छात्रा की मदमस्त चूचियाँ भा गई

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Hindi Sex Stories के इस कहानी में! पूनम के जाने के बाद मेरी ज़िन्दगी में प्रिया का पहल हुआ और उसने अपनी चुदासी अदाओं से अपनी चुदने के इरादे को जाहिर किया

हाय फ्रेंड्स,

मैं पवन आज बहुत दिनों बाद फिर से हाजिर हूँ एक नई कहानी लेकर! मेरी पिछली कहानी आप लोगों ने खूब पसंद किया और मुझे काफी इ-मेल्स किए।

मैं दिल से सबका शुक्रिया करता हूँ। मैंने पिछली कहानी में बताया था, कि मैंने कैसे पूनम को स्टेशन पर पटाया और फिर कई बार अपने रूम पर ले जाकर चुदाई भी की।

लेकिन! कुछ दिन बाद, जब हम दोनों फाइनल एग्जाम के बाद घर आए, तो धीरे धीरे दूरियाँ बढ़ गई। एक दिन ऐसा आया कि हम दोनों अलग हो गए।

मैं बिल्कुल अकेला सा हो गया! मुझे हमेशा उसकी कमी महसूस होती। 1 महीने घर पर रहने के बाद मैंने वाराणसी के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाने के लिए नामांकन दिया।

अगले शुक्रवार को मुझे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। मैंने इंटरव्यू दिया और मुझे वहाँ रख लिया गया। सोमवार से मुझे कॉलेज जाना था। रविवार को मैंने नया शर्ट, जीन्स और जूते लिया।

मेरा पहला दिन था कॉलेज में! तो मुझे थोड़ी सी हिचकिचाहट हो रही थी। मैं कुछ ना सोचते हुए सीधे क्लास में घुस गया। सारे छात्र गुड मॉर्निंग सर! बोलते हुए खड़े हो गए।

मैंने भी गुड मॉर्निंग! बोला और सबको बैठने के लिए कहा। क्लास में नया टीचर देख कर सभी उमँग में थे, और उनसे कहीं ज्यादा मैं! उसके बाद मैंने सबका परिचय लिया! सबने बारी बारी से अपना परिचय दिया।

पहली ही मुलाकात में नैन लड़ गए

उसी क्लास में एक लड़की थी जिसका नाम प्रिया था। उसके बारे में बता देता हूँ! उसकी लंबाई 5′ 3″ और फिगर 30-26-28 था! काली आँखें और काले रेशमी बाल! क्या क़यामत लग रही थी! कुल मिलाकर वो पूरी माल थी!

अपना परिचय देते हुए, मैंने बताया कि मैं आप लोगों को मशीन पढ़ाऊँगा। सभी काफी खुश दिख रहे थे। मैंने किताब खोला और पढ़ाने लग गया।

मैंने सबको बोल दिया था! अगर किसी को कोई दिक्कत हो तो, वो पूछ सकता है। पढ़ाते हुए मैंने नोटिस किया, कि प्रिया का ध्यान पढाई में नही था। वो बहुत देर से मुझे ही देखे जा रही थी।

उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान दिख रही थी! मैंने किसी तरह लेक्चर ख़त्म किया और बाहर आ गया। उस दिन मैं घर आकर पूरी रात! उसके बारे में सोचता रहा और नींद भी नहीं आ रही थी।

किसी तरह सुबह हुआ! मैं नहा धो कर कॉलेज के लिए निकल गया। हर रोज कॉलेज में मेरा 3-4 लैक्चर होता था। मैं क्लास में गया, और फिर से पढ़ाना शुरू किया।

प्रिया के ख्यालों में मैं था

मैंने देखा! कि आज प्रिया का ध्यान फिर से कहीं और था। आज भी वो मुझे ही घूरे जा रही थी, और अपनी होंठों को दाँतों से दबा रही थी!

इस बार मैंने पूछ ही लिया- क्या बात है? आज पढ़ने का मूड नहीं है, या फिर समझ में नहीं आ रहा है!

