शानदार चूत 4

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Meri Sex Story Par Padhte Rahiye Aapki Sex Story…

लेखक – सुमित पहलवान
सम्पादिका – मस्त कामिनी

गोरी चूत देखना का मौका, बहुत ही किस्मत से मिलता है..

मैंने, अपना काम शुरू कर दिया..

अपने दोनों हाथ से उसके नितंब सहलाते हुए, उसकी चूत चाटने लगा..

वो अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से ऊपर उछालने लगी..

“सी सी” की आवाज़ निकालने लगी..

करीब 15 मिनट तक चूत चाटते हुए, उसने 3 बार उसने अपना पानी छोड़ा..

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उसे बहुत आनंद आ रहा था..

फिर, मैं अलग हुआ तो वो भी बैठ गई और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी..

इधर, मैंने अपना पैंट खोलना शुरू किया..

उसने शर्ट उतारने के बाद, मेरे सिने पर बहुत प्यार से हाथ फेरा और अपने होंठ, मेरे सिने से लगा दिए और ज़ोर ज़ोर से मेरे सिने पर होंठ फेरने लगी..

यहाँ, मैं पैंट उतार चुका था..

फिर, मैंने उसका ब्रा अलग किया तो उसके मम्मे बाहर आ गये..

इतने बड़े दूध देख कर, मैं भी बेकाबू हो गया और मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया..

खास बात ये थी की बड़े दूध के बाबजूद, वो बिल्कुल गोल थे और निप्पल एकदम छोटे..

गोरी चूत, बड़े और बिल्कुल गोल, सुडोल चुचे, छोटे से भूरे निप्पल..

ऐसा संयोग, बहुत कम ही नसीब होता है..

सच कहूँ तो संपूर्ण औरत थी वो, जो मुझ जैसे जिगोलो को भी कभी कभी ही नसीब होती है..

खैर, यहाँ उसको सीने से चिपकाने पर उसके मम्मे मेरे सीने से दब गये..

इस से, उसे और मुझे भी अच्छा लगा..

कुछ देर बाद, मैंने उसके नेवेल के नीचे साड़ी के अंदर हाथ डाल दिया..

वो मुझे देखने लगी की मैं आख़िर क्या कर रहा हूँ..

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मैं मुस्कुराया और मैंने अंदर से उसकी साड़ी का तह किया हुआ पार्ट पकड़ा और हाथ बाहर खींच लिया..

जिससे, एक ही झटके में साड़ी पूरी खुल गई..

वो हँसने लगी..

मैंने साड़ी अलग की, अब वो पेटीकोट में थी..

पेटीकोट में से ही उसके चुत्तड़ का आकर देखा कर, मैं पागल हो गया..

उसकी तो गाण्ड भी बहुत गोल थी..

एकदम, चिकनी और गोरी..

सच कहूँ तो ये अच्छा ही हुआ की वो “मांगलिक” थी नहीं तो, ऐसी लड़की मुझे शायद ही नसीब होती..

क्या गाण्ड थी, भाइयों..

ऊपर उठी हुई और मटकिया जैसी गोल..

वैसे भी मुझे, साड़ी में चुत्तड़ देखना बहुत पसंद है..

राह चलती औरत में, सबसे ज़यादा उनकी गाण्ड देखता हूँ, साड़ी में, जीन्स में..

सच बात ये है दोस्तो, मेरा मानना है की अगर औरत के चुत्तड़ (गाण्ड) अच्छे आकर में ना हो तो उस देख कर, सेक्स का बिल्कुल भी मन नहीं होता और अगर कोई साड़ी या जीन्स पहने हुए मस्त बड़े गोल चुत्तड़ दिख जाए तो लण्ड तभी झटके से खड़ा हो जाता है..

कातिलाना चुत्तड़ थे बबिता के तो, जिसे देख कर मेरा लण्ड और कठोर हो गया..

मैंने उसका पेटीकोट उतार दिया..

अब वो बिल्कुल नंगी, मेरे सामने थी..

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मैंने उसकी गाण्ड को खूब प्यार किया, सहलाया और चूमा..

