साथ दे रही थी..

करीब 10 15 मिनट तक, मैंने बहुत से पोज़ में उसकी चुदाई की..

इतने समय में ना जाने, वो कितनी बार झड़ चुकी थी और मैंने खुद को कैसे रोका था, ये मैं ही जानता था..

फिर, वो बोली की अब बस, सुमित… जो हो, सो हो… मुझ से सहन नहीं हो रहा है… मेरी आत्मा, ना जाने कब से प्यासी है… खोल दो ना, मेरा बंद दरवाजा प्लीज़… मैं जब 15 साल की थी, तब से मेरा मन होने लगा था… चूत में “मीठी सी खुजली” मचने लगी थी… उस वक़्त, मैं दसवीं क्लास में पढ़ती थी… अब जाकर 29 साल की उम्र में, मैंने “नंगा लण्ड” देखा है… मैं तुम्हारी बहुत एहसान मंद हूँ… सुमित, तुम क्या जानो कितनी बार तो सोते सोते ही मेरी चूत ने अपने आप पानी छोड़ दिया… और तो और, मैंने तुम्हारी तरह “प्रो” बनने तक का सोच लिया था… और ये सब कहकर, उसने मुझे बाहों में भर लिया..

मैंने भी उसकी बातें सुन कर, स्पीड बढ़ा दी..

करीब 2-5 मिनट और करने के बाद ही, वो फिर से छूट गई..

पहली बार के कारण, खून और इतना पानी निकलने के कारण और दर्द के कारण, वो अब बहुत थक चुकी थी..

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अब भी मैंने छूट नहीं की थी (आख़िर जिगोलो हूँ, इतना तो संयम है ही.. असल में तो आज ही मेरा इन्तेहान था..) तो वो बोली की छूट क्यूँ नहीं रहे हो, सुमित… अब मेरी कमर दर्द कर रही है…

मैं मुस्कुराया..

मैं उनको तो संतुष्ट कर चुका था पर मैं भी संतुष्ट होना चाहता था..

मैंने कहा – ठीक है… अच्छा, तुम मेरे ऊपर आ जाओ…

वो बोली – ठीक है… पर जल्दी कर देना…

मैंने कहा – ठीक है…

वो, मेरे ऊपर आई..

मैंने उसकी चूत में लण्ड डाला और उसने अपनी चूत का पूरा भार, मेरे लण्ड पर रख दिया..

पूरा लण्ड रगड़ खाते हुए, अंदर गया..

ऐसा लगा पूरा लण्ड छिल जाएगा..

वो कुछ आगे पीछे हुई, मुझे अच्छा लगने लगा..

फिर मैंने अचानक, उसकी कमर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे कुछ ऊपर उठा दिया..

अब उसका भार, उसके ही दोनों घुटनों पर था..

अब मैंने अपने दोनों पैर बिस्तर पर टीका कर, अपनी गाण्ड ऊपर उठा दी और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत पर अपने लण्ड से वार करने लगा..

मुझे कुछ परेशानी हुई तो मैं रुका और अपने सर के नीचे एक तकिया रख लिया और फिर शुरू हो गया..

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मैं कम से कम 100 की रफ़्तार से, उसे चोद रहा था..

वो भी, बुरी तरह हिल रही थी..

करीब 2-5 मिनट तक लगातार चोदने के बाद, मैंने उसकी चूत में सारा पानी छोड़ दिया और अब मैं शांत पड़ गया..

वो मेरे ऊपर लेट गई..

10 मिनट तक, हम यूँही लेटे रहे..

फिर हम अलग हुए और दोनों बाथरूम गये..

हम ने अपने आप को साफ़ किया..

हम दोनों ही नंगे थे..

शरीर, पसीने से लथपथ हो रहा था तो मैंने शावर खोल दिया..

अब हम दोनों, उसके नीचे खड़े थे..

उसका “गीला नंगा बदन” देख कर, मैं फिर से जोश में आ गया..

हम दोनों फिर से एक दूसरे से लिपट गये और हमारे ऊपर पानी, लगातार गिरे जा रहा था..

हम 15 मिनट तक, एक दूसरे के शरीर से खेलते रहे..

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फिर मैं उसके पीछे आया और उसे आगे की तरफ झुका दिया और अपना लण्ड लेकर, पीछे से उसकी गाण्ड में डालना चाहा..

उसने फ़ौरन, मना कर दिया..

मैं भी मान गया, मानना ही था..

फिर मैंने अपना लण्ड उसी तरह उसे और आगे झुका कर, उसकी चूत में घुसा दिया..

वो झुकी हुई थी और दोनों हांतों से नल पकड़े हुए थी..

मैंने इस बार, तुरंत आगे पीछे होना शुरू किया..

इस बार उसे भी, शुरू से मज़ा आने लगा..

वो भी, अपनी गाण्ड आगे पीछे कर रही थी..

उफ्फ!! क्या नरम गाण्ड थी..

उसके आगे पीछे होने से “फट फट” करके मुझसे टकरा रही थी..

अब मैंने, अपनी स्पीड बढ़ाई..

मेरे दोनों हाथ, उसके चुत्तड़ को ज़ोर से पकड़े हुए थे..

5 मिनट की “जबरदस्त चुदाई” के बाद, वो बोली की मेरी कमर दर्द कर रही है…

इस बार मैंने भी अपना “प्रोफेशन” साइड में रखा और अपनी स्पीड बढ़ा दी..

ज़ोर ज़ोर से दो तीन धक्के मार कर, उसकी चूत में ही पानी छोड़ दिया.. वो भी बिना कॉंडम के..

पानी हमारे ऊपर, लगातार गिरे जा रहा था..

गिरते पानी में चुदाई का क्या आनंद आता है ये वो ही समझ सकता है जिसने ऐसा किया हो..

फिर हम दोनों अलग हुए और एक दूसरे को बाहों में भर कर, खूब प्यार किया..

रात के 3 बज रहे थे और हम, बाथरूम में नहा रहे थे..

नहा कर, हम लोग बाहर आए..

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बबिता, बहुत खुश थी..

हमने अपने अपने कपड़े पहने और निकलने के लिए, तैयार हो गये..

बबिता ने अपने पर्स में से रुपये निकाल कर, मुझे दिए और बोली – शुक्रिया सुमित, तुम ना होते तो जीवन के इस सुख से ना जाने, कब तक मैं महरूम रहती…

ये कहकर, वो फिर मुझसे लिपट गई और बोली – तुम्हें, जाने देने को मेरा बिल्कुल मन नहीं कर रहा है, सुमित… जी चाह रहा है, जूस के साथ ग्लास भी खरीद लूँ…

मैंने उसे चूमा और उसके साथ तुरंत बाहर आ गया..

बरामदे में आने पर, मैंने देखा की उधर अभी लोग एकत्रित थे..

हम भी भीड़ में शामिल हो गये और अलग अलग हो गये..

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मैं धीरे धीरे, बाहर की और निकलने लगा..

बबिता भी अपनी सहेलियों के साथ शामिल हो गई थी..

मैंने मूड कर देखा तो बबिता मुझे ही देख रही थी..

मैंने उसे एक हल्की मुस्कान दी और तेज़ी से बाहर निकल गया..

किसी को कोई शक नहीं हुआ..

Hindi Sex Stories – Shandaar Chut 5

Written by

मस्त कामिनी

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