वो किताब की तरफ देखते हुए बोली- सर यह विषय फिर से बता दीजिए पूरा समझ में नहीं आया।

मैंने दोबारा! बताकर उसकी शंका को दूर किया। मैंने सबसे बोल दिया था, कि अगर कुछ पूछना रहा हो! तो लंच टाइम में मेरे केबिन में आकर पूछ सकता है।

धीरे धीरे! मुझे वहाँ 1 महीना हो गया था। सारे छात्र लगभग मेरे ही उम्र के थे, इसलिए सब बिना किसी डर के मुझसे सवाल किया करते थे! और मैं सबका प्रॉब्लम हल करता था।

प्रिया का मुझसे पूरी तरह खुलना

सारे छात्र मुझसे बहुत खुश रहते थे और बहुत सम्मान भी करते थे। एक महीना पूरा हो जाने पर मुझे तन्खवाह मिली। मैं काफी खुश था! आते वक्त मैंने घर वालों के लिए मिठाई भी ले कर आया।

उस दिन, मेरे घर के सभी लोग काफी खुश थे! अब प्रिया भी मुझसे काफी खुल गई थी, बिना किसी डर के मुझसे सवाल-जवाब करती थी।

एक दिन! वो मेरे केबिन में आई उसको कुछ पूछना था। वो टेबल पर किताब रखकर सामने से झुक कर मुझसे सवाल पूछ रही थी।

आज वो क्या कयामत लग रही थी! उसकी चूचियाँ तो उसके शर्ट से बाहर आने को तैयार थे! उसको देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया!

प्रिया की चूचियों के जवाब नहीं

मैंने सवाल का हल करते हुए उस पर ध्यान दिया! उसके चूचे थोड़े बाहर निकले हुए थे। शायद उस दिन उसने ब्रा नहीं पहनी थी।

मेरा ध्यान बार बार उसकी चूचियों की तरफ जा रहा था। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ! और मैंने उसके चूचों को धीरे से छू लिया! उसने कुछ भी विरोध नहीं किया.

आहा! क्या मुलायम चूचे थे! मैंने थोड़ी देर उसकी चूचियों को छुआ! फिर मैंने खुद पर काबू रखते हुए सवाल का हल किया।

वो धन्यवाद! सर बोली और हल्की सी मुस्कुरा कर चली गई। इससे पहले मेरे दिमाग में उसके लिए कभी गलत विचार नहीं आए थे!

अब वो अक्सर मेरे केबिन में आती, और मुझसे अपने चूचियों की मालिश करा जाती!

शायद! यह बात उसे भी पता थी, कि मैं उसकी चुदाई करना चाहता हूँ! पर ना मैंने कभी कुछ बोला! और ना ही वो कभी कुछ ऐसा बोली!

धीरे धीरे समय बीतता गया दिवाली की छुट्टी थी, कॉलेज 1 सप्ताह के लिए बंद होने वाला था।

मैंने उसको अपना नंबर दे दिया और बोला- प्रिया अगर पढ़ाई में कोई दिक्कत हो तो, कॉल कर लेना!

वो बोली- ठीक है! सर, और दिवाली की हार्दिक शुभ कामनाएँ! बोलते हुए चली गई।

मैं भी लंबी छुट्टी होने की वजह से गाँव आ गया था। 2 दिन बाद दिवाली थी! मैं दिवाली की तैयारी में लग गया।

दिवाली के दिन! उसने शाम को 7 बजे मुझे कॉल किया। मैंने फ़ोन उठाया, तो उसने कुछ देर तक कुछ नहीं बोला! उसके बाद बोली “हैप्पी दिवाली सर” मैं प्रिया बोल रही हूँ!

मैंने भी खुश होकर उसे दिवाली की शुभ कामनाएँ! दी, और ऐसे ही! कुछ देर बात होती रही।

मैं बोला- अच्छा किया! फ़ोन कर दी वैसे भी तुम्हारी याद आ रही थी!