आज पहली बार, मुझे लगा की कहीं मैं झड़ ना जाऊं..

एक राज़ की बात बताता हूँ दोस्तो, जब आपको ऐसा लगे की बस, अब आप झड़ने वाले हैं तो अपना दिमाग़ कहीं और ले जाए और दो पल के लिए, रुक जाएँ..

अब उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और एक हाथ से मेरा लण्ड पकड़ लिया..

मैं अभी भी चड्डी में था..

वो ऊपर से ही, मेरे लण्ड को दबा रही थी..

फिर अचानक, उसने मेरी चड्डी नीचे खींच दी..

मैंने भी पूरी चड्डी बाहर निकाल दी..

कुछ देर, वो एकटक मेरे लण्ड को देखती रही..

उसकी नज़रों से पता चल गया की उसने “पहली बार” लण्ड देखा है..

अब वो मुझे नाख़ून से नोचने लगी..

उसकी आँखों में आँसू आ रहे थे..

आख़िर वो बोली – प्लीज़, सुमित… अब कब तक तरसाओगे… जल्दी, अंदर डाल दो ना…

मैंने भी उसके दोनों पैर, अपनी कमर पर रखे और चूत पर अपना लण्ड रख दिया..

उसने, आँखें बंद कर लीं..

पहले मैंने अपना लण्ड, उसकी “कुँवारी चूत” पर रगड़ा..

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फिर मैंने धीरे से, अंदर डाला..

वो छट पटा गई..

अभी मेरा थोड़ा सा ही लण्ड अंदर गया था पर वो, बेकाबू होने लगी..

असल में तो अभी उसे दर्द का अहसास ही नहीं था क्यूँ की मैंने अभी थोड़ा सा लण्ड, चूत के अंदर किया था..

इतने में ही वो, इतनी मचल रही थी..

अचानक, उसने अपने दोनों पैर से मुझे जम कर पकड़ लिया और अपने दोनों हाथ बिस्तर पर टीका कर, अपनी कमर मे ज़ोर दार झटका देकर मेरे लण्ड पर भरपूर वार कर दिया..

मेरा लण्ड, मेरे ना चाहते हुए भी पूरा चूत में घुस गया..

मेरे लण्ड की चमड़ी, ऊपर चढ़ गई थी..

मुझे ही बहुत दर्द हुआ..

मैं चीख पड़ा और मेरे साथ, वो भी बुरी तरह चीख पड़ी..

अब उसे, बहुत दर्द हो रहा था..

मेरे उसकी चूत पर लण्ड टच करते ही, वो इतनी उत्तेजित हो गई थी की नासमझी में ऐसा कर दिया..

मैं बताना चाहता हूँ की “औरत की झिल्ली” फटने में, जितना ज़्यादा वक़्त लगता है वो इतनी ही मोटी होती जाती है..

सही उम्र, यानी 16 से 20 के दौरान “कुंवारेपन की झिल्ली” फट जाने से, लड़की को उतनी तकलीफ़ नहीं होती जितनी उसके बाद होती है..

खैर, हम कुछ देर रुक गये..

मेरा लण्ड, उसकी चूत में था..

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पहली बार, मुझे भी बेपहना दर्द हो रहा था..

कुछ देर बाद, दर्द कम होने पर मैं हिम्मत करके आगे पीछे हुआ..

उसकी ज़रा सी बेसब्री ने, सारा मज़ा खराब कर दिया था..

कुछ देर बाद, अब कुछ ठीक लगने लगा था..

कुछ भी हो, एक “अप्सरा सा बदन” जो सामने था..

सो, फिर मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाई..

कहानी जारी रहेगी.. ..

यदि आप भी चाहते हैं की आपकी कहानी इसी तरह मेरी सेक्स स्टोरी पर प्रकाशित हो तो बस नोटपैड पर हिन्दी या हिंगलिश में अपनी कहानी लिखिए और भेज दीजिये – [email protected] पर..

Meri Sex Story – Shandaar Chut 4

Written by

मस्त कामिनी

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