मज़बूरी या मज़ा 1

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लेखिका – रेणुका शुक्ला
सम्पादिका – मस्त कामिनी

“एम एस एस” के सभी पाठकों को मेरा स्नेहपूर्ण नमस्कार!!!

साथ ही कामिनी जी को साइट की सफलता और शानदार संचालन पर ढेरों बधाई!!

मैं बताना चाहूँगी कि मैं बहुत जल्द इस साइट की रेग्युलर रीडर बन गईं हूँ।

तो दोस्तो, मेरा नाम रेणुका शुक्ला है…

उम्र लगभग 34 साल है… पहले कोई पुरुष मेरा फिगर पूछता तो मैंने उसे कसके एक तमाचा मारा होता, परंतु अब मुझे अपना फिगर बताने में कोई हानि नहीं लगती… मेरा फिगर है – “36-30-38”

यूँ तो मैं दो लड़कियों की माँ हूँ पर पिछले कुछ दिनों में मैंने अपने शरीर पर काफ़ी ध्यान दिया है!!

पिछले कुछ दिनों में मैंने यहाँ बहुत सारी स्टोरी पढ़ी हैं, काफ़ी अच्छी भी लगीं…

खास बात यह लगी की यह साइट अपनी दिल की बात कहने का सर्वोत्तम माध्यम है!!

काफ़ी दिनों से मैं भी सोच रही थी की मैं भी अपनी “दिल की दास्तान” आप से शेयर करूँ पर दिल में ना जाने क्यूँ एक अंजान डर बैठा था… आख़िरकार, आज हिम्मत हो ही गई… …

तो मित्रो, ये “दास्तान” आज से लगभग दो साल पहले की है।

दोस्तो, मैं एक ‘विडो’ हूँ और मेरे पति की डेथ 2।5 साल पहले हुई थी।

मेरी दो लड़कियां है। एक 10 और एक 7 साल की। जब उनकी डेथ हुई तो मैं एक साधारण हाउसवाइफ थी और घर खर्च का सारा बोझ उन्हीं पर था।

उनकी अचानक डेथ से घर का सब लोड मुझ पर आ गया।

कुछ दिन तो सरलता से कट गये और 2 महीने होते होते मैं एक जॉब पर लग गई। सैलरी कुछ ख़ास नहीं थी पर जैसे तैसे घर का गुज़ारा कर लेती थी।

हमारे घर में हम चार लोग रहते थे। मैं, मेरी दो लड़कियां और मेरी सास।

मेरी सास भी ‘विडो’ थीं। उनके लिए भी मैं ही एक सहारा थी…

इनकी मृत्यु के बाद मैं अब उनके लिए उनकी बेटी जैसी हो गई थी!! मेरी सास दुनिया के विपरीत, मुझसे बहुत प्यार करती थीं।

मेरे ससुर की भी डेथ जवानी मैं ही हुई थी और मेरी सास ने ही मेरे पति को पढ़ाया और उनकी परवरिश की थी।

वो बखूबी समझती थीं की मुझ पर क्या गुजरती थी…

खैर, अब स्टोरी पर आती हूँ…

यूँ तो सब ठीक ही चल रहा था… पर एक दिन अचानक शाम को मेरे मोबाइल पर कोई “अनजान नंबर” से फोन आया!!

मैंने फोन उठाया और सामने से किसी आदमी की आवाज़ सुनाई दी।

अनजान पुरुष – रेणुका मैडम… ??

मैं – जी, बोलिए।

अनजान पुरुष – नमस्ते मैडम, मैं शुभम परिहार बोल रहा हूँ… आप मुझे नहीं जानती, पर मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ… अगर आपकी अनुमति हो तो…

मैं – (थोड़ी टेन्स हो गई की आख़िर ये कौन है और क्या बात करना चाहता है, मुझसे… ??) – हाँ, बोलिए।

अनजान पुरुष – मैडम, मैं सीधे-सीधे आपसे पूछता हूँ; क्या आपको पैसे की ज़रूरत है… ??

मैं – हाँ बिल्कुल, है। पर आपको इससे क्या… ?? (मुझे ज़रूरत थी, क्यूँ की बच्चों की स्कूल के फीस भरनी थी।)

अनजान पुरुष – मैडम, मैं आपकी समस्या का समाधान कर सकता हूँ… आपको बहुत सारे पैसे मिलेंगे… अगर आप मेरी बात पर गौर करेंगी तो… शायद ये आपको अच्छा ना लगे, लेकिन शांति से एक बार ज़रूर सोचना… …

(मैं कन्फ्यूज़ थी!!)

मैं – क्या हुआ… ?? साफ़ साफ़ बोलिए ना, क्या है… ??

अनजान पुरुष – देखिए मैडम, मुझे घुमा-फिरा कर बात करना नहीं आता… तो थोड़ी समझदारी से सुनिए; आपको सिर्फ़ 1 से 2 घंटे के लिए किसी पुरुष के साथ सोना होगा… फोन कट करने से पहले मेरी बात ध्यान से सुनिए… इसके आपको पैसे भी बहुत अच्छे मिलेंगे और किसी को ना पता चले; उसका पूरा पूरा ख्याल भी रखा जाएगा… …

मैं – (चिल्ला कर) तुमको शरम नहीं आती… ?? क्या बके जा रहे हो… ?? तुम्हें मेरा नंबर कैसा मिला और तुम मुझे कैसे जानते हो… ??

अनजान पुरुष – देखिए मैडम, ये तो मेरा जॉब है… और मुझे कोई हैरानी नहीं हुई, आपके रिएक्शन पर… अगर आप ऐसा करेंगी तो, आप का भी फ़ायदा है और मेरा भी… अब तक तो आप समझ गईं होंगीं मैडम, “बिना मर्द की औरत” की साड़ी इस शहर में हर मर्द खींचने को बेताब है… खैर, फ़ैसला आप का है… शांति से सोचिए, मैं दुबारा आपको फोन करूँगा… अगर आपका फ़ैसला बदल गया, तो बता देना… वैसे मैं आपको बता दूँ, लगभग सभी का फ़ैसला बदल ही जाता है… … …

उसकी बातें सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने फोन काट दिया।

मैं उस पर इतनी ज़ोर से चिल्लाई थी कि बस स्टॉप के लोग मुझे देखने लगे थे।

मुझे रोना सा आ रहा था और पति की याद भी, क्या उनके होते हुए भी कोई इतनी हिम्मत कर सकता था… ??

क्या “सती प्रथा” औरत को इसी तिरस्कार से बचाने के लिए थी… ??

जी चाह रहा था, धरती फट जाये और मैं उसमें समां जाऊं!! !!!

मुझे उम्मीद है, आपको अब तक की “दास्तान” पसंद आई होगी…

ये लम्बी दास्तान जारी रहेगी और मुझे उम्मीद है इस दौरान आप का साथ मुझे निरंतर मिलेगा।

धन्यवाद

Written by

मस्त कामिनी

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