प्रिया को अपनी चाहत का इज़हार

वो आश्चर्य! होती हुई बोली- मेरी याद!

मैं बोला- हाँ! प्रिया, जब से तुम्हारे उन्नत चूचियों को छुआ है! तब से तुम्हारी चुदाई करने को मन कर रहा है! पर कॉलेज में बोलने की हिम्मत नहीं कर सका!

वो चुप रही! और कुछ भी नहीं बोली, और मेरी बातों को गौर से सुनती गई!

मैंने फिर पूछा- यह तुम्हारा पर्सनल नंबर है!

वो मुस्कुराई और बोली- हाँ!

उसके बाद, अचानक! उसने फ़ोन काट दिया, तो मैं समझ गया कि वो भी मुझसे चुदना चाहती है!

फ़ोन पर चुदाई भरी बातें<'/h2>
फ़ोन रखने के बाद! मैंने उसका नंबर अपनी मोबाइल में सेव कर लिया। अब मैं अक्सर उसको कॉल करने लगा और कभी कभी वो भी!

धीरे धीरे! हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ गए। फ़ोन पर! मैं उसे पढ़ाया भी करता था और चुदाई भरी बातें भी करता था।

छुट्टी बीत गया! मैं भी वापस वाराणसी आ गया। सोमवार से कॉलेज चालू था।

रविवार को रात में उसने 9 बजे कॉल किया और बोली- सर, मैं कल कॉलेज नहीं आऊँगी!

मैं चौंक गया! और पूछा- क्यों?

प्रिया मुझसे चुदने को हुई राजी

वो मुस्कुराई और बोली- बस ऐसे ही!

मैंने फिर पूछा- बताओ तो सही! क्यों नहीं आओगी तुम? तुम्हारे बिना कॉलेज में मन नहीं लगेगा!

वो फिर मुस्कुराई और बोली- थोड़ी दिक्कत आ गई है!

मैंने जोर देकर पूछा- प्लीज! बताओ ना जान! क्या प्रॉब्लम है?

पहले! उसने मना किया! फिर शरमाते हुए बोली- आज मेरा मन कुछ ठीक नहीं है! क्या? आप आ सकते हैं मेरे घर!

मैं समझ गया! वो भी अब मुझसे चुदना चाहती है! मारे खुशी के मैं पागल हो रहा था!

मैंने अपने पर काबू रखते हुए बोला- ऐसा क्या हुआ है! तुम्हें?

उसने मुझसे बोला- आप सब समझते हैं! कि मेरा भी आपसे चुदने को मन कर रहा है!

मैंने उससे बोला- मैं अभी नहीं आ सकता! जान! तुम कल कॉलेज आओ फिर बताऊँगा, कि कैसे! तुम्हारी चुदाई करनी है?

कुछ देर! हमारी चुदाई भरी बातें हुई और फिर हम दोनों सो गए!

अगले दिन! जब मैं क्लास में गया तो देखा! उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कुराहट और शर्म थी!

वो शरमाते हुए कभी मेरी ओर देखती तो कभी किताब में! मुझे भी रात वाली बात याद आ रही थी! मैंने क्लास ख़त्म की और प्रिया को अपने केबिन में बुलाया!

दोस्तो, इससे आगे क्या हुआ? यह जानने के लिए आप लोग उत्सुक होंगे! तो इसके लिए अगली भाग का इंतज़ार करें और मेल करते रहे!
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कहानी जारी रहेगा!!

प्रिया के चूचों को देख रहा मुझसे रहा नहीं गया, और मैंने उसके चूचों को सहलाना शुरू कर दिया पर उसने कुछ नहीं बोला, तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने और अच्छी तरह से प्रिया के उन्नत चूचों को सहलाने लगा और अब मैं उसकी चुदाई करना चाहता था पर मैं उसका जवाब चाहता था! उसका जवाब क्या था? Hindi Sex Stories की अगली कड़ी पढ़ें!

Written by

guruji

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