मेरी सुहागरात

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नमस्कार दोस्तों मैं टीना आज आपके सामने अपने जीवन का एक किस्सा लेकर आई हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि, बाकी कहानियों की तरह आप सब लोग इसे भी अपना प्यार दोगे।

इस कहानी में पढिए किस तरह से मेरे पति ने मुझे हमारी सुहागरात पर चोदकर मेरी सारी इच्छाएं पूरी कर दी। पिछले साल ही मेरी शादी हुई है, घरवालों ने मेरे लिए एकदम सही लडका चुना था।

मेरे पति का नाम शंकर है, और वो मुझसे उम्र में दो साल बडे है। शंकर दिखने में बहुत ही हैंडसम है, उनके बात करने का अंदाज सबको उनकी ओर आकर्षित करता है।

उन्हें देखकर कोई भी बोल सकता है कि, उनकी शादी से पहली काफी गर्लफ्रैंड रही होंगी। उन्होंने मुझे हमारी दूसरी मुलाकात में ही उनके बारे में सबकुछ बता दिया था।

शादी से पहले वो बस एक ही रिलेशनशिप में थे, और उस लडकी के साथ वो काफी आगे तक का सफर सोच चुके थे। लेकिन उनकी किस्मत, वक़्त और हालात ने उन दोनों को एक-दूसरे से दूर कर दिया।

शादी से पहले मैं कभी किसी के प्यार में नही पडी। तो मेरा पहला रिलेशनशिप मेरे पति के साथ ही था। शादी से पहले हम दोनों कई बार एक-दूसरे को बाहर मिले, ताकि एक-दूसरे को ठीक से जान सके।

उन दिनों ही मैं शंकर के प्यार में पड गई। अब मुझे ऐसा लग रहा था, जल्द से जल्द हमारी शादी हो जाए ताकि हम एक-दूसरे के साथ रह सके।

फिर धीरे धीरे हमारी बातें बढने लगी, हमेशा मैं उनके बारे में ही सोचती रहती थी। उसके बाद जैसे तैसे शादी का दिन आया और हमारी शादी हो गई।

उस दिन तो हम दोनों ही बहुत थक चुके थे, तो जैसे ही मेरी बिदाई हुई और मैं उनके घर गई। वहां जाने के बाद भी कुछ रस्में करनी थी, जैसे तैसे करके सारी रस्में होने के बाद हम सो गए।

फिर आया हमारी सुहागरात वाला दिन, उस दिन सुबह से ही शंकर की बहनें मुझे रात के बारे में पूछकर चिढाने लगे थे। मुझे उनका इस तरह से चिढाना अच्छा ही लग रहा था।

खैर रात होते ही उनकी बहनों ने मुझे नहाने के लिए भेज दिया। उनमें से जो सबसे बडी बहन थी, उसने मुझे वीट थमाते हुए कहा,“मर्दों को वहां पर बाल पसंद नही होते, तो तुम वो साफ कर लेना।”

मैंने बस ठीक है कहा और फिर बाथरूम में घुसकर अंदर से कुंडी लगा दी। मैं शंकर को याद करते हुए ही नहा रही थी, नहाते समय अब आगे क्या होगा यह सोचकर ही मेरे शरीर में एक अजीब सी लहरें दौडने लगी।

मैंने फिर अपनी योनि के आसपास के सारे बाल वीट लगाकर निकाल दिए, और अपनी योनि को पूरी तरह से चिकना बना दिया। आज मैं कली से फूल बनने जा रही थी।

नहाने के बाद, उनकी तीनों बहनों ने मिलकर मुझे सजाया। फिर कुछ देर इधर उधर की बातें करने के बाद, दूध का गिलास मेरे हाथ में थमाकर मुझे अपने नए कमरे में ले जाकर बिस्तर पर बिठा दिया।

थोडी ही देर में, शंकर कमरे में आ गए, तो उनकी बहनें उठकर बाहर जाने लगी। जाते जाते वो उनको भी छेडने लगी। सब के बाहर जाते ही शंकर ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और फिर मेरे पास आकर बैठ गए।

मैं अपनी शादी का जोडा पहनकर घूंघट ओढे बैठी हुई थी।उन्होंने मेरे पास आकर मेरा घूंघट निकाल दिया, और मेरा चेहरा देखकर बोले, “आज तो तुम्हे देखकर चांद भी शरमा जाए। बला की खूबसूरत लग रही हो।”

फिर वो उठकर अपनी जेब से कुछ निकालने लगे। उन्होंने अपनी जेब से एक सोने की चेन निकाली, और मुझे पहनाने लगे।

तो मैंने भी उठकर दूध का गिलास जो टेबल पर रखा हुआ था, उन्हें दिया। उन्होंने उसमें से आधा गिलास दूध पिया और आधा मेरी ओर बढाते हुए बोलने लगे, “आज से हर चीज में तुम मेरी साथीदार हो।”

मैंने भी बिना कुछ बोले, बचा हुआ दूध पी लिया और फिर गिलास को टेबल पर रख दिया। तभी शंकर उठकर मेरे पीछे आकर उन्होंने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड लिया।

उनकी मजबूत पकड अपने चारों तरफ पाकर मुझे अच्छा लग रहा था। यह पहली बार था, जब कोई मर्द मुझे इतने पास से छू रहा हो।

फिर उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे सारे बालों को एक तरफ करके मेरे गले पर अपने होंठ रख दिए। उनके होठों का मुझे बहुत ही गर्म अहसास हुआ जिसकी वजह से मैं सिहर गई।

उनका एक हाथ मेरे चेहरे पर घुमा रहे थे, तो दूसरा हाथ मेरी कमर के आसपास घूम रहा था। फिर उन्होंने अपने होंठ मेरे कान के पास लाते हुए मुझसे पूछा, “क्या तुम इसके लिए तैयार हो?”

इतना बोलकर उन्होंने मेरे कान को अपने होठों के बीच दबा लिया। मैंने बहुत ही धीमे स्वर में हां कहा, तो उन्होंने शायद सुना नही। इसलिए वो मुझसे फिर से पूछने लगे, तो मैंने सर हिलाकर अपनी हां उन्हें बता दी।

जैसे ही मैंने हां कर दी, उन्होंने मुझे घुमाकर सीधे अपनी बाहों में भर लिया, और अपने होठों को मेरे होठों पर रखकर चूमने लगे।

यह मेरे जीवन का सबसे पहला चुम्बन था। मैं भी उनका साथ देने लगी, अगले ही पल मुझे मेरे उरोजों पर उनके हाथ महसूस होने लगे। हमारा पहला चुम्बन काफी देर तक चला।

उसके बाद वो मेरे कपडों के ऊपर से ही मेरे उरोजों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगे। तो मैंने उनसे कहा, “ऐसे तो कपडे खराब हो जाएंगे, क्यों न हम पहले अपने कपडे उतारकर रख दे। इससे कपडे भी खराब नही होंगे, और दोनों को मजा भी आएगा।”

इस पर वो खुश होकर बोले, “यह तुमने बहुत सही कहा, तो चलो तुम मेरे कपडे उतारो और मैं तुम्हारे कपडे उतारता हूं।”

इतना बोलकर वो मेरी शादी का जोडा निकालने में लग गए। तो मैंने उन्हें पहले अपने आभूषण उतारने को कहा। उन्होंने कुछ ही देर में मेरे सारे आभूषण उतारकर टेबल पर रख दिए।

फिर उन्होंने मुझे एक आईने के सामने खडी कर दिया। वहां वो मेरे पीछे आकर मेरे कपडे उतारने लगे। पहले मेरी साडी का पल्लू उन्होंने नीचे गिरा दिया और मेरे स्तनों को अपने हाथों में लेकर नापने लगे।

उनका इस तरह से मेरे शरीर के साथ छेडछाड करना अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था। उसके बाद उन्होंने मेरी कमर से बाकी बची हुई साडी को भी निकालकर अलग कर दिया।

मैं अब ब्लाउज और पेटीकोट में थी, ब्लाउज डिज़ाइनर था, जो मेरी शादी के दिन मैंने पहना था। शंकर ने फिर मेरा ब्लाउज खोलने की कोशिश की, लेकिन वह बहुत टाइट था, तो मुझे उनकी थोडी सहायता करनी पडी।

मेरे ब्लाउज के खुलते ही उनकी नजर जैसे मेरे स्तनों पर ही जम सी गई। उसके बाद वो आईने में मेरे स्तनों को घूरते हुए, मेरी ब्रा के ऊपर से ही स्तनों पर अपने हाथ फिराने लगे।

अब तक उनका लण्ड भी शायद तन चुका था, क्योंकि मुझे बार बार अपने चूतड़ों पर कुछ चुभ सा रहा था। मैंने उनकी हालत समझते हुए उनसे कहा, “आप भी तो अपने कपडे उतारो, कबसे मेरे ही कपडे उतरते जा रहे है।”

तो उन्होंने कहा, “आप ही इन्हें निकालकर यहां टेबल पर रख दो।”

तो अब मैं उनके कपडे उतारने लगी। उनके कपडेउतारना उतना मुश्किल काम नही था, मुझे बस शर्ट और पैंट उतारनी थी।

मुझे उनकी बेल्ट निकालने में थोडी दिक्कत हुई, लेकिन तुरंत ही उन्होंने मेरी सहायता करके अपनी बेल्ट खुद ही उतार दी। आगे की कहानी अगले भाग में लिखूंगी, तब तक के लिए आपसे विदा लेती हूं।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताइए। धन्यवाद।

Written by

Ruby

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